ड्राइविंग स्कूल यूज कर रहे प्राइवेट नंबर के वाहन

- कई मानकों पर भी खरे नहीं, खतरनाक ढंग से किए जा रहे संचालित
- कमर्शियल वाहनों के स्थान पर निजी वाहनों का किया जा रहा अवैध प्रयोग
- एलपीजी का भी किया जा रहा यूज, पूर्व में हादसे से नहीं लिया गया सबक

भोपाल. राजधानी में वैध और अवैध सैकड़ों कार ड्राइविंग स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों के संचालक नियमों-प्रावधानों को ताक पर रखकर वाहन चालन का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

रुपए बचाने के लिए टैक्सी परमिट वाली गाडिय़ों की जगह कंडम पुरानी गाडिय़ों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समय से फिटनेस नहीं कराई जाती। अधिकांश गाडिय़ों में अवैध रूप से एलपीजी किट फिट कराई जाती है, जिससे प्रशिक्षण के दौरान गाडिय़ां चलाने पर खर्च बहुत कम आता है।

इन गाडिय़ों में घरेलू गैस सिलेंडरों से री-फिलिंग भी की जाती है, जो काफी खतरनाक होती है। पूर्व में हुए हादसों के बाद भी इनकी प्रॉपर चेकिंग नहीं की जाती।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक लगभग पांच दर्जन से अधिक मोटर ड्राइविंग स्कूल हैं, जिनमें कई अवैध रूप से भी चल रहे हैं। कुछ ने तो आरटीओ में अपने स्कूल का पंजीयन कराया है, लेकिन हर साल लाइसेंस रिन्यू नहीं कराते। कुछ ऐसे भी हैं, जो हवा में ही चल रहे हैं।

ऐसे स्कूल वाले दो-चार कंडम गाडिय़ां लेकर काम शुरू कर देते हैं और रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते। ये स्कूल वाहनों पर नंबर लिखवा देते हैं कि सीखने के लिए लोग इन नंबरों पर संपर्क करें। इन स्कूलों के पास प्रशिक्षित ट्रेनर और प्रैक्टिकल के लिए अन्य संसाधन नहीं होते हैं। ये सीधे सड़क पर गाडिय़ां चलवाने लगते हैं।

यह तरीका जोखिम भरा है। सबसे बड़ी बात यह उभरकर सामने आई है कि ड्राइविंग स्कूल संचालक आरटीओ की मिलीभगत से टैक्सी परमिट वाले वाहनों पर ड्राइविंग की ट्रेनिंग नहीं देते, जबकि नियमानुसार ऐसा करना चाहिए। वे टैक्स देकर परमिट लेने की जगह पुरानी प्राइवेट गाडिय़ा सस्ते दामों पर खरीदकर ड्राइविंग सिखाने में प्रयोग करते हैं।

इनमें अधिकांश गाडिय़ां कंडम होती हैं, जिनकी समय पर फिटनेस भी नहीं कराई जाती। परिवहन विभाग कभी-कभी कुछ गाडिय़ों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति कर लेता है, जबकि अधिकांश गाडिय़ों की तरफ नजर भी नहीं डाली जाती।

ये है नियम
ड्राइविंग स्कूल द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले वाहन टैक्सी के रूप में रजिस्टर्ड होने चाहिए। इनका रजिस्ट्रेशन, बीमा, फिटनेस और लाइफटाइम टैक्स भी जमा होना चाहिए। ड्राइविंग स्कूल जिन श्रेणियों के वाहनों के प्रशिक्षण के लिए अधिकृत हैं, उन श्रेणियों का एक-एक वाहन होना चाहिए। स्कूल संचालक इन वाहनों का मालिक होना चाहिए।


टैक्सी परमिट की फीस कीमत से भी अधिक
जानकार सूत्रों की मानें तो ड्राइविंग सिखाने वाले वाहन यदि टैक्सी परमिट वाले रखे जाएंगे तो परमिट का टैक्स ही वाहन की कीमत से अधिक पड़ जाएगा। इसलिए ड्राइविंग स्कूल संचालक एक वाहन खानापूर्ति के लिए परमिट वाला लेते हैं, शेष प्राइवेट वाहनों पर अवैध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाता है।

ड्राइविंग स्कूल द्वारा प्रशिक्षण के लिए टैक्सी परमिट वाला वाहन ही प्रयोग किया जाना चाहिए, जिसका रजिस्ट्रेशन, बीमा, फिटनेस और लाइफटाइम टैक्स भी जमा हो। अवैध रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को पूर्व में भी पकड़ा गया है। शहर में प्रशिक्षण दे रहे अवैध वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी और दोषी सिद्ध होने वाले ड्राइविंग स्कूल के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।
- संजय तिवारी, आरटीओ

 

दिनेश भदौरिया
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