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MP की पहली ट्रांसजेंडर पैरालीगल बनी सामजिक न्याय विभाग के डायरेक्टर की निज सचिव

नई शुरुआत : सामजिक न्याय विभाग के दृष्टिबाधित डायरेक्टर ने ट्रांसजेंडर संजना को नियुक्त किया निज सचिव, - एमपी की पहली ट्रांसजेंडर पैरालीगल वॉलेंटियर भी हैं संजना सिंह

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first transgender paralegal

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विकास वर्मा, भोपाल। पिछले 15 सालों से राजधानी भोपाल में सोशल वर्क से जुड़ीं शहर की ट्रांसजेंडर संजना सिंह को मप्र सामजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के डायरेक्टर कृष्ण गोपाल तिवारी ने बतौर निज सचिव नियुक्त किया है। प्रदेश में यह पहला अवसर है जब सरकारी विभाग में किसी ट्रांसजेंडर को नौकरी पर रखा गया है। तिवारी स्वयं देश के पहले दृष्टिबाधित आईएएस ऑफिसर हैं, मप्र के विभिन्न जिलों में कलेक्टर रहने के बाद वर्तमान में यहां डायरेक्टर के पद पर हैं।

उन्होंने बताया कि हमारा विभाग सोशल जस्टिस है तो किसी और कुछ बोलने से पहले हमें खुद ही शुरुआत करनी होगी। हम अपने विभाग में आउटसोर्स से कर्मचारी रखते हैं और मैं चाहता था कि ट्रंासजेंडर्स को मौका दूं ताकि उन्हें एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिले और मैं भी उनके बारे में और जान सकूं। समाज में कहीं ना कहीं से तो शुरुआत करनी ही पड़ेगी इसलिए संजना को मैंने अपने निजी स्टाफ के तौर पर रखा। संजना को अभी फोन कॉल्स, फाइल, रिकार्ड, डेटा संबंधी काम सौंपा है।

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MP की पहली ट्रांसजेंडर पैरालीगल वॉलेंटियर भी हैं संजना

भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में रहने वालीं &6 बरस की ट्रांसजेंडर संजना सिंह को इसी साल जिला विधिक प्राधिकरण में प्रदेश की पहली पैरालीगल वॉलेंटियर (पीएलवी) भी बनाया गया है। यही नहीं उन्हें लोक अदालत में खंडपीठ का भी सदस्य बनाया जाएगा। मार्च में लगने वाली लोक अदालत में खंडपीठ की सदस्य के रूप में संजना जज के साथ बैठकर प्रकरणों की सुनवाई भी करेंगी।

संजना बताती हैं कि जिला विधिक प्राधिकरण के पैरालीगल वॉलंटियर ने उन्हें ब'चों से जुड़े एक अभियान में काम करते देखा तो जज आशुतोष मिश्रा से मिलाया। इसके बाद उन्होंने मुझे पीएलवी नियुक्त किया था। बताती हैं कि वह पैरालीगल वॉलंटियर बनने के बाद भी मैं अपने समाज से जुड़ी हुई हूं। मैं अपने समुदाय के लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए और उन्हें स्वरोजगार दिलाने के लिए एक अभियान चला रही हैं, ताकि वे पेट पालने के लिए वे अपराध की दुनिया में न उतरें।

जब पता चला कि मैं ट्रांसजेंडर तो सब पराए हो गए

संजना का यह तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। पत्रिका से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए बताया कि बचपन में मेरे हाव-भाव को देखकर माता-पिता ने पहले यह बात छिपाकर रखी थी कि उनका बेटा एक किन्नर है। मैं 12वीं तक स्कूल में पढ़ी, जब मैं 14 साल की हुई तो शरीर में कुछ बदलाव आने लगे थे, जो बाकी लड़कों से अलग थे। कपड़े लड़कों वाले थे लेकिन हाव-भाव और चाल लड़कियों जैसी होती जा रही थी। मैं लड़कों के बीच खुद को असहज महसूस करने लगी थी। धीरे-धीरे बाहर वालों को पता चल गया कि मैं एक किन्नर हूं, इसके बाद तो अचानक से समाज मेरे परिवार का दुश्मन सा हो गया।

स्कूल में लड़के मुझे प्रताडि़त करने लगे, मजबूरन मुझे दोस्त, स्कूल और घर-परिवार सब छोडऩा पड़ा। मेरे सामने पढ़ाई छोड़कर किन्नर समाज में शामिल होने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। लेकिन मैंने एक एनजीओ की मदद से मैंने 12वीं तक पढ़ाई की और इग्नू से गे्रजुएशन कर रही हूं। संजना का कहना है कि मैं अपने लिव-इन पार्टनर शादाब हसन के साथ लिव-इन-रिलेशशिप में हूं, शादाब ट्रांसजेंडर नहीं हैं, मैंने शादी के बारे में कभी नहीं सोचा है, हम दोनों इसमें ही खुश हैं।