घरों तक नहीं पहुंचे मीटर वाचक, एवरेज बिलिंग की तैयारी

उपभोक्ताओं को नहीं मिले अब बिजली बिल

By: yashwant janoriya

Published: 27 Mar 2020, 10:44 PM IST

बैतूल. जिले में लॉक डाउन के चलते विद्युत वितरण कंपनी के मीटर वाचक इस महीने बिजली उपभोक्ताओं के घरों तक नहीं पहुंच पाए हैं। दस हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं के मीटरों की रीडिंग नहीं हो सकी है। कंपनी का कहना है कि २० हजार उपभोक्ताओं को रीडिंग के आधार पर बिलिंग कर दी गई है। शेष दस हजार उपभोक्ता जिनके मीटरों की रीडिंग नहीं हुई है,उन्हें एवरेज बिलिंग के आधार पर भुगतान करना होगा। पिछले साल और इस साल की बिजली खपत के आधार पर एवरेज बिलिंग लोगों को की जाएगी। वैसे लॉक डाउन के कारण उपभोक्ता बिजली बिलों का भुगतान भी इस समय नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में कंपनी द्वारा उपाय एप डाउनलोड कर बिजली बिलों का भुगतान करने की अपील की गई है।
नहीं मिले बिल
लॉक डाउन की वजह से मीटर वाचकों द्वारा दस हजार से अधिक मीटरों की रीडिंग नहीं ली गई है। ऐसे में इन उपभोक्ताओं की बिलिंग को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। चूंकि वित्तीय वर्ष का अंतिम माह चल रहा है। ऐसे में राजस्व वसूली के लिए कंपनी द्वारा पिछले साल और इस साल की खपत के आधार पर एवरेज बिलिंग करने की तैयारी कर रही है। साथ ही बिजली उपभोक्ताओं को ऑनलाइन माध्यमों से बिजली बिलों का भुगतान करने की बात कहीं जा रही है। हालंाकि लॉक डाउन के कारण जो स्थिति बनी है उस वजह से लोग फिलहाल बिजली बिल भुगतान की स्थिति में नहीं है। कंपनी का कहना था कि जिन २० हजार उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्र में बिल जारी कर दिए गए हैं वे कंपनी के उपाय एप को डाउनलोड कर बिजली बिलों का भुगतान आसानी से कर सकते हैं।

32 परिवारों के सामने भोजन संकट
बैतूल. पुलिस लाइन में पुलिस हाउसिंग विभाग की बिल्डिंग का निर्माण कर रहे ३२ मजदूरों के परिवारों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। ठेकेदार मजदूरों को पांच-पांच सौ रुपए देकर गायब हो गया है। दुकानें बंद होने से मजूदरों को भोजन बनने के लिए राशन नहीं मिल पा रहा है। मजदूरों का कहना था कि ठेकेदार ने जो राशि दी है वह ऊंट के मुंह में जीरे के सामान हैं, क्योंकि इस समय सभी खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ गए हैं। पांच सौ रुपए में मुश्किल से सप्ताह भर ही गुजारा हो सकेगा। इसके बाद क्या खाएंगे और बच्चों को क्या खिलाएंगे। मजदूरों ने बताया कि पिछले तीन दिनों से खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी पीकर काम चलाना पड़ रहा है। इस मामले में टीआई राजेंद्र धुर्वे का कहना था कि यदि राशन के लिए आते हैं तो उनकी हर संभव मदद की जाएगी। वहीं पारधी ढाने में भी गरीबों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है।

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