गुडग़ावां कैनाल: हर जुबां पर पानी ही पानी...फिर भी आज तक समस्या नहीं जानी

गुडग़ावां कैनाल: हर जुबां पर पानी ही पानी...फिर भी आज तक समस्या नहीं जानी

Rohit Sharma | Publish: Apr, 23 2019 07:04:04 AM (IST) Bharatpur, Bharatpur, Rajasthan, India

यह मुद्दा ही नहीं हजारों किसानों का वह दर्द है, जिसका इलाज सिर्फसरकार के पास है। लेकिन चुनाव के वक्त यह दर्द नेताओं को महसूस तो होता है पर अधिक समय तक बरकरार नहीं रख पाते।

भरतपुर. यह मुद्दा ही नहीं हजारों किसानों का वह दर्द है, जिसका इलाज सिर्फसरकार के पास है। लेकिन चुनाव के वक्त यह दर्द नेताओं को महसूस तो होता है पर अधिक समय तक बरकरार नहीं रख पाते। गुडगांव कैनाल ही कामां व डीग विधानसभा क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ा मुद्दा है। क्योंकि यहां कभी यमुना जल समझौते के तहत पूरा पानी नहीं मिल सका है। माह जनवरी वर्ष 1960 भरतपुर के सांसद बाबू राजबहादुर नेेेेेे केन्द्रीय सिंचाई मंत्री केएल राव से इस गुडगावां कैनाल की आधारशिला रखवाई गई। उस समय भरतपुर सांसद नागरिक उड्डयन मंत्री थे। उनका सपना था कि भरतपुर जिले का यह मेवात क्षेत्र गंगानगर जैसा खुशहाल हो। लेकिन उनका यह सपना पूरा इसलिए नहीं हो पाया कि इस गुडगावां कैनाल से निकलने वाली वितरिकाओं का विस्तार नहीं हो सका।

 

यमुना जल समझौता के अनुसार इस कैनाल में आज तक पानी नहीं आया। इस क्षेत्र को किसान आज भी अपनी फसल की सिंचाई के लिए वंचित है। क्योंकि यहां के किसानों को गुडगांवा कैनाल से समझौते के अनुसार यदि पानी मिले तो इस क्षेत्र का किसान भी गंगानगर की तरह खुशहाल होगा। इसके अलावा क्षेत्र का जल स्त्रोत भी बढ़ेगा। क्योंकि प्रत्येक गर्मी के मौसम में वाटर लेवल नीचे चला जाता है। साथ ही गुडगावां कैनाल में 12 महीने पानी आने से इस क्षेत्र का जल स्तर भी ऊंचा होगा। लेकिन विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव हो नेता गुडगावां कैनाल में बारहमासी पानी दिलाने का वादा करते है। लेकिन चुनाव जीतने के बाद तो नेताओं की ओर से वादे को भुला दिया जाता है। साथ ही भरतपुर लोकसभा क्षेत्र से जीतने वाले सांसद तो पांच तक मेवात क्षेत्र की समस्याओं की ध्यान नही देते है और वादे धरे के धरे रह जाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में 70 प्रतिशत लोग रहते है और वहां पीने के पानी की समस्या भी पूरी तरह से बनी रहती है। गावों का जल स्तर भी इस कैनाल में पानी आने से ही ऊंचा होगा। इस गुडगावां में आने वाले पानी से कामां-पहाड़ी ड्रेन को भी भरा जा सकता है। इस गुडगावां कैनाल से दूर दराज मौजूद गावों का भी जल स्तर ऊंचा हो सकेगा और पशुओं के पीने के पानी की समस्या से ग्रामीणों को निजात मिल सकेगी। क्योंकि कामां पहाड़ी ड्रैन से करीब एक हजार पोखरों को भरा जा सकता है।

 


क्षेत्र के लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेताओं की ओर से पानी सहित अन्य समस्याओं को लेकर वादे किए जाते है। लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेता वादो को भुला दिया जाता है। समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है। इस गुडगावां कैनाल से 25 माइनर निकली है। इनमें से कुछ माइनरों का अस्तिव ही समाप्त हो चुका है और राजस्थान में इस नहर की लम्बाई 33 किमी है। यह गुडगावां कैनाल ओखला वैराज से लेकर हरियाणा में 90 किमी है। उससे आगे चैन 0 जुरहरा थाने के गांव जीराहेड़ा से राजस्थान में प्रवेश कर जाती है। हरियाणा सरकार की ओर से राजस्थान के हिस्से का गुडगांवा कैनाल में माध्यम से छोड़े जाने वाला पानी को हरियाणा के लोग चोरी करते हैं। इससे इस क्षेत्र को कम मात्रा में पानी मिल पाता है। इससे यहां के किसानों की पूर्ति नहीं हो पाती है और यहां पर पानी के लिए हा-हाकार मचा रहता है।

 

वर्ष 1994 में राजस्थान के जल संसाधन विभाग के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब के साथ बैठ कर गुडगावां कैनाल से यमुना जल समझौता के तहत हरियाणा के माध्यम से समझौता हुआ था। लेकिन ओखला बैराज से कभी भी इस समझौते के मापदंड के अनुसार पानी नहीं मिल पाता है और भरतपुर जिले के किसान पानी के लिए परेशान होते रहते है। कामां मेवात क्षेत्र की पोखर भी सूखी पड़ी हुई है। इससे पशुपालक भी परेशान होते नजर आते है। लेकिन विभाग के अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। 1995 में हुए यमुना जल समझौता के तहत राजस्थान के हिस्से में जुलाईसे अक्टूबर तक 1281, नवंबर से फरवरी तक 258 व मार्च से जून तक 288 क्यूसेक पानी देना तय हुआ था। लेकिन इस समझौते की आज तक कोईपालना नहीं हो सकी है।

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