मप्र ​कांग्रेस दिग्गजों की खींच—तान में अटका उम्मीदवारों का ऐलान

मप्र ​कांग्रेस दिग्गजों की खींच—तान में अटका उम्मीदवारों का ऐलान

harish divekar | Publish: Sep, 12 2018 11:43:40 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

मिस्त्री बोले मुझे नहीं पता कब आएगी सूची

मध्य प्रदेश में टिकट बंटवारे को लेकर बड़े नेताओं के बीच तालमेल बैठाने में कांग्रेस हाईकमान को दिक्कतें आ रही हैं, लिहाजा उम्मीदवारों का एलान तय डेडलाइन से पहले होने की संभावना बहुत कम लग रही है।

पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची 20 सितंबर से पहले जारी करने की सीमा तय की गर्ई थी, जबकि इससे पहले हाईकमान 15 अगस्त से पहले ही उम्मीदवारों की पहली सूची का एलान चाहता था।

स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री ने कहा, 'कुछ कहा नहीं जा सकता। जब उनसे पूछा गया कि उम्मीदवारों का एलान जल्द करने की बात कही गई थी मगर इस काम में देरी क्यों हो रही है?

मिस्त्री ने कहा, स्क्रीनिंग कमेटी सभी नेताओं और मध्य प्रदेश के प्रभारी दीपक बावरिया से इस मामले में बात कर रही है। लेकिन यह तो वे हीं बता सकते कि सूची कब आएगी?

हाईकमान की ओर से भी समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह को तालमेल बैठाने की जिम्मेदारी दी गई है।

वह इसके लिए कोशिश कर रहे हैं और जगह-जगह पर टिकट मांगने वालों के साथ समन्वय भोज का आयोजन कर रहे हैं, ताकि खाने पर आपसी मनमुटाव दूर हो।

कांग्रेस हाईकमान बड़े नेताओं के बीच तालमेल बैठाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। लेकिन बड़े नेता ही अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को टिकट देने का दबाव बना रहे हैं।

गुजरात मॉडल पर एमपी में होंगे राहुल के दौरे

कांग्रेस ने तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ इकाई से चुनाव अभियान के दौरान पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की यात्राओं की तैयारियों और उनके दौरों की आवश्यकता का रोड मैप मांगा है। पार्टी ने तीनों इकाइयों से कहा है कि वे राहुल के दौरों का कार्यक्रम इस तरह बनाएं कि जहां भी पार्टी अध्यक्ष जाएं, उसके आसपास की कई विधानसभा सीटों को भी उसका लाभ मिले।

कांग्रेस तीनों राज्यों में अपना चुनाव अभियान गुजरात की तर्ज पर ही चलाएगी। गुजरात में राहुल गांधी के दौरों की योजना अलग तरीके से बनाई गई थी। वे एक दिन में तीन से पांच विधानसभा क्षेत्रों को छू रहे थे और उनमें समाज के वंचित तबकों के साथ व्यापारिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, गृहणियों, युवाओं, आदिवासियों समेत लगभग हर तबके के साथ बातचीत कर रहे थे। गुजरात में बड़ी जनसभाओं के साथ नुक्ïकड़ सभाओं में भी राहुल के भाषण कराए गए, जिससे उनकी बात ज्यादा व्यापक दायरे में सुनी गई और उसके अपेक्षित परिणाम भी मिले। इसके अलावा उनके रोड शो भी कराए गए जिनमें युवाओं को सेल्फी के मौके भी दिए गए।

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