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संकट के समय भगवान की ग्रहण से बाहर निकालते

हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में चल रहे पुरुषोत्तम कथा

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Ejecting from the eclipse of God in times of crisis in bhilwara

Ejecting from the eclipse of God in times of crisis in bhilwara

भीलवाड़ा .
हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में चल रहे पुरुषोत्तम कथा के दशम दिवसीय भगवान की शरणागत वत्सलता का वर्णन करते हुए योगेश्वरानंद ने कहा कि जीव को किसी भी संकट से ग्रस्त होने का अवसर जब आए तब उसे भगवान की शरण ही ग्रहण करनी चाहिए। खल कंस ने वसुदेव और देवकी को अपने कारागृह में कैद कर रखा था उस समय वसुदेव और देवकी ने जगत का आश्रय छोड़कर भगवान का आश्रय ग्रहण किया था। तब भगवान ने कृष्ण रूप में अवतरित होकर कंस और उनके साथियों का संहार कर वसुदेव देवकी को कारागार से मुक्त किया था। इसी प्रकार मगध नरेश जरासंध से युद्ध की भिक्षा मांगकर भीम के द्वारा उसका वध करवाकर, गिरिवज्र कंदरा में अवरुद्ध 20 हजार राजाओं को सदा के लिए मुक्त किया। प्रत्येक प्राणी को अपने दुखों से छुटकारा पाने के लिए सब प्रकार से भगवान की शरण लेनी चाहिए। सेवा भारती के विभाग मंत्री अशोक कुमार सेन, जिला सह मंत्री बसंतीलाल पोरवाल और पथिक नगर अध्यक्ष भैरूप्रसाद पारीक ने व्यासपीठ का पूजन किया।
सांयकालीन सत्र में श्रीमद् भागवत कथा के सती चरित्र, ध्रुव व्याख्यान-आख्यान एवं पृथु चरित्र की चर्चा करते हुए भगवान के यज्ञ अवतार, दत्तात्रेय अवतार, नर नारायण अवतार की चर्चा की। कथा में यह भी कहा गया कि यदि कोई साधक अपनी साधना से भगवान को प्रसन्न करके उनसे अपनी संतान के लिए प्रार्थना करें तो भगवान जैसे अत्रि अनुसूया के यहां दत्तात्रेय के रूप में अवतार ग्रहण किया, उसी प्रकार आराध्य की इच्छा अनुसार पुत्र, पिता स्वामी, दास, सखा आदि के रूप में प्रकट होकर भक्तों के कार्यों को सिद्ध करते हैं। आरती में संत माया राम, संत राजाराम, संत गोविंद राम सहित नगर माहेश्वरी युवा संगठन के अध्यक्ष हरीश पोरवाल, संगठन मंत्री रौनक भदादा, प्रचार प्रसार मंत्री अभिनव गग्गड़, विकास कचोलिया व विश्व हिंदू परिषद के सुरेश गोयल उपस्थित थे।