भोज विवि पहुंची बिना सीरियल नंबर की अंकसूचियां

भोज विवि पहुंची बिना सीरियल नंबर की अंकसूचियां

Pushpam Kumar | Publish: Sep, 09 2018 08:03:01 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

17 फीचर्स का दावा फेल... गड़बड़ी के खुलासे के बाद विवि प्रशासन दोबारा करवा रहा प्रकाशन

भोपाल. भोज मुक्त विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी डिग्रियों की 17 फ ीचर्स से सुरक्षा का दावा करता है, जिसकी पोल खुल गई। ब्लैंक अंकसूचियां उपलब्ध कराने वाली एजेंसी की गलती के कारण इनकी वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय में पहुंची अंकसूचियां बिना सीरियल नंबर की हैं। विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों ने अब प्रिंटिंग एजेंसी को तलब कर इस गलती को सुधारने की कवायद शुरू की है। सूत्रों के अनुसार दो-तीन दिनों से ब्लैंक अंकसूची प्रिंट करने वाली टीम के सदस्य इनमें सुधार कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार भोज विश्वविद्यालय ने खाली अंकसूचियों की छपाई का टेंडर चेन्नई की एक फर्म को दिया था। एजेंसी ने अंकसूचियों की छपाई में अन्य मानक तो विवि के मापदंडों के अनुसार ही रखे, लेकिन सुरक्षा और सत्यता की गारंटी देने वाला सीरियल नंबर ही नहीं छापा। एजेंसी ने अंकसूची के ऊपर केवल अपना रजिस्ट्रेशन नंबर छाप दिया है। यह पहली बार नहीं है कि भोज मुक्त विवि प्रशासन की लापरवाही उजागर हो रही हो। कई बड़े मामले प्रकाश में आए हैं।

सीरियल नंबर है अंकसूची की सत्यता का प्रमाण
जानकारों के अनुसार किसी भी विवि की अंकसूची या डिग्री में सीरियल नंबर का महत्व होता है। इसी नंबर से अंकसूची की सत्यता सिद्ध की जाती है। विवि से अंकसूची लेने के बाद जब स्टूडेंट किसी कंपनी, सरकारी नौकरी में आवेदन करता है और उसकी अंकसूची की वैधता को चुनौती दी जाती है। ऐसी स्थिति में इसी सीरियल नंबर से अंकसूची ट्रेस की जाती है। इससे असली या फ र्जी होने का पता चलता है। बिना सीरियल नंबर की अंकसूची पहली नजर में ही फर्जी प्रतीत होती है। ऐसे में कोई भी शक कर सकता है और उसकी जांच भी काफी मुश्किल हो जाएगी।


ऐसा कुछ नहीं है, गोपनीय प्रक्रिया जारी
जैसा आप बता रहे हैं, वैसा कुछ नहीं है। अंकसूचियों की कुछ गोपनीय प्रक्रिया होती है, उसे ही पूरा किया जा रहा है।
रवीन्द्र आर कान्हेरे, कुलपति, भोज मुक्त विवि भोपाल

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