
Bus passenger's hand cut during the crossing of truck and bus death
ग्वालियर. भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों का राम मंदिर आंदोलन चरम पर था। भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में शुरू हुई रथ यात्रा के बाद छह दिसंबर को कारसेवा किया जाना तय किया गया। जयभान सिंह पवैया के गृहग्राम चीनोर क्षेत्र से लगभग 125 कारसेवकों का जत्था अयोध्या गया था। प्रदेश के वर्तमान उच्च शिक्षा मंत्री जयभान ङ्क्षसह पवैया, तब कारसेवा दल में युवाओं की अगुवाई कर रहे थे।
एक मु_ी बालू डालकर कारसेवा करेंगे
मंच से उद्घोषणा हो रही थी कि एक मु_ी बालू डालकर कारसेवा करेंगे। इस बीच बाबरी ढांचे के पीछे की ओर से एक कारसेवक बांस के सहारे सुरक्षा घेरा पार कर अंदर घुस गया। इसके बाद कारसेवकों का हुजूम ढांचे की ओर बढ़ा। साढ़े चार घंटे में ढांचा ढहा दिया गया। इसके बाद पूरे देश में अराजक माहौल की आशंका बनी। पूरी दुनिया में इसकी चर्चा थी। मामले की जांच के दौरान रायबरेली में इसका प्रारंभिक प्रकरण दर्ज किया गया।
सामाजिक सद्भाव बिगाडऩे के आरोप लगे
2010 में यह लखनऊ स्थित विशेष अदालत में सुनवाई के लाया गया, तब से सुनवाई जारी है। ढांचा ढहाए जाते समय मंच पर मौजूद विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल, आचार्य धर्मेन्द्र, आचार्य गिरिराजकिशोर, लालकृष्ण आडवाणी, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा के साथ ही जयभान सिंह पवैया समेत 40 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। पवैया पर धार्मिक भावनाएं भड़काने, आपराधिक षड्यंत्र रचने, जानमाल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश, धर्मस्थल को क्षति पहुंचाने सहित सामूहिक रूप से शांति भंग और सामाजिक सद्भाव बिगाडऩे के आरोप लगे हैं। इन सभी मामलों की सुनवाई लखनऊ की विशेष अदालत में चल रही है।
सबकुछ लोगों के सामने है
श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए कारसेवक पहुंचे थे। इस बीच वहां मौजूद ढांचा ढहा दिया गया, तब से सबकुछ लोगों के सामने है।
जयभान सिंह पवैया, उच्च शिक्षा मंत्री
Published on:
12 Oct 2018 08:01 am
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