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साधु-संतों के साथ मिलकर लड़ेंगे बृज के पर्वतों को बचाने की लड़ाई

-15 में खनन पर नहीं लगी रोक तो देशभर में आंदोलन करेंगे साधु-संत, आज होगी गुर्जरों की महासभा व संतों का सम्मेलन

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साधु-संतों के साथ मिलकर लड़ेंगे बृज के पर्वतों को बचाने की लड़ाई

साधु-संतों के साथ मिलकर लड़ेंगे बृज के पर्वतों को बचाने की लड़ाई

भरतपुर/डीग. आदिबद्री व कनकांचल पर्वत पर हो रहे खनन के विरोध में 34 दिन से आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक आंदोलन का कोई हल नहीं निकल सका है। गांव पसोपा में गुरुवार को हुई किसान पंचायत में निर्णय लिया गया कि अगर एक माह के अंदर रोक नहीं लगाई गई तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा। किसान संगठनों के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने ब्रज के पर्वतों को अविलम्ब खनन मुक्त कराने का प्रस्ताव पारित कर राजस्थान सरकार की ओर से शीघ्र कार्यवाही न किए जाने पर आर पार की लड़ाई का एलान किया।
किसान नेताओं का कहना था कि पिछले 20 वर्षों से समूचे ब्रज क्षेत्र का साधु-समाज व ग्रामीण कनकांचल एवं आदिबद्री पर्वतों को पूर्ण रूप से खनन मुक्त कराने के लिए संघर्षरत है। वर्ष 2009 में लम्बे संघर्ष के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने डीग व कामां तहसील में पड़ रहे पर्वतों को खनन मुक्त कर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था लेकिन नगर व पहाड़ी तहसील में पड़ रहे इन्हीं पर्वतों के हिस्से को त्रुटि वश छोड़ दिया था । तब से स्थानीय ग्रामवासी व समाज इनकी रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। कितने ही प्रदर्शन व आंदोलन किए गए लेकिन खनन माफियाओं के प्रभाव के कारण सरकार व प्रशासन आज तक कुछ नहीं कर पाया। इससे त्रस्त व धैर्यहीन होकर 16 जनवरी से स्थानीय ग्रामीण व साधु-संत निर्णायक आन्दोलन के लिए धरने पर बैठे हुए हैं। धरने के 34 दिन बीतने के पश्चात भी प्रशासन ने कोई भी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई है। सरकार के इस रवैये से को देखते हुए आंदोलनकारियों ने अब आन्दोलन को अलग दिशा देने के लिए इस विषय को स्थानीय स्तर से पहले राज्य फिर राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना बनाई है। इसके तहत जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन करने की योजना बनाई जा रही है। पंचायत में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ब्रज के पर्वत हमारे भगवान हैं व यहां की कृषि भूमि हमारी मां है, इनको अगर कोई ऐसी दृष्टि से देखेगा तो किसान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अब ब्रज के पर्वतों पर एक माह में खनन पर प्रतिबंध नही लगाया गया तो किसान वर्ग लाखों की संख्या में भरतपुर में अनिश्चितकालीन पड़ाव डालेगा। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह राणा ने चेतावनी दी कि सरकार साधू संतों की बात सुन ले अन्यथा ब्रज के पर्वतों के लिए ऐसा आन्दोलन खड़ा किया जाएगा जो अभूतपूर्व होगा। पूर्व विधायक गोपी गुर्जर ने पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि अशोक गहलोत सरकार ने ही वर्ष 2009 में साधु संतों की मांग मानते हुए डीग और कामां के तहत आने वाले पर्वतों को खनन मुक्त कर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था परन्तु अगर नगर व पहाड़ी में उन्हीं पर्वतों के अभिन्न हिस्सों को खनन मुक्त नहीं किया गया तो पूर्व में किया हुआ संरक्षण व्यर्थ हो जाएगा।

भरतपुर में डाला जाएगा अगला महापड़ाव

पंचायत में मानमंदिर के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने किसान पंचायत में पारित प्रस्ताव को पढ़ते हुए ऐलान किया कि यह पंचायत सरकार व प्रशासन को 15 दिन का समय देती है कि अगर इस अंतराल में नगर व पहाड़ी तहसील में पड़ रहे आदिबद्री व कनकांचल के हिस्से को खनन मुक्त नहीं किया गया तो भरतपुर में किसानों, ब्रजवासियों व साधु संतों का अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा। इसके परिणाम की जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी। किसान पंचायत में प्रमुख रूप से आदिबद्री महंत शिवराम दास, भूरा बाबा, साध्वी मधुबनी, सत्यप्रकाश यादव, सरपंच विजयसिंह, किसान यूनियन के पदाधिकारी राम सिंह, राम प्रताप सिंह, अरुण कुमार सिंह, निहाल, देवीराम, जीतराम, बदले सिंह, सूरजमल, एडवोकेट कुलदीप बैंसला, गोपाल दास, कृष्णदास बाबा, ब्रजकिशोर बाबा, कृष्ण चैतन्य, मुकेश शर्मा बाबा आदि उपस्थित थे।

इधर, रॉयल्टी वसूली को लेकर वर्चस्व की जंग

पहाड़ी. रॉयल्टी वसूली का ठेका होने के साथ ही अब वर्चस्व की लड़ाई भी शुरू हो गई है। कोई अधिक रॉयल्टी वसूली की शिकायत कर रहा है तो कोई इसमें हिस्सेदार नहीं बन पाने के कारण खिलाफत में उतर आया है। नांगल क्रशर जोन व अन्य खनन क्षेत्र में काला कारोबार अब केंद्र बिंदु बना हुआ है। कानून का राज कम दबंगों, अपराधियों का राज चलता प्रतीत हो रहा है। थानों में झूठे मुकदमो की बाढ आ गई है। असहाय परिवादी की रिपोर्ट जांच में डाली जा रही है। पीडि़त की रिपोर्ट में नामजद आरोपी खुले में घूम रहे हैं। पुलिस प्रशासन जानते हुए अनजान बना बैठा है। चारागाह, वन सरक्षित पहाड़ों पर खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी लिए कहीं भागवत कथा तो कहीं जाम, धरना प्रदर्शन जारी है। इन दिनो रॉयल्टी एव सिलिकासेंड के ठेकेदारों के बीच घमासान मचा हुआ है। गत दिनों दोनों पक्षों मे मारपीट व लूटपाट के परस्पर मुकदमे गोपालगढ़ थाने मे दर्ज करा दिए है। इसमें खनिज विभाग, क्रशर संचालकों की भूमिका सदिंग्ध मानी जा रही है। जो लोडिंग पर्ची की आड़ में खनन सामग्री पर अधिक टैक्स वसूल रहे हंै। गोपालगढ़ एसएचओ पूरन सिंह ने बताया कि रॉयल्टी के समुन्द्र सिंह व सिलिकासेन्ड के दौलतसिंह ठेेकेदार के परस्पर मुकदमे दर्ज हो चुके है। रिपोर्ट दर्ज कराने से किसे रोक सकते हंै। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाही की जाएगी।