विधानसभा वर्चुअल तो फिर संसद सत्र क्यों नहीं

- मध्यप्रदेश के सफल प्रयोग पर सांसद बोले, समय की मांग है ऑनलाइन सदन

By: anil chaudhary

Published: 23 Sep 2020, 05:54 AM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा ने सोशल डिस्टेंङ्क्षसग रखते हुए विधायकों को वर्चुअल रूप से सदन की बैठक में शामिल होने का मौका दिया। विधायक अपने जिला मुख्यालय से सदन की बैठक में ऑनलाइन शामिल हुए। इस सफल प्रयोग को अन्य राज्यों में भी अपनाने की जरूरत है। सांसदों का कहना है कि सदन से ऑनलाइन जुडऩे का मौका दिया जाना बेहतर प्रयास है। यह समय की मांग भी है।
देश के संसदीय इतिहास में यह पहला मौका था, जब सदन की कार्यवाही में विधायक ऑनलाइन शामिल हुए। इस पहले प्रयास में 57 विधायक ऑनलाइन शामिल हुए। इसमें 23 विधायक तो जिला मुख्यालयों से और शेष विधानसभा भवन स्थित मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के चेम्बर सहित अन्य स्थानों से ऑनलाइन शामिल हुए। सचिवालय ने इन विधायकों के लिए विशेष व्यवस्था की थी। कोरोनाकाल में हुए विधानसभा सत्र के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए सर्वदलीय बैठक में इस पर विचार बना और इस विचार को हकीकत में तब्दील कर दिया गया।
- अब तक का सबसे छोटा सत्र
पिछले कुछ वर्षों में विधानसभा सत्र की बैठकें छोटी होने लगी हैं। अब तो पांच और तीन दिन के सत्र बुलाए जाने लगे हैं। सितंबर का सत्र भी तीन दिन का था, लेकिन एक ही दिन में सभी काम-काज निपटा दिया गया, इसलिए इस सत्र को सबसे छोटा सत्र भी कह सकते हैं। संसदीय जानकारों का कहना है कि सदन की बैठकों की संख्या बढऩा चाहिए। सत्र की बैठकें अधिक होंगी तो महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। विधायकों को सदन में अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। विधायकों की राय है कि अगली बार सदन की बैठक अधिक हो।

 

कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। कोरोनाकाल में मध्यप्रदेश विधानसभा ने वर्चुअल व्यवस्था कर विधायकों को बेहतर मौका दिया है। ऐसी ही व्यवस्था संसद में भी होना चाहिए।
- राजबहादुर सिंह, सांसद सागर

आवश्यकता अविष्कार की जननी है। समय के साथ बदलाव हो रहे हैं, परिस्थितियां देखकर निर्णय होना चाहिए। मध्यप्रदेश विधानसभा का प्रयोग बेहतर है।
- रोडमल नागर, सांसद राजगढ़

कोविड जैसी महामारी में मध्यप्रदेश विधानसभा का प्रयास प्रशंसनीय है। समय बदल रहा है, बदलते समय में प्रयोग होते रहना चाहिए।
- सुधीर गुप्ता, सांसद मंदसौर

समय परिस्थिति के हिसाब से बदलाव होते रहना चाहिए। कोरोनाकाल में यह कठिन समय था, सोशल डिस्टेंसिंग की दृष्टि से यह बेहतर प्रयोग था।
- ढाल ङ्क्षसह बिसेन, सांसद बालाघाट

anil chaudhary
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