ई-टेंडर घोटाले के हर आरोपी के संपर्क में रहने वाले जैकब को ईओडब्ल्यू ने किया तलब

जांच एजेंसी को संदेह है कि आरोपी कंपनियों से लाइजनिंग और वित्तीय लेनदेन के है संबंध

भोपाल। ई-टेंडर घोटाले की सातों आरोपी कंपनियों और जेल जा चुके सभी आरोपियों के लगातार गहरे संपर्क में रहने वाले भोपाल के जुसन जैकब नामक एक शख्स को आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ट (ईओडब्ल्यू) ने नोटिस देकर तलब किया है। ईओडब्ल्यू ने दो बार नोटिस थमाया है। बताया जा रहा है कि जैकब कांग्रेस नेताओं का बेहद करीबी है और रॉयल मार्केट में टायर का व्यापार करते हैं।

लगातार फोन पर लंबी बाते हुई
ई-टेंडर घोटाले की मुख्य आरोपी कंपनी मैक्स मेंटाना सहित ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन, सोरठिया वेल्जी एंड रत्ना, सहित अन्य आरोपी कंपनियों के मुख्य पदाधिकारियों से लगातार फोन पर बात करने के आरोप है। जब 2018 में ईओडब्ल्यू ने ई-टेंडर घोटाले पर प्राथमिक जांच पंजीबद्ध की थी, उसके बाद जैकब और आरोपी कंपनियों के पदाधिकारियों के बीच में लगातार फोन पर लंबी बाते हुई।

 

सबसे बड़ा जांच का बिंदु
हर आरोपी से लगातार बातें करने के कारण ईओडब्ल्यू ने जैकब को दो बार नोटिस थमाकर बयान के लिए बुलाया है। एक बार बयान दे चुका है, जिसमें उसने जांच एजेंसी को आड़े हाथों लेकर यह तक कह दिया कि किसी से बात करने से आरोप तय नहीं हो जाते हैं। लेकिन ईओडब्ल्यू यह जांच कर रही है कि जिन-जिन अधिकारियों से जैकब की बातचीत हुई हैं, उनके बीच में कहीं वित्तीय लेनदेन तो नहीं हुआ है। आखिर जैकब ने ही सभी आरोपियों और आरोपी कंपनियों के पदाधिकारियों ने क्यों बात की यह ईओडब्ल्यू के लिए सबसे बड़ा जांच का बिंदु है।


भोपाल के एक बड़े कारोबारी से भी संपर्क
ईओडब्ल्यू ने जैकब के फोन नंबर की सीडीआर निकाली तो इसमें चौंकाने वाले नाम सामने आए। भोपाल के एक बड़े कारोबारी से भी लगातार जैकब की बातें हुई है। वहीं, दिल्ली में पदस्थ मप्र कैडर के एक आईएएस अफसर से भी बातचीत सीडीआर में मिली है।


आरोप है कि आईएएस अफसर ने मेंटाना कंपनी को जल संसाधन विभाग के टेंडर में सहयोग किया था। बाद में जल संसाधन विभाग के टेंडर और मेंटाना कंपनी को ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया है। ऐसे में ईओडब्ल्यू को आशंका है कि इन कंपनियों से जैकब की कुछ नजदीकियां जरुर रही होगी।

 

इनके संपर्क में रहने से रडार पर है
1. मप्र जल निगम, मप्र सडक़ विकास निगम, मप्र लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और लोक निर्माण विभाग के पीआईयू के तत्कालीन ब्यूरोक्रेट्स।
2. बेंगलुरु की सॉफ्टवेयर कंपनी एंट्रस प्रालि-टीसीएस के आरोपी अधिकारी-कर्मचारी।
3. भोपाल की सॉफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशंस प्रालि व निर्माण कंपनी मेसर्स रामकुमार नरवानी लिमिटेड
4. निर्माण कंपनियां मेसर्स जीवीपीआर लिमिटेड हैदराबाद, मेसर्स मैक्स मेंटाना लिमिटेड, द ह्यूम पाइप लिमिटेड मुंबई, मेसर्स जेएमसी लिमिटेड बडौदा, सोरठिया बेलजी एंड रत्ना प्रालि कंपनियों के आरोपी संचालकगण।

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