दो महीने तक सीरियल किलर के साथ घूमे, हर समय बना रहता था डर

३४ट्रक ड्राइवरों की हत्याएं कर चुके आदेश खामरा को पकडऩे वाली टीम का हिस्सा रहे टीआई संजीव चौकसे ने बताए जांच के दौरान के अनुभव

By: Sumeet Pandey

Published: 26 Oct 2020, 12:11 AM IST

भोपाल. अगस्त 2018 की बात है, मैं मिसरोद थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ था। एक दिन ऑफिस में बैठा था कि, एक ट्रक ऑपरेटर मनोज शर्मा मेरे पास आए। उन्होंने शिकायत दी, कि उनका शक्कर से भरा ट्रक पुणे से चला था जिसे भोपाल आना था लेकिन वह रास्ते से गायब हो गया। ट्रक पुणे से चला था इतने लम्बे रास्ते में कहीं भी गायब हो सकता था, हो ना हो ड्राइवर की ही नीयत डोल गई होगी। मैंने इस मामले को लिया और जांच शुरू करवाते हुए ड्राइवर का मोबाइल नम्बर सर्विलांस पर डलवा दिया। मामले की जांच शुरू हुई तो धीरे-धीरे परते उधड़ी गईं और पूरा मामला सामने आ गया।

तो केस में नहीं आता खामरा का नामतो केस में नहीं आता खामरा का नाम

सितम्बर के तीसरे सप्ताह में बिलखिरिया थाना इलाके में एक ट्रक ड्राइवर की हत्या हुई, शव सड़क किनारे फेंककर अपराधी ट्रक लेकर भागे थे। इस अपराध में पुलिस ने जयकरण प्रजापति को गिरफ्तार किया। तत्कालीन थाना प्रभारी लोकेंद्र मेरे बैचमेट थे इसलिए मैंने भी जांच में रुचि लेते हुए मदद शुरू की। जयकरण का रिकॉर्ड निकलवाया तो एक अपराध ही मिला। हम उसे छोटा-मोटा अपराधी मानकर न्यायालय में पेश करने जा रहे थे। लेकिन इसी बीच मनोज शर्मा के गायब ड्राइवर के घर का पता मिल गया, हमारी टीम छोला में उसके घर पहुंची तो पत्नी ने बताया कि उसके पति को तो बिलखिरिया पुलिस ने मर्डर में हिरासत में लिया है। यहां से मेरे दिमाग में खटका हुआ जिस व्यक्ति का नाम एक साथ दो राज्यों के दो-दो अपराध में जुड़ रहा हैं, उसके पीछे कोई बड़ा गिरोह होना चाहिए। मैंने लोकेंद्र से बात की और जयकरण से नए सिरे से पूछताछ करने पर सहमति बनी। हमने जयकरण से नए सिरे से पूछताछ शुरू की। अब हम जानते थे कि कई अपराध सामने आ सकते हैं। जयकरण ने बताया कि शक्कर से भरा ट्रक उसने आदेश खामरा को सौंप दिया है जो तुकाराम के साथ ट्रक लेकर उत्तर प्रदेश गए हैं।

खामरा का चाचा थी था सीरियल किलर
आदेश खामरा की मंडीदीप में टेलर की दुकान थी, उसके चाचा अशोक एक समय में सीरियल किलर रह चुका है। पुलिस ने गहराई से पूछताछ शुरू की तो उसने जो हत्याओं की फेहरिस्त सुनाई उसे सुनकर सबकी आंखें खुली रह गईं।
खामरा ने बताया कि चाचा के रसूख को देखकर उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में ही २००८ में वह पकड़ा गया लेकिन तब बड़े आरोप नहीं लगे और दो साल में वह छूटकर आ गया। इन दो सालों में उसने लगातार बैठकर ट्रक लूटने का प्लान बनाने में दिमाग खपाया। इसके बाद २०१० में जेल से छूटा तो २०१५ तक ३५ से ज्यादा हत्याएं कर डालीं।

कॅरियर में खामरा जैसे कोई कतिल नहीं मिला
मेरा मूल रूप से मंडीदीप का होना इस केस में फायदेमंद साबित हुआ। मैं जब भी खामरा से मिलता उससे मंडीदीप से अपने रिश्ते की दुहाई देता। मंडीदीप के चप्पे-चप्पे सहित स्थानीय लोगों को नाम से पहचानने के चलते न केवल खामरा से मनोवैज्ञानिक पूछताछ करता। अब तक के कॅरियर में कई कातिल पकड़े लेकिन खामरा जैसा कभी देखा तक नहीं था, उम्मीद करता हूं, ड्यूटी के दौरान फिर समाज में कभी खामरा जैसा कातिल न देखने को मिले।

Sumeet Pandey Desk
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