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दिव्यांगों की पीड़ा दूर करने में बैशाखी नहीं बन सके 12 अधिकारी

locationभिवाड़ीPublished: Feb 05, 2024 08:10:36 pm

Submitted by:

Dharmendra dixit


कलक्टर से लेकर बीडा सीईओ, एडीएम और डीआईसी जीएम सभी भूल गए, डाटा भी नहीं कर सके एकत्रित

दिव्यांगों की पीड़ा दूर करने में बैशाखी नहीं बन सके 12 अधिकारी
दिव्यांगों की पीड़ा दूर करने में बैशाखी नहीं बन सके 12 अधिकारी
भिवाड़ी. 15 मार्च 2023 को कलक्टर जितेंद्र सोनी बीडा में सभी विभागों की बैठक लेते हैं। आदेश देते हैं कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत औद्योगिक इकाइयों में पांच प्रतिशत रोजगार की पालना कराई जाए। इसका डाटा एकत्रित किया जाए। इसके बाद वे दो बैठक लेते हैं और संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में हुई प्रगति के बारे में जानते हैं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता।
15 मई को कलक्टर का तबादला हो जाता है और यह मुद्दा यही गुम होने लगता है। नए अधिकारी नई प्राथमिकता लेकर काम करना शुरू कर देते हैं। लेकिन इस बीच शुरु होता है दिव्यांग जनों द्वारा अपना हक मांगा जाना। वे धरना प्रदर्शन करते हैं। बीडा के बाहर बैठते हैं, ज्ञापन देते हैं और जो भी नए अधिकारी आते हैं उन्हें अपनी समस्या से अवगत कराते हैं। इस तरह दिव्यांग जनों ने अपनी मांग को नए पदस्थापित अधिकारियों के सामने रखा लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।
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इतने अधिकारी बदले
कलक्टर जितेंद्र सोनी के बाद पुखराज सेन आए, इसी दौरान खैरथल तिजारा नया जिला गठित हुए और विशेषाधिकारी डॉ. ओपी बैरवा कलक्टर बने, इनके बाद कलक्टर हनुमान मल ढाका आए। बीडा में सीईओ रोहिताश्व तोमर के बाद श्वेता चौहान और अब सलोनी खेमका ने कार्यभार संभाला। एडीएम डॉ. गुंजन सोनी के बाद शिवचरण मीणा और अब अश्विनी के पंवार आए हैं। इसी तरह डीआईसी में जीएम सुल्तान ङ्क्षसह मीणा के बाद एसएस खोरिया कार्यभार संभाल रहे हैं। इन अधिकारियों का इस मुद्द से इसलिए संबंध हैं कि दिव्यांगों ने इन सभी को ज्ञापन दिए हैं। एवं कलक्टर की पहली बैठक में उक्त पदासीन अधिकारी मौजूद थे। कलक्टर ने बीडा सीईओ को इस मुद्दे की निगरानी के लिए निर्देशित किया था। बीडा सीईओ ने इस संबंध में बैठक भी ली।
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कोई बात करने तक नहीं आया
चुनाव से पूर्व दिव्यांगजन बीडा के बाहर धरना देते रहे। कोई जिम्मेदार पूछने नहीं आया। 15 दिन बाद स्थानीय जन प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद इनकी सुध ली और बीडा सीईओ ने इन्हें एडीएम के पास ज्ञापन देने भेज दिया। इन्हें 15 दिन का समय दिया लेकिन तब तक चुनाव आचार संहिता लग गई और इनका ध्यान भूल गए। अब एक बार फिर दिव्यांगों ने कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी याद दिलाई है।
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यह है मांग
दिव्यांग समिति के अध्यक्ष कर्मवीर ने बताया कि निजी क्षेत्र में दिव्यांगों को पांच प्रतिशत आरक्षण है। स्कूटी योजना, ट्राई साइकिल, आवास, स्पेशल बैकलॉग और टेंडर में उन्हें सुविधाएं दी जाएं।
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कौन कराएगा नियमों की पालना
इस मामले के बाद सवाल उठता है कि केंद्र एवं राज्य सरकार का अगर कोई नियम है तो उसकी पालना कौन कराएगा। क्या स्थानीय अधिकारी जनहित की जगह सिर्फ निजी स्वार्थों को ध्यान में रखकर ही नियम याद करते हैं। आए दिन होने वाली बैठक सिर्फ दिखावे के लिए होती है।

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