सतपुड़ा से 320 मेगावाट बिजली उत्पादन, चार इकाइयां है बंद

प्रदेश में बिजली की मांग कम होने की वजह से दो इकाइयां रिजर्व शट डाउन पर

By: yashwant janoriya

Published: 31 Mar 2020, 11:32 PM IST

सारनी. प्रदेश के प्रमुख प्लांटों में से एक सतपुड़ा पॉवर प्लांट से सोमवार को 320 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ, जबकि क्षमता 1330 मेगावाट है। प्रदेश में बिजली की मांग कम होने की वजह से सतपुड़ा की 420 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों को रिजर्व शट डाउन में बंद रखा गया है। वहीं दो इकाइयां 29 फरवरी से कोयले की कमी के चलते बंद है। यानी कि सतपुड़ा की 830 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयां विभिन्न कारणों से बंद है।
वहीं बिजली की मांग कम होने की वजह से 250-250 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां 90-90 मेगावाट के बेकिंग डाउन पर चलाई जा रही है। फिलहाल 10 व 11 नंबर इकाई 160-160 मेगावाट के लोड पर चल रही है। जिनसे 320 मेगावाट के आसपास बिजली उत्पादन हो रहा है। सतपुड़ा की चार इकाइयां लंबे समय से बंद रहने के चलते बिजली उत्पादन लुढ़ककर जहां 320 मेगावाट पर सिमट गया है। वहीं कोल स्टॉक बढ़कर 2 लाख 52 हजार मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। सतपुड़ा पॉवर प्लांट सारनी से फिलहाल क्षमता से 1010 मेगावाट कम बिजली उत्पादन हो रहा है। सोमवार को प्रदेश में अधिकतम बिजली की मांग लगभग 8 हजार मेगावाट रही। वहीं प्रदेश के प्रमुख प्लांटों में से एक सतपुड़ा की करीब चार दशक पुरानी चार इकाइयां नियामक आयोग के मापदंड पर खरी नहीं उतर रही। इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण नियंत्र बोर्ड के नाम्स भी पूरे नहीं कर पा रही है।
ऐसी स्थिति में यह चारों इकाइयां कभी भी बंद की जा सकती है। फिलहाल दो इकाइयां रिजर्व शट डाउन यानी की आरएसडी और दो इकाइयां कोयले की कमी के चलते बंद है। यह (चारों पीएच-टू और पीएच-थ्री) की 6, 7, 8 और 9 नंबर इकाई है। इनकी क्षमता 830 मेगावाट है। पॉवर प्लांट के जानकार बताते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 1 क्यूबीक मीटर में 100 मिलीग्राम राख उत्सर्जित होनी चाहिए। लेकिन 300 से 400 मिलीग्राम राख निकल रही है। इसी तरह पानी और कोयले की खपत भी ज्यादा हो रही है। इसके अलावा निकलने वाली 100 प्रतिशत राख का उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इन चारों इकाइयों को बंद करने के आदेश कभी भी प्राप्त हो सकते हैं। सूत्रों की माने तो यह आदेश अप्रैल माह में भी जारी हो सकते हैं।

महुआ बीनने आग के हवाले कर रहे जंगल
सारनी. वन विभाग द्वारा जंगल को आग से बचाने कवायद तो की जा रही है। बावजूद इसके महुआ बीनने लोग जंगल को आग के हवाले कर रहे हैं। इससे जहां छोटे पौधों को नुकसान पहुंचता है। वहीं छोटे जीवों भी प्रभावित होते हैं। औद्योगिक नगरी सारनी, पाथाखेड़ा व आसपास के जंगलों में इन दिनों महुआ बीनने बड़ी संख्या में लोग जंगल में पहुंच रहे हैं। जिनके द्वारा पत्तों को साफ करने के बजाय उनमे आग लगा दी जा रीह है। जिससे आग कभी भी बेकाबू होकर पूरे जंगल को अपने आगोश में लेने से इंकार नहीं किया जा सकता। इन दिनों सतपुड़ा के जंगल कई महुआ के पेड़ों की पत्तियों को आग के हवाले कर दी गई है।

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