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जब भी मिलना हुआ रुलाके मिले, दर्द अपने सभी छिपाके मिले

जब भी मिलना हुआ रुलाके मिले, दर्द अपने सभी छिपाके मिलेकाव्यसंध्या आयोजित

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जब भी मिलना हुआ रुलाके मिले, दर्द अपने सभी छिपाके मिले

जब भी मिलना हुआ रुलाके मिले, दर्द अपने सभी छिपाके मिले

भीलवाड़ा। साहित्यिक संस्था नवमानव सृजनशील चेतना समिति की ओर से भदादा बाग के पीछे स्थित ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र में वर्ष 2022 की 8वीं काव्यसंध्या आयोजित की गई। अध्यक्षता संस्था संयोजक डॉ एसके लोहानी खालिस ने की। मुख्य अतिथि राधेश्याम गर्ग अभिनव थे। विशिष्ट अतिथि राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के रामप्रकाश अग्रवाल,फतेह सिंह लोढ़ा, राधेश्याम शर्मा व योगेंद्र सक्सेना योगी रहे।

महासचिव कविता लोहानी ने बताया कि काव्यसंध्या का शुभारंभ डॉ खालिस की हिंदी गजल "मैं हृदय में रहता हूं धड़कन थमा सकता हूं,मैं धमनियों में बहता हूं रक्त जमा सकता हूं से किया। अपेक्षा व्यास ने पेड़ काट रहा था पर मेरे पास शब्द नहीं थे लकड़हारे के विरुद्ध", रंजनासिंह चाहर ने "नित करो योग अभ्यास कि जीवन बदलेगा भाई-बहना", किरण आगाल ने "ये कौनसी राह पर बढ़ रहे युवा कदम", आरके जैन ने "पेड़ रहे हैं इस धरती पर मानव जीवन का आधार", राधेश्याम शर्मा ने "सुनो साथियों तुम्हें सुनाता सुखी जीवन की कहानी", गुलाब मीरचंदानी ने हाईकू "पिता देता है,काया काबिलियत,और चाहत", योगेंद्र सक्सेना ने"तिलक तराजू तलवार को गाली देने वाले मौन", निरंजन नीर ने "तुम्हें हक है कि खफा हो मुझसे,अगरचे दिल में वफा हो मुझसे", सतीश व्यास आस ने "जब भी मिलना हुआ रुलाके मिले,दर्द अपने सभी छिपाके मिले", डॉ अवधेश जौहरी ने "तुझ बिन घर जंगल लगता है ***** और राधेश्याम गर्ग अभिनव ने "किसी के देखने भर से हुआ चंदन सरीखा तन" जैसे एक से बढ़कर एक गीत, गजल, कविताओं की प्रस्तुतियां दी। काव्यसंध्या में बंशी पारस, फतेहसिंह लोढ़ा, रामप्रकाश अग्रवाल, प्रहलाद सोनी सागर, निशांत सोनी, सुरेश रामनानी ने भी रचनाएं प्रस्तुत की। श्रेष्ठ रचनाकार के रूप में अपेक्षा व्यास को चुना गया और सम्मानित किया । अंत में केंद्र सरकार द्वारा देश के युवाओं के लिए लाई गई अग्निपथ-अग्निवीर योजना के समर्थन का सामूहिक संकल्प लिया गया।