MP Politics : सीएम की आपात कैबिनेट बैठक जारी, मंत्री बोले - सरकार पर कोई संकट नहीं

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By: KRISHNAKANT SHUKLA

Updated: 15 Mar 2020, 03:00 PM IST

भोपाल : मध्यप्रदेश में चल रहे मौजूदा सियासी उठापटक का आज 13वां दिन है। रविवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आपात कैबिनेट बैठक की। कमलनाथ सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री पीसी शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि कोरोना वायरस के चलते कई महत्वपूर्ण लिए गए। विधानसभा सत्र के फैसलों को लेकर कैबिनेट ने सीएम को अधिकृत किया।

  1. मध्यप्रदेश में 50 आइसोलेशन केंद्र बनाए गए
  2. एयरपोर्ट पर अब तक करीब 3000 लोगों की जांच की गई
  3. प्रदेश में कई सार्वजनिक केंद्र बंद किए गए
  4. प्रदेश के स्कूल कॉलेज सिनेमाघर अगले आदेश तक बंद रहेंगे
  5. कर्मचारियों का 5% महंगाई_भत्ता बढ़ाया गया, 1 अप्रेल 2020 से मिलेगा
  6. दो मेंबर पीएससी के बनाये रामु टेकाम और राशिद सोहेल सिद्दकी ।

फ्लोर टेस्ट को लेकर मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि कैबिनेट नहीं विधानसभा तय करेगी फ्लोर टेस्ट के बारे में।
अभी बजट सत्र होगा, अभिभाषण होगा। उऩ्होंने कहा कि सत्र के दौरान फ्लोर टेस्ट के कई मौके आते है। हमारे 17 विधायक किडनेप है। उन्हें राज्यपाल छुड़ाए। पीसी शर्मा बोले, किडनेप विधायकों के चहरे देखकर लगता है कि उन्हें हिप्नोटाइज किया, तंत्र मंत्र किया, वे दबाव में है, उन्हें मुक्त कराया जाये।

नगरी प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि कैबिनेट का निर्णय आपको पता चल जाएगा। सरकार पर कोई संकट नहीं है, आंकड़ों के खेल पर उन्होंने कहा कि हमारे आंकड़े हम मीडिया में नहीं बता रहें। जब फ्लोर टेस्ट होगा तब आंकड़े सामने आ जाएंगे।

कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया का बड़ा बयान भाजपा के 6 विधायक हमारे संपर्क में है। सदन में हम 112 से 113 विधायकों के साथ बहुमत सिद्ध करेंगे।

मंत्री बोले - कई विधायक बीमार

पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल बोले, भारतीय जनता पार्टी ने लोकतंत्र का प्रदेश में नंगा नाच मचा रखा है। कमलनाथ सरकार पूरी तरह सुरक्षित है, कल (16 मार्च) पता चल जाएगा की हमारे दावे में कितना दम। हमारे विधायक पूरी तरह खुलेआम घूम रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के विधायक होटल के कमरों में बंधक बनाकर रखे गए हैं। कमलेश्वर पटेल ने कहा कि बंधक बनाए गए परिजनों विधायकों की बात नहीं कराई जा रही, कई विधायक बीमार है।

 

हर हाल में 16 को होगी सदन की कार्यवाही

बता दें कि एमपी में सियासी घमासान को लेकर राज्यपाल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि सदन की कार्रवाही 16 मार्च को किसी भी हाल में स्थगित, विलंबित या निलंबित नहीं की जाएगी। विश्वास मत विभाजन के आधार पर बटन दबाकर होगा, अन्य किसी तरीके से नहीं। इसकी संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाए। राज्यपाल लालजी टंडन द्वारा जारी पत्र के बाद से अब नया सियासी मोड़ आ गया।

 

कानूनी विशेषज्ञ का मत है

मध्यप्रदेश के मौजूदा सियासी घमासान को लेकर कानूनी विशेषज्ञ का कहना है कि कानूनी प्रावधान न होने के चलते कांग्रेस और स्पीकर 16 बागी विधायकों को विधानसभा में पेश होने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं। इससे पहले पिछले साल कर्नाटक में ऐसी स्थिति बनी थी तो सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस्तीफा दिए जाने के 7 दिन के भीतर स्पीकर उनकी वैधता की जांच करें। अगर वे सही हों तो मंजूर करें, नहीं तो खारिज कर सकते हैं। ऐसे हालात में बागी विधायकों पर व्हिप लागू नहीं हो सकता है।

 

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