शनि ने बदली अपनी चाल, जानिये किस राशि में दिखाएंगे अपना कौन सा खेल

शनि अब स्थायी रूप से 25 अक्टूबर 2017 से धनु राशि में आ गए हैं। इसके साथ ही अब उनकी ढैया, अडैय्या, साढेसाति का फल भी अन्य परिवर्तित राशियों पर मिलेगा।

By: दीपेश तिवारी

Updated: 11 Nov 2017, 06:59 PM IST

भोपाल। शनि में हुए इस परिवर्तन के संबंध में ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि शनि का यह राशि परिवर्तन जहां कुछ लोगों को खासा लाभ प्रदान करेगा, वहीं कुछ राशि के जातकों के लिए ये समय कष्टकारी हो सकता है।

शनि का ढैया और अडैय्या :
माना जाता है कि जिस राशि से चौथे स्थान मॆ शनि का भ्रमण होता है उसे ढैया कहते हैं। वर्ष 2015 से सिंह राशि इस प्रभाव में थी अब इसके प्रभाव में आगामी दो वर्षों तक कन्या राशि रहेगी। वहीं जिस राशि से शनि आठवें स्थान पर भ्रमण करता है, उसे शनि का अडैय्या कहते हैं। मेष राशि अभी तक अडैय्या यानि इस प्रभाव में थी,लेकिन अब आगामी दो वर्ष तक यह प्रभाव वृषभ राशि पर रहेगा।

साढेसाति में होते हैं तीन ढैया:
शनि की साढेसाति की दशा में तीन ढैया होते हैं, पंडित सुनील शर्मा के अनुसार जो क्रमश: शरीर के एक निश्चित भाग पर खास असर रखते हैं। यह दो प्रकार से भी आते हैं- यानि साढे साति के पहले ढाई साल जिसे साढेसाति का प्रथम ढैया भी कहा जाता है

-सिर पर, अगले ढाई साल जिसे साढेसाति का दूसरा ढैया कहा जाता है

- उदर यानि पेट पर जबकि अंतिम ढाई साल जिसे साढेसाति का तीसरा ढैया कहते हैं- पैर पर रहते हैं।

साढेसाति का प्रथम ढैया :
जब शनि महाराज जिस राशि के पीछे रहते है उसे प्रथम ढैया कहते हैं। अभी तक धनु राशि को शनि के प्रथम ढाई वर्ष थे। अब मकर राशि वालों को साढ़ेसाति का प्रथम ढैय्या प्रारम्भ होगा।

साढेसाति का दूसरा ढैया :
अभी तक वृश्चिक राशि को शनि का मध्यकाल या दूसरा ढैया था अब यह धनु राशि वालों पर चलेगा।

साढेसाति का अंतिम ढैया :
अभी तक तुला राशि को शनि का अंतिम ढैय्या चल रहा था अब वृश्चिक राशि पर शनि का अंतिम ढैया चलेगा।

यह पढेगा राशियों पर प्रभाव :

पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि शनि का यह राशि परिवर्तन जिन राशि के जातकों के लिए समस्या पैदा करेगा, उन्हें इन समास्याओं से बचने के लिए कुछ खास उपाय करने होंगे। पंडित शर्मा के अनुसार राशियों पर शनि के परिवर्तन का यह होगा राशियों पर प्रभाव...

1. मेष- भाग्य स्थान से शनि का भ्रमण अत्यंत अनुकुल है नौकरी, रोजगार तथा व्यापार मॆ भाग्य से राज्यकृपा प्राप्त होगीं। समय अनुकुल है इसका लाभ उठायें।
2. वृषभ- वैसे तो यह शनि महाराज की प्रिय राशि है लेकिन आठवें स्थान से शनि का भ्रमण कर्मक्षेत्र मॆ सामान्य परेशानी पैदा कर सकता है इसीलिए आकस्मिक कठिनाइयों के लिये तैयार रहें।
3. मिथुन- केन्द्र मॆ पाप ग्रहों का भ्रमण शुभ फल देता है मिथुन राशि मॆ शनि भाग्य स्थान का स्वामी भी होता है इस राशि के लिये शुभ फल आने वाले है,विवाह,व्यापार तथा राज्यपक्ष की ओर से शुभफल प्राप्त होंगे।
4. कर्क- छठे स्थान से शनि का भ्रमण शुभफलदायक होता है,इस राशि वालों की समस्या,रोगऋण का समाधान प्राप्त होगा,शुभ समय।
5. सिंह- यह राशि शनि के अढैया के प्रभाव से मुक्त हो चुकी है परन्तु पंचम भाव का शनि आर्थिक क्षेत्र मॆ कुछ तकलीफ अवश्य देगा,कुछ राहत अवश्य मिलेगी साथ ही शनि के उपाय अवश्य करते रहें।
6. कन्या-इस राशि को शनि ढैय्या चलेगा,कामकाज मॆ रूकावटे अवश्य आयेगी,लेकिन शत्रु,रोग परेशानी का अंत अवश्य होगा।

7. तुला- यह शनिदेव की परमप्रिय राशि है जो अब साडेसाति के प्रभाव से मुक्त रहेगी,तीसरे स्थान से शनि का भ्रमण शानदार परिणाम देगा।
8. वृश्चिक- यह राशि अब शनि के मध्यकाल के प्रभाव से मुक्त हो चुकी है द्वितीय स्थान से शनि का भ्रमण धनवृध्दि मॆ सहायक रहेगा,सम्पत्ति बनेंगी,धन का आगमन होगा।
9. धनु- इस राशि वालों को शनि ग्रह का मध्यकाल चलेगा,कर्मक्षेत्र मॆ रुकावट भागदौड़ आदि प्रारंभ होगीं शनिशांति के उपाय करायेंगे तो ठीक रहेगा।
10. मकर- साढेसाति का प्रथम ढाई वर्ष शुभफल दायक रहेंगे,रोग,ऋण शत्रु का नाश होगा,व्ययाधीक्य से बचें।
11. कुम्भ- इस राशि वालो को शनि के सबसे शुभ परिणाम मिलने वाले है आमदनी के स्त्रोत अच्छा लाभ देंगे,जटिल समस्याओं का निराकरण प्राप्त होगा।
12. मीन - राज्य स्थान से शनि का भ्रमण आपको सक्रिय करेगा,कामकाज मॆ वृद्धि होगीं मान सम्मान की वृद्धि होगीं,शुभ समय।

इन राशियों के लिए कष्टकारी:

पंडित शर्मा का कहना है कि सिंह और धनु राशि-आगामी दो वर्ष सिंह और धनु राशि वालों के लिये कष्टकारी हो सकते है इन दो राशियों वालों को विशेष धैर्य,गुरुजनों की सलाह की आवश्यकता पड़ेगी,यदि इन्हे राहु और शनि की दशा का दुष्प्रभाव भी हो तो समस्या गम्भीर हो सकती है,राहु और शनि की शांति अवश्य करायें।

शनि शांति के उपाय- पीपल के पेड़ के नीचे दीपक लगाना,शिव मंत्र ॐ नमह शिवाय का जप करना,हनुमानजी के दर्शन करना,दशरथकृत शनि स्त्रोत का पाठ तथा शनी अर्धांगिनी स्त्रोत का पाठ तथा शनि राहु की वैदिक मन्त्रों से शांति आपको कष्टों से राहत दिलाएगी।

इन तीन चीजों से खासतौर पर सावधान रहें- कोर्ट ,पुलिस तथा अस्पताल के चक्कर से जितना बच सकें उतना श्रेष्ठ रहेगा,साथ ही ठग,धोखेबाज आदि से दूर रहें।

इन उपायों से शनि देव को करें खुश :
शनि देव की पूजा के लिए कड़ी अराधना करनी होती है। खासकर शनि की साढ़ेसाती से परेशान लोगों को शनिदेव की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए। इनकी पूजा में कुछ खास बातों का ध्यान करना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं शनि देव की पूजा से जुड़ी बातें जिनका हमें पूजा करने से पहले जान लेना चाहिए।
1.शनिवार के दिन पीपल के पेड़ पर शनिदेव की मूर्ति के पास तेल चढ़ाएं या फिर उस तेल को गरीबों में दान करें।
2.शनिदेव को तेल चढ़ाना चाहिए लेकिन इस बाद का ध्यान रखना चाहिए कि तेल इधर-उधर गिरे न। तेल को सावधानी से इस्तेमाल करें।
3.शनिवार को काला तिल और गुड़ चीटों को खिलाएं। इसके अलावा शनिवार के दिन चमड़े के जूते चप्पल दान करना भी अच्छा रहता है।
4.शनिदेव की पूजा मूर्ति के सामने खड़ें न हों। शनि के उस मंदिर में जाएं, जहां शनि शिला के रूप में हों। इस दिन सात्विक आहार लें।

5.शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल और शमी के पेड़ की पूजा करें। इसके अलावा शनि के सामनें तेल का दीपक जलाएं।
6.शनि की पूजा करने वालों का दूसरों के प्रति व्यवहार अच्छा होना चाहिए। इन लोगों को गरीबों, दीन दुखियों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
7. साढेसाति से बचने के लिए- यदि जातक शनि की साढ़ेसाती से ग्रस्त हैं तो शनिवार को अंधेरा होने के बाद पीपल पर मीठा जल अर्पित कर सरसों के तेल का दीपक और अगरबत्ती लगाएं और वहीं बैठकर क्रमशः हनुमान , भेरव और शनि चालीसा का पाठ करें और पीपल की सात परिक्रमा करें।

ये भी हैं उपाय:
1. हनुमान चालीसा का पाठ नित्य करें।
2. सोलह सोमवार व्रत करें।
3. स्फाटिक या पारद शिवलिंग पर नित्य गाय का कच्चा दुध चढ़ाए फिर शुद्ध जल चढ़ाऐं और ओम् नमः शिवाय मन्त्र का जाप करें।
4. प्रदोष व्रत रखें।

5. प्रत्येक शनिवार को सूर्योदय के समय पीपल में तिल युक्त जल चढ़ाऐं और शाम को (सूर्यास्त के बाद) तेल का दीपक जलाएं ..
6. शनि ग्रह की शान्ती के लिये हर शनिवार को पीपल के पेड मे सरसो के तेल का दीपक लगाएं, हनुमानजी के दर्शन करे तथा हनुमान चालिसा का पाठ करे, प्रत्येक शनिवार को शनिदेव को तेल चढाये तथा दशरथकृत शनि स्रोत का पाठ करें।
7. शनि की होरा में जलपान नहीं करें, साथ ही काले कपड़े नहीं पहनें|
8. घोडे की नाल का छल्ला पहनना चाहिए|
9. हनुमानजी को तेल चढाना चाहिए और संकटमोचन का पाठ करना चाहिए|

लक्षणों से पहचाने कुंडली में शनि की स्थिति :
यदि शरीर में हमेशा थकान व आलस भरा लगे, नहाने-धोने से अरूचि हो या नहाने का वक्त ही न मिले, नए कपड़े खरीदने या पहनने का मौका न मिले, नए कपड़े व जूते जल्दी-जल्दी फटने लगे, घर में तेल, राई, दाले फैलने लगे या नुकसान होने लगे, अलमारी हमेशा अव्यवस्थित होने लगे, भोजन से बिना कारण अरूचि होने लगें, सिर व पिंडलियों में, कमर में दर्द बना रहे, परिवार में पिता से अनबन होने लगे, पढ़ने-लिखने से या लोगों से मिलने से उकताहट होने लगे, चिड़चिड़ाहट होने लगे यह सभी स्थितियां शनि ग्रह की अशुभता की घोतक हैं।

दीपेश तिवारी
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