पत्रिका चेंजमेकर्स अभियान : लोकतंत्र के चारों स्तंभ ईमानदारी से चले तो राजनीति सुधर जाएगी

Satya Narayan Shukla

Publish: May, 17 2018 09:04:34 PM (IST)

Bhilai, Chhattisgarh, India
पत्रिका चेंजमेकर्स अभियान : लोकतंत्र के चारों स्तंभ ईमानदारी से चले तो राजनीति सुधर जाएगी

शहर के वकीलों ने राजनीति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए मीडिया हाउस व अधिवक्ताओं को ही सबसे बड़ा दोषी बताया।

राजनांदगांव. 'पत्रिकाÓ महाअभियान चेंजमेकर के तहत गुरुवार को शहर के वकीलों से विशेष परिचर्चा हुई। उन्होंने स्वच्छ राजनीति के लिए बेबाकी से अपनी राय रखी। राजनीति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मीडिया हाउस व अधिवक्ताओं को ही सबसे बड़ा दोषी बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इसके लिए स्वयं में बदलाव लाने की बात कही।

राजनीति में पूंजीपति व भ्रष्ट लोगों का बोलबाला
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनोज चौधरी ने अभियान की तारीफ करते हुए सभी लोगों को इसके लिए आगे आने की बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की राज होना चाहिए। इसके लिए राजनीति में बेदाग छवि व ईमानदार लोगों को सामने आने की जरूरत है। संघ के सचिव केके सिंह ने कहा कि ईमानदार व सज्जनों की निष्क्रियता के कारण ही राजनीति में पूंजीपति व भ्रष्ट लोगों का बोलबाला है। देश को इस वजह से ज्यादा नुकसान हो रहा है। पढ़े-लिखे लोगों का नैतिक कर्तव्य है कि हम लोगों को जागरुक करें।

हर क्षेत्र में स्वच्छता की आवश्यकता

संजीव श्रीवास्तव ने राजनीति में वंशवाद को बदलने की बात कही। कहा कि आज समाज में लोगों की लालसा बढ़ गई है। इसके लिए वे किसी हद तक जा रहे हैं। ऐसे में सिर्फ राजनीति मेें ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में स्वच्छता की आवश्यकता है। अधिवक्ता उमाकांत भारद्वाज ने कहा कि सोच बदलने की जरूरत है। वोट की खरीद-फरोख्त बंद हो इसके लिए बदलाव लाने की जरूरत है। राजनीति मजाक बन गई है। वर्तमान में राजनीति दल देश को जाति, धर्म व समुदाय के नाम पर बांटने में लगी है। यह देश के लिए बेहद हानिकारक साबित हो रहा है। उन्होंने के लिए आज के परिवेश की पत्रकारिता को भी दोषी बताया।

शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य होना चाहिए

अधिवक्ता जितेंद्र वैष्णव ने कहा कि आज मीडिया कितनी ईमानदार है। किस उद्देश्य से समाचार या मुहिम चलाए जा रहे हैं। राजनीति में भी यही हाल है। कार्यपालिका चरमराया हुआ है। इसके लिए पूरी सरकार व प्रशासन की व्यवस्था जिम्मेदार है। न्यायपालिका, कार्यपालिका, व्यवस्थापिका व मीडिया राजनीति दबाव से स्वतंत्र नहीं है। ये सभी ईमानदारी से चले तो राजनीति सुधर जाएगी। राजनीति में सुधार के लिए सभी को आगे आना चाहिए। राजनीति में आने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य होना चाहिए। पूरा सिस्टम राजनीतिक दबाव में चल रहा है।अधिवक्ता रूपेश दुबे ने राजनीति में पारदर्शिता को जरूरी बताया। दल को अपने प्रत्याशी चुनते समय उनके कार्यक्षमता व छवि को देखने की बात कही।

Rajnandgaon patrika

पत्रिकारिता के ईमानदार होने पर ही राजनीति में सुधार

अधिवक्ता गजेंद्र बक्शी ने लोकसभा व राज्य सभा के गठन के उद्देश्यों को विस्तार से बताया। उन्होंने राज्यसभा को लोकसभा का सचेतक बताते हुए कहा कि राज्यसभा में अब समाज के प्रतिष्ठित लोगों के न होने को गलत बताया। राजनीति को स्वच्छ करने के लिए उन्होंने पत्रकारिता की व्यवस्था बदलने की बात कही। पेड न्यूज नहीं छापने की बात कही। पत्रिकारिता के ईमानदार होने पर ही राजनीति में सुधार आने की बात कही।

आरक्षण से समाज को नुकसान

अधिवक्ता विनिता मदान ने राजनीति के व्यवसायीकरण को गलत बताया। उन्होंने देशप्रेम को ही राजनीति का उद्देश्य होने की बात कही। राजनीति में आने के लिए शिक्षा का अनिवार्य किए जाने पर भी जोर दिया।अधिवक्ता दिलीप कुमार साहू ने कहा कि समाज नेता पैदा करता है। राजनीतिक दलों को स्थानीय लोगों को मौका देने की बात कही। कहा कि खुद को ईमानदार होने की जरूरत है। तभी सुधार होगा। आरक्षण के कारण भी राजनीति में कम पढ़े-लिखे लोग चुनकर आ जाते हैं। इससे समाज को नुकसान होता है।

राज करने के लिए कोई नीति बनाता
अधिवक्ता सुधांशु जोशी ने राजनीति शब्द की परिभाषा को बदलने की बात कही। उन्होंने राजनीति को डिफाइन करते हुए कहा कि राज करने के लिए कोई नीति बनाता है, उसे ही राजनीति कहते हैं। ऐसे में राजनीति को जननीति या लोकनीति नाम देने की बात कही। उन्होंने राजनीति में ईमानदारी को मुश्किल व असंभव कार्य बताया। उन्होंने राजनीति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए सबसे ज्यादा जवाबदार मीडिया और वकीलों को ही माना।

वर्तमान समय की राजनीति का स्तर बेहद निम्न

अधिवक्ता रशीद खान ने कहा कि आज राजनीति नेता का, नेता के लिए और नेता के परिवार के लिए सिमट कर रह गया है। उन्होंने कहा राजनीति पूरी तरह व्यवसाय बन चुकी है।अधिवक्ता हफीज खान ने वर्तमान समय की राजनीति के स्तर को बेहद निम्न बताया। राजनीति के लिए शिक्षा व समाजसेवा की तर्जुबा को भी अहम बताया। योग्यता का मापदंड तय करने पर जोर दिया।

शिक्षा के साथ संस्कार की आवश्यकता पर जोर
अधिवक्ता राजेश टंडेल ने समाज के हर क्षेत्र में स्वच्छता लाने की बात कही। सुधार के लिए शिक्षा को नाकाफी बताते हुए शिक्षा के साथ संस्कार की आवश्यकता पर जोर दिया। समाज के चारों स्तंभ में शिक्षा व संस्कारित लोगों के आने पर ही सुधार की कल्पना करने की बात कही।

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