सदस्य ही नहीं तो अध्यक्ष कैसे सिंधिया : राघवजी

डॉ. मरखेड़कर ने आठ वर्ष बाद वापस ली याचिका...

भोपाल। भाजपा के कई नेताओं के निशाने पर रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता सिंधिया ( Scindia ) को लेकर एक बार फिर नया मामला समाने आया है। जिसमें भाजपा सरकार के पूर्व वित्तमंत्री राघवजी ने कहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जब एमजेईएस के सदस्य ही नहीं हैं तो अध्यक्ष कैसे हो सकते हैं।

दरअसल एसएटीआई का संचालन करने वाली महाराजा जीवाजीराव एज्यूकेशन सोसायटी (एमजेईएस) को भंग करने और प्रशासक को नियुक्त करने के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका 8 वर्ष बाद वापस लेने के निर्णय को पूर्व वित्तमंत्री राघवजी ने विदिशा में अपनी जीत बताया है।

उन्होंने कहा है कि अब यह साफ हो गया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जब एमजेईएस के सदस्य ही नहीं हैं तो अध्यक्ष कैसे हो सकते हैं।

पूर्व वित्तमंत्री और सोसायटी के सदस्य रहे राघवजी ने बताया कि 2010 में सोसायटी के सदस्य बाबूलाल जैन, सहकारी बैंक अध्यक्ष बाबूलाल ताम्रकार और नपाध्यक्ष ज्योति शाह ने रजिस्ट्रार फार्म एंड सोसायटी से एमजेईएस में सदस्यता सहित अन्य अनियमितताओं पर सवाल खड़े करते हुए शिकायत की थी।

शिकायत में यह कहा गया था कि जो लोग एमजेईएस का संचालन कर रहे हैं वे सोसायटी के सदस्य ही नहीं हैं। इसकी जांच रजिस्ट्रार द्वारा कराई गई थी।

हमें कोई आपत्ति नहीं...
राघवजी का कहना है कि लम्बे खिंचते केस के मद्देनजर हमने कोर्ट से अनुरोध किया था कि हम लोगों की उम्र हो गई है अब तो फैसला होना चाहिए।

इसके बाद मई में सोसायटी की तरफ से डॉ. लक्ष्मीकांत मरखेड़कर ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। हाईकोर्ट ने राघवजी से उनकी आपत्ति जानी। राघवजी ने कहा उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने हाल ही में याचिका वापसी की अनुमति दे दी।

मुझे पता नहीं...
इस बारे में बात करने के लिए सोसायटी सचिव डॉ. लक्ष्मीकांत मरखेड़कर से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन अटेंड नहीं किया। उधर सोसायटी के पदाधिकारी रमेश अग्रवाल ने कहा कि मुझे याचिका के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

अब आगे क्या...
उम्मीद जताई जा रही है कि अब जल्दी ही कॉलेज में प्रशासक नियुक्त कराया जाएगा। इसके बाद अपनी कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें अपने लोगों को उपकृत किया जाएगा। अब मप्र में कांग्रेस की सरकार होने से यह काम और आसान हो जाएगा। प्रतापभानु शर्मा सहित अनेक पुराने लोग पूरी तरह इस सोसायटी से साइड लाइन कर दिए जाएंगे।

सिंधिया, बोरा, प्रतापभानु और डॉ. जैन सदस्य नहीं !
असिस्टेंट रजिस्ट्रार फम्र्स एंड सोसायटी ने अपनी एक सूचना में कहा है कि शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सदस्यता पंजी जो जांच के समय प्रस्तुत की गई थी उसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, मोतीलाल बोरा, प्रतापभानु शर्मा और डॉ. पद्म जैन के नाम अंकित नहीं हैं।

संस्था के पदाधिकारियों ने कोई सदस्यता पंजी प्रस्तुत नहीं की। राघवजी के मुताबिक इसी आधार पर रजिस्ट्रार ने आरोपों को सिद्ध पाते हुए शासन को एसएटीआई को सुपरसीट घोषित कर यहां प्रशासक नियुक्त करने के लिए कहा था। इस पर प्रतापभानु शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका में दायर की और प्रशासक की नियुक्ति पर स्थगन ले लिया था। यह केस लगातार चलता रहा।

सोसायटी ने इस केस में अपनी संभावित हार देख किरकिरी के डर से याचिका वापस ली है। अब सरकार को चाहिए कि प्रशासक को नियुक्त करे, लेकिन उसे लम्बे समय तक न रखे और तुरंत ही वैध सदस्यों के बीच चुनाव कराकर एसएटीआई विवाद सुलझाए।
- राघवजी, पूर्व वित्तमंत्री


याचिका वापस लेने का अधिकार डॉ. लक्ष्मीकांत मरखेड़कर को नहीं है। इस मामले में मुझसे कोई राय नहीं ली गई।
- प्रतापभानु शर्मा, पूर्वसचिव एमजेईएस

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दीपेश तिवारी
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