होम मेड स्वीमिंग पूल का आनंद ले रहे जंगल के राजा, फौव्वारे में मजे से नहाते हैं यहां हिरण

वन्य प्राणियों के केज में रोज पानी डाला जा रहा है। बंदरों के केज में ग्रीन चादर लगाकर राहत पहुंचा रहे हैं...

By: Dakshi Sahu

Published: 25 Apr 2018, 10:49 AM IST

भिलाई. अप्रैल के अंतिम सप्ताह में पारा 40 डिग्री को पार कर गया है। ट्विनसिटी में झुलसा देने वाली तेज धूप के साथ ही भीषण गर्मी पड़ रही है। इसलिए मैत्रीबाग प्रबंधन पिंजरों में कैद वन्य प्राणियों को गर्मी से बचाने और उन्हें राहत पहुंचाने कई तरह से जतन कर रहा है। कोई भी वन्य प्राणी गर्मी की वजह से बीमार न हो, इसलिए प्रबंधन ने परंपरा के मुताबिक व्यवस्था में कुछ बदलाव कर दिया है।

वन्य प्राणियों के केज में रोज पानी डाला जा रहा है। केज में ग्रीन चादर लगाकर राहत पहुंचा रहे हैं तो वहीं हिरणों के झुंड में स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी का छिड़काव कर उन्हे ठंडकता का एहसास कराया जा रहा। इस वजह से वन्य प्राणियों ने थोड़ी राहत की सांस ली है।

मैत्रीबाग से गोपी (सफेद बाघ) को मध्य प्रदेश के व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर चिडिय़ाघर में भेजने के बाद अब बड़े बाड़े से सफेद बाघिन रोमा (मादा) को सुल्तान के समीप वाले केज में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं बंगाल टाइगर के जोड़े को सोनम जिस केज में थी, उसके ठीक बाजू वाले बाड़े में शिफ्ट कर दिया गया है।
केज में भरा जा रहा पानी

मैत्रीबाग प्रबंधन वन्य प्राणियों को गर्मी से बचाने के इंतजाम में जुटा है। सफेद बाघ व बंगाल टाइगर के केज में हर दिन सुबह पानी भरा जा रहा है, ताकि ठंडा पानी बाघ को इस गर्मी में राहत दे। जंगल में बाघ गर्मियों के दिनों में गुफाओं में शरण ले लेते हैं।

लगाई जा रही ग्रीन चादर

मैत्रीबाग में पेलीकॉन के केज में नई ग्रीन चादर लगाई जा रही। बोनेट मंकियों के केज में भी पिछले वर्ष लगाए गए चादर को अब बदला जा रहा है। वहीं लव बर्ड के केज में लगे ग्रीन चादर कई जगह से फट चुके हैं। हालांकि इसे अब तक बदला नहीं गया है।

हिरण को अब मिली ठंडक

हिरण के केज में फौव्वारे का इंतजाम किया गया है। प्रबंधन ने यहां फौव्वारे को शुरू कर दिया है। स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। इस वजह से दोपहर में हिरण के झुंड स्प्रिंकलर के आसपास नजर आने लगे हैं । हालांकि जू में जिस तरह की ठंडक होनी चाहिए, उतनी नहीं है। इस वजह से मजबूर वन्य प्राणी पिंजरों के भीतर ही रहने में सुकून महसूस कर रहे हैं।

भालू के छत में भरा पानी

गर्मी बढऩे के बाद से भालू केज से बाहर कम ही निकल रहा है। केज की छत पर पानी भर दिया गया है। भालू इसके भीतर ही ठंड में बैठ रहा है। बाहर निकलने से सीधे बाड़ा के घेरे में मौजूद पानी में उतर जाता है। पानी में उझलकूद कर फिर लौट जाता है।

पड़ रही गर्मी के हिसाब से पर्याप्त नहीं इंतजाम
पिजरों में रहने वाले वन्य प्राणियों को भीषण गर्मी के दौरान भी ठंडक महसूस हो, इसके लिए प्रबंधन ने नए इंतजाम नहीं किए हैं। पुराने ढर्रे पर काम चल रहा है। बाघों के बाड़े में जहां पानी भरा जाता है, वहीं कमरों में कूलर लगाया जाना चाहिए। लेकिन प्रबंधन किसी एक बाघ के कमरे में कूलर लगाकर खानापूर्ति कर देता है। असल में गर्मी से पहले घरों में जिस तरह से इंतजाम किए जाते हैं, वैसे ही जू में भी इंतजाम करने की जरूरत है।

मुकुंदपुर जू के बाड़े को बनाया गया है खूबसूरत
मध्य प्रदेश के व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर के बाड़े को बेहद खूबसूरत व आकर्षक बनाया गया है। इस तरह से नई व्यवस्था मैत्रीबाग में नहीं की जा रही है।

Dakshi Sahu
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