सरकारी विभागों में निगम के 45 करोड़ रुपए, खंगाला जा रहा रिकॉर्ड, किसने कितना जमा किया

सरकारी विभागों में निगम के 45 करोड़ रुपए, खंगाला जा रहा रिकॉर्ड, किसने कितना जमा किया

भोपाल।

नगर निगम आर्थिक संकट से उबरने सरकारी विभागों से वसूली का मन बना चुका है। इसके लिए सभी विभागों के बकाया की जानकारी एकत्रित की जा रही है। वर्ष 2019 के बकाया के आधार पर जोन व वार्ड कार्यालयों से सूची अपडेट की जा रही कि किसने कितनी राशि जमा की है। निगम की पहली सूची में सरकारी विभागों पर करीब 45 करोड़ रुपए बकाया है। ये बड़ी राशि है। करीब पंद्रह सरकारी विभागों में 303 प्रकरणों में ये राशि निकाली जा रही है। हालांकि सूची अपडेट होने के बाद ही वास्तविक बकाया सामने आएगा, उसके बाद ही कार्रवाई की जाएगी। सबसे अधिक बकाया स्वास्थ्य विभाग पर है। इसके अलावा शिक्षा, पुलिस, व्यापमं, ट्रांसपोर्ट विभाग पर है। सरकारी बंगलों पर भी निगम के 26 लाख रुपए से अधिक बकाया है। सहायक आयुक्त राजस्व संध्या चतुर्वेदी का कहना है कि बड़े बकायादारों पर कार्रवाई की जा रही है और पूरी वसूली का लक्ष्य है।

ऐसे समझे बकाया
- 4.़54 करोड़ रुपए शिक्षा विभाग

- 30.़82 करोड़ रुपए चिकित्सालय
- 1.़62 करोड़ रुपए पुलिस विभाग

- 53.़37 लाख रुपए परिवहन विभाग
- 4.़79 करोड़ रुपए अन्य कार्यालय

- 75.़34 लाख रुपए न्यायालय कार्यालय
- 2.़48 लाख रुपए पीएचई

- 10.़41 लाख रुपए पशु विभाग
- 23.़28 लाख रुपए पीडब्ल्यूडी

- 43.़76 लाख रुपए जल संसाधन
- 26.़41 लाख रुपए शासकीय बंगले

- 52.़26 लाख रुपए सीपीए
- 2.़42 लाख रुपए कृषि विभाग

- 4.़85 लाख रुपए वन
नोट- जानकारी निगम की राजस्व शाखा के अनुसार। अभी इसे अपडेट किया जा रहा है।

70 करोड़ रुपए से अधिक स्टे में

नगर निगम का 70 करोड़ रुपए से अधिक बकाया स्टे में उलझा हुआ है। मॉल, व्यसायिक कॉम्प्लेक्स के साथ कई बड़े भवनों से जुड़े करदाता टैक्स को लेकर कोर्ट में चले गए जहां से स्टे मिला हुआ है। निगम की विधि विभाग की टीम स्टे हटवाने में सफल नहीं हो पा रही, जिससे बड़ा नुकसान हो रहा है। ये राशि मिल जाए तो तंगी काफी हद तक दूर हो जाए।

230 करोड़ रुपए का लक्ष्य, महज 165 करोड़ ही वसूली
मौजूदा वित्त वर्ष में निगम ने 230 करोड़ रुपए संपत्तिकर वसूली का लक्ष्य तय किया है, लेकिन 19 जोन के 85 वार्ड मिलाकर महज 165 करोड़ रुपए ही वसूल पाए। 31 मार्च तक के करीब डेढ़ माह में 65 करोड़ रुपए की वसूली होना है। यानि हर दिन डेढ़ करोड़ रुपए की वसूली करना है, लेकिन ये नहीं हो पा रहा है।

देवेंद्र शर्मा Reporting
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