इन बयानों के कारण मुश्किल में आई थी कमलनाथ सरकार, हाईकमान की नाराजगी के बाद सीएम गंभीर

इन बयानों के कारण मुश्किल में आई थी कमलनाथ सरकार,  हाईकमान की नाराजगी के बाद सीएम गंभीर
इन बयानों के कारण मुश्किल में आई थी कमलनाथ सरकार, हाईकमान की नाराजगी के बाद सीएम गंभीर

Pawan Tiwari | Updated: 16 Sep 2019, 03:24:07 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

  • पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की गाइड लाइन आने के बाद कमलनाथ भी अपने मंत्रियों के लिए आचार-संहिता बना रहे हैं।

भोपाल. वन मंत्री उमंग सिंघार के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर लगाए संगीन आरोपों पर मचा बवाल भले ही थम गया हो। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ इस सारे घटना क्रम को लेकर गंभीर हैं। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की गाइड लाइन आने के बाद कमलनाथ भी अपने मंत्रियों के लिए आचार-संहिता बना रहे हैं। कमलनाथ का फोकस मध्यप्रदेश को सुशासन के मॉडल के रूप में पहचान बनाने का है। इस संबंध में हाल ही के दिल्ली दौरे में कमलनाथ की सोनिया गांधी से भी बात हो चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक इस आचार संहिता के तहत मंत्रियों से ये साफ कह दिया जाएगा कि आपसी मतभेदों पर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी कर आरोप लगाने की परंपरा अब नहीं चलेगी। वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के बीच का पत्र व्यवहार भी गोपनीय रहेगा। यदि मंत्री को किसी से कोई आपत्ति या विरोध है तो वो सीधे आरोप लगाने की बजाय मुख्यमंत्री को बताएंगे। विवादित विषयों पर मीडिया में बयानबाजी करने की भी मनाही रहेगी। आचार संहिता मंत्रियों को लिखित में नहीं भेजी जाएगी बलेकि वन टू वन चर्चा कर उनको निर्देशित किया जाएगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस तरह के विवादित घटनाक्रमों से सरकार की छवि पर असर पड़ता है।

  • ये हैं विवादित बयान, जिन पर खड़े हुए सवाल
    लोकसभा प्रभारियों ने आरोप लगाए थे कि मंत्री उनकी नहीं सुनते। सरकार बनने के बाद कई विधायक भी मंत्रियों पर लगाते रहे कि वे नहीं सुननते हैं और न भी काम करने देते।
  • कैबिनेट में बैठक में खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे के बीच बहस हुई। इसके बाद विवाद गहराया था कि मंत्रिमंडल में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दो गुट हैं।
  • राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मीडिया में कहा था- मुख्यमंत्री व्यस्त रहते हैं, इसलिए वे मंत्रियों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते।
  • विधानसभा के पहले सत्र में मंत्रियों को लिखित जबाव ने भी सरकार पर सवाल किए। इन जवाबों में सिंहस्थ, पौधारोपण और मंदसौर मामले में की गई कार्रवाई को सही बताया गया था।
  • कृषि मंत्री सचिन पायलट ने सार्वजानिक बयान देते हुए कहा था कि शिवराज सरकार के कार्यकाल से जारी भावांतर योजना बंद की जा रही है। बाद में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बयान पर अपने मंत्री पर नाराजगी जताई थी।
  • सहकारिता मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि उनके क्षेत्र में खुलेआम अवैध रेत का खनन है और मैं मंत्री होते हुए भी लाचार हूं।
  • उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के खिलाफ खुला हमला बोला। इस मामले में रिपोर्ट कांग्रेस अनुशासन सीमित तक पहुंच गई।

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