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भोपाल. गुजरात की तर्ज पर क्या मध्यप्रदेश में भी चौबीस घंटे दुकानें खुली रखने का प्रयोग किया जा सकता है? इस मुद्दे को लेकर शहर के एक्सपर्ट, व्यापारिक संगठनों, ट्रांसपोर्टरों एवं वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई है। ज्यादातर ने कहा कि प्रदेश में भी रात्रिकालीन बाजार खोले जाते हैं तो इकोनॉमी बढ़ेगी। बेरोजगारी की समस्या दूर होगी। लोगों को उनकी जरूरत का सामान खरीदने के लिए समय की कोई पाबंदी नहीं रहेगी।
पिछली सरकार में भी
रात्रिकालीन बाजार खुले रखने की पहल पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में की थी। न्यू मार्केट में रात्रि में भी दुकानें खुलने लगी थीं। शनिवार को बाजार रात 2 बजे तक खुलते थे। हालांकि यह तीन महीने तक ही जारी रहा। इसके बाद व्यापारियों ने रुचि नहीं ली।
गुजरात सरकार की योजना
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की घोषणा के अनुसार राज्य में दुकानें 12 महीने और 24 घंटे खुली रह सकती हंै। खबरों के मुताबिक राज्य के व्यापारियों और व्यापारिक संगठनों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है।
फायदे
व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का कारोबार बढ़ेगा
जरूरत का सामान किसी भी समय मिल सकेगा
आराम से सामान पसंद किया जा सकेगा
ऑनलाइन की खरीददारी पर रुझान घटेगा
परेशानी
दुकान, मकान सहित आम आदमी की सुरक्षा की चिंता
शहरों में रात्रिकालीन परिवहन की सुविधा नहीं है
प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त स्टाफ लगाना पड़ेगा
पुलिस बल ज्यादा संख्या में लगाना होगा
मध्यप्रदेश में यह पहल होती है तो उसका स्वागत किया जाएगा। इससे ट्रांसोपर्ट कारोबार बढ़ेगा। साथ ही लोगों को उनकी जरूरत का सामान सही समय पर उपलब्ध होने लगेगा।
महेश पंजवानी, ट्रांसपोर्टर
प्रदेश में बाजार रात्रि में खुलते हैं तो कारोबार 25 फीसदी तक ग्रोथ करेगा। दिन में समय नहीं मिलने से लोग जरूरत का सामान खरीदने से वंचित रह जाते हैं।
राजेश कुमार जैन, चार्टर्ड एकाउंटेंट
रात्रिकालीन बाजार खुलते हैं तो इनडायरेक्ट रूप से इकोनॉमी में योगदान मिलेगा। हालांकि रात्रि के समय छोटी-मोटी खरीददारी हो सकती है।
आरपी श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त, राज्य कर
इसके लिए श्रम शक्ति की ज्यादा जरूरत होगी। वो ही लोग रात में व्यवसाय चला सकते हैं, जिनके घरों में एक से अधिक व्यक्ति संभालने वाले हों।
प्रदीप गुप्ता, पूर्व प्रवक्ता, न्यू मार्केट व्यापारी एसो.
यह नीतिगत फैसला हो सकता है। सरकार ही तय कर सकती है। इससे ज्यादा मैं कुछ भी कमेंट नहीं दे सकता।
पीके दुबे, एडिशनल लेबर कमिश्नर, श्रम विभाग
Published on:
08 Feb 2019 04:04 am
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