छत्तीसगढ़ में कोरोना मरीजों की सबसे ज्यादा मौतें दुर्ग में, दिल्ली से जांच के लिए पहुंची टीम, डॉक्टरों से पूछा कैसे कम होगा डेथ रेट

दुर्ग जिले में कोरोना के मिल रह नए केस और मौत पर नियंत्रित नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर सेंट्रल की टीम मंगलवार को दुर्ग पहुंची। टीम के साथ राज्य से एक चिकित्सक भी थे।

 

By: Dakshi Sahu

Updated: 03 Mar 2021, 01:07 PM IST

भिलाई. दुर्ग जिले में कोरोना के मिल रह नए केस और मौत पर नियंत्रित नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर सेंट्रल की टीम मंगलवार को दुर्ग पहुंची। टीम के साथ राज्य से एक चिकित्सक भी थे। टीम ने जिला के आला अधिकारियों से पूछा कि कोरोना के केस कम हो रहे हैं, लेकिन मौत पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह क्या है। जिस पर चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर व अन्य ने बताया कि जब तक तबीयत गंभीर नहीं हो जाती, लोग न जांच कराने आगे आते हैं और न अस्पताल में दाखिल होते। ऐसी स्थिति में उनको अस्पताल लाने तक ही में कई बार मौत हो जाती है।

88 फीसदी फ्रंट लाइन वारियर ने लगवाया कोरोना का टीका
फ्रंट लाइन वारियर टीका लगवाने में स्वास्थ्य कर्मियों को भी पीछे छोड़ रहे हैं। अब तक जहां 86 फीसदी स्वास्थ्य कर्मियों ने टीका लगवाया है। वहीं 88 फीसदी फ्रंट लाइन वारियर ने टीका लगवा लिया है। अब तक जिला में कुल 36154 डोज वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इस तरह से 87 फीसदी डोज का इस्तेमाल किया जा चुका है। जिला में 17606 स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया जाना था, जिसमें से 15089 ने टीका लगवा लिया है। इसी तरह से 15922 फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीका लगाया जाना था, जिसमें से 13973 ने टीका लगवाया है।

बुजुर्गों को यहां भी लगने लगेगा वैक्सीन
जिला के और पांच अस्पतालों का चयन शुल्क देकर कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए किया गया है। जिसमें एपी सर्जिकल सेंटर सुपेला, दानी हॉस्पिटल, लक्ष्मी बाई चौक, निहार हॉस्पिटल, धमधा रोड, सिन्हा नर्सिंग होम, सुपेला, सुविधा हॉस्पिटल, नंदिनी रोड है। दुर्ग जिले में मंगलवार को 23 कोरोना के नए केस मिले हैं। अब तक जिले में कुल 27974 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिसमें से 26595 मरीज ठीक हो चुके हैं। इस वक्त जिला में 736 एक्टिव केस हैं। वहीं 643 की मौत हो चुकी है।

गंभीर हालत में आते हैं मरीज
डॉक्टर गंभीर सिंह ठाकुर, सीएमएचओ दुर्ग ने कहा कि दिल्ली की टीम को बताया गया कि मरीज की हालत जब गंभीर हो जाती है तब जाकर वे अस्पताल आते हैं। तब उनके बचने की उम्मीद कम रह जाती है। इस वजह से अधिक मौतें हो रही है। जिला में वैक्सीन लगाने के लिए पांच नए निजी अस्पताल का चयन किया गया है, ताकि अधिक से अधिक बुजुर्ग टीका लगवा सके।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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