हमेशा याद आएंगे बाबूलाल गौर: जानिये सियासी सफर और कैसे अपनी कार्यप्रणाली से बने रहे जनता की आवाज

हमेशा याद आएंगे बाबूलाल गौर: जानिये सियासी सफर और कैसे अपनी कार्यप्रणाली से बने रहे जनता की आवाज

Deepesh Tiwari | Updated: 21 Aug 2019, 04:59:51 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

कई बार अपनी ही सरकार को आइना दिखाया : memories of babulal gaur ...
मूल्यों से समझौता नहीं...
ऐसे बने गोविंदपुरा सीट के सरताज...
जनहित में विपक्ष के भी साथ...

भोपाल @ दीपेश अवस्थी की रिपोर्ट...
मध्यप्रदेश से बुधवार को भाजपा को दूसरा बड़ा झटका तब लगा जब कुछ ही दिन पहले सुषमा स्वराज के निधन के बाद आज यानि बुधवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर babulal gaur के निधन का समाचार आया।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर babulal gaur (89) का लंबी बीमारी के बाद बुधवार सुबह निधन हो गया। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके चलते वे अस्पताल में कई दिनों से एडमिट थे।

बाबूलाल गौर babulal gaur हमेशा ही अपनी कार्यप्रणाली के कारण सुर्खियों में रहे। मुख्यमंत्री और मंत्री रहते हुए उन्होंने सख्त कदम उठाए तो मंत्री पद जाने के बाद भी वे विधायक के तौर पर सक्रिय रहे।

बाबूलाल गौर babulal gaur भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। बाबूलाल गौर ने 2004 में उमा भारती के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद प्रदेश की कमान संभाली थी। अगस्त 2004 से नवंबर 2005 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री memories of babulal gaur रहे थे। लो ब्लड प्रेशर की शिकायत पर 7 अगस्त, 2019 को उन्हें भोपाल के एक अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहां उनकी तबीयत बिगड़ी और बुधवार, 21 अगस्त, 2019 की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन पर पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट सहित अन्य नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।

अपनी ही सरकार को आइना दिखाया...
सदन में बाबूलाल गौर babulal gaur की सक्रियता हमेशा देखने को मिलती रही। सदन में कई मौके ऐसे भी आए जब उन्होंने अपनी ही सरकार को आइना दिखाया। बाबूलाल गौर के लिए जनहित सर्वोपरि रहा। भोपाल और इंदौर मेट्रो उनका ड्रीम प्रोजेक्ट रहा। इसमें बिलम्ब होने पर उन्होंने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

सदन में एक सवाल पर जब सरकार ने देरी होने का जबाव दिया तो बाबूलाल गौर babulal gaur का कहना था कि सात साल से मेट्रो नहीं चला सके तो यह तो सरकार पर ही सवाल है। सरकार की उदासीनता और लालफीताशाही के कारण जनता मेट्रो से वंचित है।

हालांकि बाबूलाल गौर babulal gaur के सवाल पर तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह ने कहा था कि 2021-22 तक मेट्रो का पहला चरण पूरा होने की बात कही तो बाबूलाल गौर ने फिर ताना दिया, 2021 तक कौन कहां रहेगा कोई नहीं जानता।

मूल्यों से समझौता नहीं...
बाबूलाल गौर babulal gaur ने एक असाधारण ज़िंदगी जीते हुए अपने पिता की दुकान चलाने से इनकार कर दिया क्योंकि मूल्य आड़े आ रहे थे। एक रुपया दिहाड़ी पर कपड़ा मिल में मज़दूरी की, राजनीति की, मंत्री बने, मुख्यमंत्री बने। भोपाल की गोविंदपुरा की सीट के अलावा एक और नाम अपनी पहचान के साथ चस्पा किया – बुलडोज़र!

दरअसल 1990 से 1992 तक सुन्दरलाल पटवा की सरकार में बाबूलाल गौर babulal gaur भी मंत्री रहे। यहीं समय बाबूलाल गौर babulal gaur को नया नाम दे गया, नाम था बुलडोजर मंत्री। दरअसल बाबूलाल गौर अतिक्रमण हटाने के मामले में सख्त थे। यहां तक की गौतम नगर में अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए बाबूलाल गौर babulal gaur ने सिर्फ बुलडोजर खड़ा करके इंजन चालू करा दिया और देखते ही देखते अतिक्रमण अपने-आप गायब हो गया। इसके अलावा बाबूलाल गौर babulal gaur ने वीआईपी रोड पर झुग्गियां आड़े आने पर भी बुलडोजर चलवाया।

बाबूलाल गौर babulal gaur उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के नौगीर गांव में पैदा हुए थे। उन्होंने शराब कंपनी में काम करने के लिए गांव और राज्य दोनों छोड़ दिया। मध्यप्रदेश आए और शराब कंपनी में नौकरी की। इसके बाद संघ की शाखा में जाने लगा, संघ के कहने पर शराब की दुकान छोड़ दी और घर लौट गए। वहां से भोपाल वापसी हुई, कपड़ा मिल में मज़दूरी की, ट्रेड यूनियन की सियासत करते हुए विधायक बने और एक वक्त आया, जब वो सूबे का मुख्यमंत्री बन गए।

ऐसे बने गोविंदपुरा सीट के सरताज...
शुरूआत में कपड़ा मिल में मजदूरी करते बाबूलाल गौर मजदूरों की बात रखने के लिए भारतीय मजदूर संघ बना और बाबूलाल गौर babulal gaur का नाम संस्थापक सदस्यों में लिखा गया। इसके बाद 1956 में पार्षदी लड़े, लेकिन हार गए। फिर साल 1972 में उन्हें जनसंघ की ओर से विधानसभा टिकट मिला। सीट थी भोपाल की गोविन्दपुरा।

लेकिन राह आसान नहीं थी, बाबूलाल गौर babulal gaur अपना पहला चुनाव हार गए। कोर्ट में पिटीशन डाली, पिटीशन जीती फिर 1974 में उपचुनाव हुए बाबूलाल गौर babulal gaur जीते और पहली बार विधानसभा पहुंचे, और फिर उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, और लगातार 40 से अधिक वर्षों तक यहां से एकछत्र जीत दर्ज करवाते रहे। यानि बाबूलाल गौर babulal gaur आज तक यहां से नहीं हारे।

जनहित में विपक्ष के साथ खड़े होने में भी पीछे नहीं रहे -
बाबूलाल गौर babulal gaur के लिए जनहित सर्वोपरि रहा। जनहित पर यदि सरकार की नीतियां आड़े आईं तो बाबूलाल गौर babulal gaur विपक्षी के साथ भी खड़े होने से वे पीछे नहीं रहे।
पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर जहां एक ओर विपक्षी सदस्यों के वार से तत्कालीन भाजपा सरकार बचाव के प्रयास में थी, वहीं बाबूलाल गौर babulal gaur ही ऐसे नेता थे। जिन्होंने इस जनहित के मुद्दे पर विपक्ष के सुर में सुर मिलाया।

वहीं आमजन की फिक्र करते हुए बाबूलाल गौर babulal gaur ने उस दौरान विधानसभा में झुग्गीवासियों को सड़ा गेहूं दिए जाने के सवाल पर सरकार की आनाकानी पर आड़े हाथों लिया।
14वीं विधानसभा में तत्कालीन कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने मिलावटी गेंहू वितरित किए जाने का मुद्दा उठाया तो गौर समर्थन में खड़े हो गए। बोले, झुग्गिवासियों को सड़ा गेहूं बांटा जा रहा है। जिम्मेदार अफसरों को सस्पेंड किया जाए।

कर्ज लो और घी पियो का सिद्धांत छोडि़ए -
25 जुलाई 2017 का सदन का यह वाकया है। राज्य में बढ़ते कर्ज पर बाबूलाल गौर babulal gaur ने तत्कालीन अपनी ही भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया। शून्यकाल के दौरान उन्होंने यह मामला उठाते हुए कहा कि सरकार पर 1.40 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। कर्ज लो और घी पियो का सिद्धांत छोडि़ए। बाबूलाल गौर babulal gaur की चिंता यह थी कि सरकार विकास के नाम कर्ज तो लेती है लेकिन वैसा विकास दिख नहीं रहा है जैसा दावा किया जाता है।

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