बेरोजगारी के भंवर में फंसे ट्यूशन संचालक

दूसरे काम धंधे तलाशने को विवश हो रहे, नौ माह से हाथ पर हाथ रखे बैठे, परिवार चलाना हो रहा मुश्किल

भिण्ड. कोरोना संक्रमणकाल के शुरू होते ही ट्यूशन सेंटर बंद करवा दिए गए थे। लिहाजा मार्च से लेकर अक्टूबर माह के अंत तक ट्यूशन सेंटर पूरी तरह से बंद हो गए हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों को ट्यूशन देकर अपने घरों की आजीविका चलाने वाले जिलेभर के करीब 800 शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं।


कक्षा पांचवी से लेकर 8वीं, 10वीं एवं हायर सेकंडरी के अलावा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों के सामने परिवार का लालन-पालन करना मुश्किल हो रहा है। छोटे, मध्यम एवं उच्च स्तरीय ट्यूशन सेंटर्स के शटर डाउन हैं। जहां छोटे तबके के ट्यूशन केंद्र पर प्रति शिक्षक औसतन 18 से 20 हजार रुपए महीने की आय कर रहा था वहीं मध्यमवर्गीय ट्यूशन संचालक 28 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रहा था। इतना ही नहीं उच्च स्तरीय ट्यूशन केंद्रों पर प्रति शिक्षक की आय 43 से 45 हजार रुपए प्रति माह दर्ज की जा रही थी। अचानक आए कोरोना संक्रमणकाल ने उपरोक्त शिक्षकों का एक तरह से फिलहाल रोजगार ही निगल लिया है।


आवासीय इलाकों में संचालित थे ट्यूशन केंद्र, किराया बंद होने से बढ़ी परेशानी


उल्लेखनीय है ट्यूशन केंद्र बंद होने से उन आवासीय इलाकों में रह रहे लोगों का किराया भी बंद हो गया है जिनके घरों में ट्यूशन केंद्र संचालित हो रहे थे। ऐसे कई घर हैं जिनका परिवार किराय की आय से ही चल रहा था। लिहाजा ट्यूशन संचालकों के साथ ऐसे मकानदारों के सामने भी संकट उत्पन्न हो गया है। शहर के हॉउसिंग कॉलोनी, महावीरगंज, ऊषा कॉलोनी आदि दर्जन भर आवासीय क्षेत्र में ट्यूशन केंद्र घरों के अंदर चल रहे थे जो कि इन दिनों बंद हैं।


उनके सामने बड़ा संकट जिन्हें पढ़ाने के शिवा नहीं आता दूसरा हुनर


ऐसे शिक्षकों के सामने बड़ा संकट है जिन्हें बच्चों को पढ़ाने के अलावा अन्य कोई दूसरा हुनर नहीं आता है। यहां बतादें कि भिण्ड शहर में करीब 300 शिक्षक ट्यूशन कर अपनी आजीविका चला रहे थे जिनमें से 100 से ज्यादा दूसरे काम धंधे कर जीवन चलाने की कोशिश कर रहे हैं बाकी जिन्हें दूसरे काम का कोई हुनर ही नहीं वह मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। यही स्थिति जिले के मेहगांव, लहार, गोहद एवं अन्य छोटे कस्बाई इलाकों में ट्यूशन कर परिवार पाल रहे लगभग 500 शिक्षकों की है।


ट्यूशन बंद होने से आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। दूसरा अन्य कोई हुनर नहीं होने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। शासन भी ऐसे में हम जैसे शिक्षकों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है।
शैलेष सक्सेना, ट्यूशन संचालक भिण्ड

मार्च से लेकर अभी तक एक रुपए की आय नहीं हुई है। तीन महीने तक बंद भवन का किराया देने के अलावा बैठे-बैठे जमा पूंजी भी खर्च कर ली है। अब समझ नहीं आ रहा क्या करें। सरकार हमारे बारे में भी सोचे।
नितिन दीक्षित, ट्यूशन संचालक भिण्ड

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महेंद्र राजोरे Desk
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