गले से पैरों तक लाल चोला पहनकर करते हैं काठी नृत्य

गणगौर उत्सव में शिव बारात और काठी नृत्य की प्रस्तुति

By: hitesh sharma

Published: 19 Sep 2021, 12:23 AM IST

भोपाल। भगवान शिव और देवी पार्वती के लोक रूप गणगौर की अनुष्ठानिकता और लोक परंपरा से संबद्ध कलाओं का तीन दिवसीय समारोह गणगौर उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। समारोह के दूसरे दिन उज्जैन की वैशाली देशमुख और साथियों ने शिव बारात की प्रस्तुति दी तो हरदा के लक्ष्मीनारायण और साथियों ने काठी नृत्य की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति की शुरुआत शिव बारात पर आधारित नृत्य नाट्य से हुई। कलाकारों ने मालवा के लोकनृत्य शिव व्यावला के माध्यम से भगवान शिव की बारात की प्रस्तुति दी।
नृत्य में दिखाया गया कि गांव में छोटे-छोटे उत्सवों में भोलेनाथ का व्यावला होता है, जिसमें महिलाएं एकत्रित होकर हल्दी, मेहंदी और अन्य गीत गाती हैं। जब भोलेनाथ की बारात आती है तो सास उनका स्वागत करती हैं और बारात में भोलेनाथ के गण नृत्य करते हैं। इस प्रस्तुति में कलाकारों ने बेन्या बई का ब्याव में, चलानी चितारा...,हल्दी गीत- महदी तो बावी मालवे ने..., कंचन थाल गीत- कंचन थाल सजाओ अलबेली..., शिव बारात- भोला की अजब बारात, भोलो खूब बण्यो रे..., बन्नो भजन- बन्नो आयो भभूती वालो रे..., विदाई गीत-राज दुलारी चाली सासरे वो म्हारी बेन्या बई... गीत और भजनों पर प्रस्तुति दी।

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'काठी' एक मातृ पूजा का त्योहार
अगली प्रस्तुति हरदा के लक्ष्मीनारायण और साथियों ने निमाड़ अंचल के प्रसिद्घ लोकनृत्य काठी की हुई। माता पार्वती की तपस्या से संबंधित 'काठी' एक मातृ पूजा का त्योहार है। इसमें नर्तकों का श्रृंगार अनूठा होता है। गले से लेकर पैरों तक पहना जाने वाला बाना जो लाल चोले का घेरेदार बना होता है। काठी नर्तक कमर में एक खास वाद्य यंत्र ढांक्य बांधते हैं जिसे मासिंग के डण्डे से बजाया जाता है। काठी का प्रारम्भ देव प्रबोधिनी एकादशी से होता है और विश्राम महाशिवरात्रि को किया जाता है।

सिंधु नदी पर पेश किया नृत्य

संस्कृति विभाग की एकाग्र शृंखला गमक में सिंधी साहित्य अकादमी की ओर से सिंधी नृत्य और गीतों की प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति की शुरुआत नृत्य से हुई। जिसमें ओम अनिका सांस्कृतिक संस्थान की कलाकार ने गणपति वंदन-गण गणपतये नम:..., सिंधु नदी पर आधारित नृत्य प्रस्तुति दी। अगली कड़ी में आयोलाल झूलेलाल..., लद्दाख जी वादयुनि में..., ही मुहिंजो वतन ही तुहिंजो वतन... गीत पेश किए।

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