आत्मा चल बसी, देह को कटवा रहे चक्कर

जग छोडने के बाद भी व्यवस्था के चक्कर में शव
सरहद के फेर में अमृतकौर चिकित्सालय में नहीं कर रहे पोस्टमार्टम, पाली व राजसमंद जिले के शव को संबंधित अस्पताल में करवाना पर पोस्टमार्टम, आने-जाने के चक्कर में हो रहे परिजन परेशान

By: Bhagwat

Published: 23 May 2020, 12:02 PM IST

ब्यावर. मरने के बाद कोई भी हो वों पूजनीय हो जाता है। शव के अंतिम संस्कार में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं हो। इसके लिए तमाम प्रयास किए जाते है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं के चलते अब परिजनों को शव को लेकर चक्कर काटने पड़ रहे है। अमृतकौर चिकित्सालय में पिछले कुछ दिनों से ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सालय प्रशासन का कहना है कि उनके अस्पताल सांस थमी तो शव का पोस्टमार्टम यहां होगा। यहां लाने से पहले ही सांस थम गई तो थाना क्षेत्र के संबंधित अस्पताल में ही पीएम करवाना होगा। जबकि किसी के परिवार के सदस्य के जाने के बाद उन्हें सांत्वना की आवश्यकता होती है। अस्पताल की व्यवस्थाओं उनका दु:ख और बढ़ जाता है।राजकीय अमृतकौर अस्पताल में अजमेर के जिले के अलावा राजसमंद, पाली, भीलवाड़ा व नागौर जिले के मरीज उपचार करवाने आते है। आस-पास के क्षेत्र में बीमार होने पर उसे अमृतकौर चिकित्सालय ही लेकर पहुंचते है। पिछले कुछ दिनों से यहां पर आने वाले शव का पोस्टमार्टम संबंधित थाना क्षेत्र का होने पर ही किया जा रहा है। अगर किसी अन्य थाना हल्के या जिले का होने पर शव को वहीं भिजवाया जा रहा है। इससे परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल प्रशासन का यह है तर्क
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगर कोई अस्पताल आता है। उसका उपचार के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसका पोस्टमार्टम यहां पर किया जाता है। अगर मृत लेकर यहां पहुंचते है तो उस शव को वापस संबंधित थाना क्षेत्र के अस्पताल भिजवा दिया जाता है। ताकि वहां पर पोस्टमार्टम हो सके।

होती है परेशानी...
अमृतकौर चिकित्सालय में शव का पोस्टमार्टम नहीं करने पर उसे वापस संबंधित थाने के अस्पताल में ले जाना होता है। इसमें आवाजाही का समय लगता है। इसके अलावा वहां पर चिकित्सक के आने एवं प्रक्रिया पूरा करने के कारण खासा समय जाया होता है। तब तक मृतक के परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इस स्थिति को समझना होगा...
ब्यावर शहर की सीमा खत्म होते ही पाली जिला शुरु हो जाता है। जो शहर में महज दस से 15 किलोमीटर है। ऐसे ही राजसमंद जिले की सीमा भी महज बीस-25 किलोमीटर के बाद शुरु हो जाती है। यहां के लोग उपचार के नजरिए से अमृतकौर अस्पताल ही आते है। ऐसे में किसी की मृत्यु होने पर उन्हें चालीस से पचास किलोमीटर दूर भेजना उनके लिए परेशानी बढ़ाने वाला है।

केस संख्या एक
पाली जिले के रायपुर क्षेत्र के चांग ग्राम पंचायत के कलाली का बाडिय़ा निवासी श्रमिक रमेश काठात सिलीकोसिस बीमारी से ग्रसित था। 19अप्रैल को तबीयत बिगडऩे पर परिजन उसे ब्यावर के इसी सरकारी अस्पताल लाए थे। उपचार के दौरान श्रमिक का दम टूट गया। चिकित्सा प्रशासन ने यह कहते हुए पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया कि श्रमिक की मौत अस्पताल लाते समय रास्ते में हुई है। जिससे पोस्टमार्टम संबधित पीएचसी या सीएचसी में कराओ। श्रमिक के शव को परिजन चांग लेकर गए वहां मोर्चरी की व्यवस्था नहीं होने पर बर पीएचसी लेकर आए।

केस संख्या दो
भीम थाना क्षेत्र के फत्ताखेडा निवासी सुखदेव बुधवार सुबह एक दुर्घटना में घायल हो गया। परिजन घायल को राजकीय अमृतकौर अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। उसके शव को मोर्चरी में रखवाया। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने भीम थाना क्षेत्र का मामला होने के कारण ब्यावर में पोस्टमार्टम करने से असमर्थता जता दी। परिजनों को शव भीम ले जाने के निर्देश दिए। ऐसे में हादसे के बाद भी मृतक के परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इनका कहना है...
अगर इस तरह के मामले है तो इसकी जानकारी लेकर दिखवाते है। किसी को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इसका पूरा ध्यान रखते है।
-आलोक श्रीवास्तव, पीएमओ,अमृतकौर अस्पताल ब्यावर

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