साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को रोकने के लिए लाठी लेकर खड़े रहे बीजेपी वाले

बीजेपी विधायक ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा हैं शेरनी

भोपाल/ साध्वी प्रज्ञा के माफी मांगने के बाद भी कांग्रेस उस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है। लिहाजा कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भोपाल में बीजेपी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला और बीजेपी से प्रज्ञा को निष्कासित करने की मांग की। जवाब में बीजेपी नेता हाथों लाठियां लेकर मसूद का स्वागत करने पहुंचे।

पिछले सप्ताह साध्वी संसद में दिए अपने बयान से सुर्खियों में रही। गोडसे का नाम लिये बिना साध्वी ने जो आपत्ति दर्ज कराई विपक्ष समेत बीजेपी ने भी उन्हें दोषी भी मान लिया और सजा भी सुना दी गई। प्रज्ञा अलग थलग पड़ गई और उन्होंने चुप्पी साध ली। फिर एक ट्वीट के जरिए अपनी पीड़ा भी दर्ज कराई कि वो तो उधम सिंह को देशभक्त कह रही थी। लेकिन मामला अलग ही दिशा में चल पड़ा। बीजेपी ने भले ही उन्हें सजा देकर इस मामले से पीछा छुड़ाने की कोशिश की लेकिन कांग्रेस ये मुद्दा इतनी आसानी से नहीं जाने देना चाहती थी। लिहाजा अगले ही दिन प्रज्ञा का भारी विरोध किया गया। हर शहर में प्रज्ञा के पुतले जलाए गए।

राहुल गांधी ने एक चुनी हुई जनप्रतिनिधि को आतंकवादी तक कह दिया। इतना होने के बाद भी बीजेपी अपनी कमजोर नस दबने से चुपचाप ही बैठी रही। नारी उत्थान की बात करने वाले एक नारी के ही पीछे पड़ गए। और वीर बहादुरों की पार्टी अपनी ही सांसद के साथ खड़ी नहीं हो पाई।

खैर इसी बीच गांधी जी के विचारों पर चलने वाली पार्टी यानि कांग्रेस के ब्यावरा विधायक गोवर्धन दांगी ने साध्वी का पुतला तो जलाया ही जोश जोश में वो यहां तक कह गए कि अगर साध्वी यहां होती तो उसे भी जला देते।

ये दांव कांग्रेस पर उल्टा पड़ गया। साध्वी ने भी फौरन ट्वीट कर इस मामले को भुना लिया और कहा कि 8 दिसंबर को आपके क्षेत्र में आउंगी तब जला लेना। खैर गोवर्धन ने माफी मांगकर मामले को खत्म करने की कोशिश की और कहा कि वे प्रज्ञा को गांधी साहित्य भेंट करेंगे। और इसके बाद मामला ठंडा पड़ गया। आगे की कहानी 8 दिसंबर को पता चलती लेकिन उसके पहले ही कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद फिर आग में घी डाला और मोर्चा लेकर बीजेपी कार्यालय की तरफ बढ़ चले।

प्रज्ञा को पार्टी से बाहर करने की मांग को लेकर। जवाब में नई नवेली गांधी वादी पार्टी यानि बीजेपी के नेता कार्यालय पर हाथों में लाठियां लेकर आरिफ मसूद और बाकी लोगों का स्वागत करने के लिए खड़े हो गए और इस नजारे के साथ ही तय हो गया कि दोनों ही दल कितने गांधीवादी है और गांधी का कितना सम्मान करते हैं।

साध्वी के विरोध पर सवाल
आखिर प्रज्ञा मामले को कांग्रेस इतना तूल क्यों दे रही है ?
साध्वी के विरोध के लिए मुस्लिम विधायक को क्यों आगे किया ?
प्रज्ञा की माफी मांगने के बाद मामला खत्म क्यों नहीं हो रहा ?
क्या विधायक गोवर्धन दांगी पर कार्रवाई करेगी कांग्रेस ?

खैर सवाल और भी हैं जो आरिफ मसूद आज गांधीवाद के लिए साध्वी का विरोध कर रहे हैं वे खुद सार्वजनिक मंच पर वंदे मातरम कहने से इंकार कर चुके हैं। तो क्या कांग्रेस को भी वंदे मातरम से परहेज है अगर नहीं तो पार्टी ने मसूद पर क्यों कुछ नहीं कहा। जब यहां तुष्टिकरण हो सकता है तो बीजेपी क्यों तुष्टिकरण नहीं कर सकती। इसके साथ ही मसूद मेट्रो का नाम राजा भोज के नाम पर करने का भी विरोध कर चुके हैं। यानि यहां भी वही मानसिकता। क्या कांग्रेस ने कभी इसका विरोध किया। अगर नहीं तो फिर साध्वी के मुद्दे को वो कब तक और क्यों जिंदा रखना चाहती है। क्योंकि इसी मुद्दे के सहारे गोडसे का भी जिक्र होता है। और फिर स्याह इतिहास के कई गलत सही संदर्भ सामने आने लगते हैं। खैर देखना है कि बीजेपी कब तक गांधीवादी मुखौटा पहने रहेगी।

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Muneshwar Kumar
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