हितानंद की एंट्री से भगत की रवानगी का अलार्म

- पहले इसी पैटर्न से हो चुकी है संगठन महामंत्री की विदाई
- आरएसएस ने संगठन में चेहरे बदलने के दिए संकेत

By: anil chaudhary

Published: 16 Sep 2020, 05:10 AM IST

भोपाल. प्रदेश भाजपा में सह संगठन मंत्री के रूप में हितानंद की एंट्री ने संगठन महामंत्री सुहास भगत के लिए रवानगी का अलार्म बजा दिया है। दरअसल, पूर्व में इसी पैटर्न पर संगठन महामंत्री की विदाई हो चुकी है। अब सह संगठन मंत्री के आने के बाद भगत के कामों का बंटवारा होगा। भगत संगठन में चार साल पूरे कर चुके हैं, इसलिए उपचुनाव बाद उनकी विदाई की भी संभावना बन रही है।
हितानंद को आरएसएस के मध्य क्षेत्र प्रचार प्रमुख दीपक विस्पुते लाए हैं। यानी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा के संगठन में अपने चेहरे लाने के बाद संघ ने भी अपने नए चेहरे लाना शुरू कर दिए हैं। इससे पहले अतुल राय को सह संगठन मंत्री के रूप में लाया गया था, लेकिन अतुल की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से पटरी नहीं बैठ सकी। इसके अलावा अन्य विवाद भी अतुल के छाए रहे। इसके चलते 2018 में विधानसभा चुनाव की हार के बाद अतुल को हटा दिया गया था, तब से नए सह संगठन मंत्री के आने की उम्मीद जताई जा रही थी।

- इसलिए बदलाव के हालात
विधानसभा उपचुनाव के बाद भगत की रवानगी भी हो सकती है, क्योंकि इससे पूर्व माखन सिंह को इसी पैटर्न सह-संगठन मंत्री बनाने के बाद संगठन महामंत्री बनाकर लाया गया था। हालांकि, भगत से पहले अरविंद मेनन को सीधे संगठन महामंत्री बनाया गया था, लेकिन अब भाजपा पूरी टीम बदलना चाहती है। उस पर नए अध्यक्ष वीडी के आने के बाद से भगत के कामकाज में भी कई जगह मतभेद की स्थिति बनी है।
- पिछड़े कई नाम
सह संगठन मंत्री के दावेदारों में कई नाम थे। इनमें दीनदयाल शोध संस्थान के अभय महाजन, किसान संघ के उमाकांत दीक्षित, संघ के पराग अभ्यंकर और ग्राहक पंचायत संगठन के दिनकर सबनीस मुख्य रूप से रहे हैं। इनमें अभय और उमाकांत उत्तर प्रदेश सरकार में चले गए। उनके जाने के बाद से पराग और दिनकर ही मुख्य दावेदार थे।

anil chaudhary Desk
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