नियामक आयोग के सदस्य का ऐतराज सरकार ने किया दरकिनार, लिखा- प्रभारी अध्यक्ष बनाने का है अधिकार

- विद्युत नियामक आयोग के सदस्य जस्टिस भूषण ने उठाया था सरकार की दखलंदाजी पर ऐतराज

- सरकार ने नियामक आयोग सदस्य पाठक को लिखा है कि प्रभारी अध्यक्ष को नियुक्त करने का अधिकार सरकार के पास है

- दूसरे राज्यों में भी इसी प्रकार प्रभारी अध्यक्ष बनाए जाने का हवाला भी ऊर्जा पत्र में दिया गया

- नियामक आयोग के दूसरे सदस्य चंद्रभूषण पाठक ने ऐतराज उठाया था

राज्य सरकार ने विद्युत नियामक आयोग के प्रभारी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर आयोग सदस्य जस्टिस चंद्रभूषण पाठक के ऐतराज को दरकिनार कर दिया है। सरकार ने नियामक आयोग सदस्य पाठक को लिखा है कि प्रभारी अध्यक्ष को नियुक्त करने का अधिकार सरकार के पास है। वर्तमान में जो प्रभारी अध्यक्ष बनाया गया है, वह नियमों के हिसाब से ही है। इसके साथ ही दूसरे राज्यों में भी इसी प्रकार प्रभारी अध्यक्ष बनाए जाने का हवाला भी ऊर्जा पत्र में दिया गया है।
दरअसल, राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष देवराज बिरदी हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं। इस कारण ऊर्जा विभाग ने आयोग के सदस्य मुकुल धारीवाल को प्रभारी अध्यक्ष नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया था।

इस पर नियामक आयोग के दूसरे सदस्य चंद्रभूषण पाठक ने ऐतराज उठाया था। पाठक ने इसे नियामक आयोग के कामकाज में सरकार की दखलंदाजी करार दिया था। साथ ही नियमों का हवाला देकर लिखा था कि ऊर्जा विभाग को प्रभारी अध्यक्ष बनाने का अधिकार ही नहीं है। इसके जवाब में अब ऊर्जा विभाग ने लिखा है कि उत्तराखंड व राजस्थान में इस प्रकार ही प्रभारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। दोनों ही राज्यों के प्रभारी बनाने के आदेशों की कॉपी तक ऊर्जा विभाग ने अपने जवाब के साथ लगा दी है। इसके बाद अब पूरा मामला वापस आयोग सदस्य पाठक के पाले में आ गया है।

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इनका कहना-

विद्युत अधिनियम में कहीं पर भी प्रभारी अध्यक्ष बनाने के अधिकार सरकार को नहीं दिए गए हैं। यदि किसी दूसरे राज्य ने कोई गलती की है, तो यह जरूरी नहीं कि उसे मध्यप्रदेश भी करें।

- चंद्रभूषण पाठक, सदस्य, राज्य विद्युत नियामक आयोग

Kamal Nath
harish divekar Reporting
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