Breaking : जानिए किस वजह से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के छुट्टी पर लगा प्रतिबंध

Breaking : जानिए किस वजह से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के छुट्टी पर लगा प्रतिबंध

By: KRISHNAKANT SHUKLA

Published: 24 May 2018, 12:40 PM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में होने वाले किसान आंदोलन और रमजान को लेकर गुरुवार को भोपाल पुलिस मु्ख्यालय की विशेष शाखा ने समस्त पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया है। पुलिस मुख्यालय ने एक गोपनीय पत्र जारी करते हुए बताया कि प्रदेश में दिनांक 01-06-2018 से 10-06-2018 तक प्रस्तावित किसान आंदोलन और रमजान माह को ध्यान में रखते हुए संभावित कानून व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में समस्त पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश पर्यन्त प्रतिबंध लगाया है।

अधिकारियों का कहना है कि किसान आंदोलन में सुरक्षा गतिविधियों की दृष्टि से कोई लापरवाही न हो इसके लिए पुलिस विभाग ने किसान आंदोलन और रमजान त्योहार ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों की छुट्टी स्थगित की है। दरअसल, 2 जून को किसान श्रद्धाजंलि सभा में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल होने जा रहे है। जिसको लेकर पुलिस पहले से सर्तक कर दी गयी है। इधर, इसी दौरान रमजान का त्योहार भी है। इसके पहले अप्रैल माह में भी भारत बंद के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर प्रतिबंध लगाया गया था।

इन शर्तों का करना होगा पालन

मंदसौर में होने वाले किसान आंदोलन में राहुल की रैली के पहले नंबर पर रैली स्थल पर 15 बाय 15 फिट का टेंट लगाने की अनुमति दी गई है। डीजे के साउंड को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उचित शब्‍दों का ही प्रयोग करने को कहा गया है। लाउड स्‍पीकर की सीमा को भी तय किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है। ध्‍वनि विस्‍तार यंत्र का प्रयोग रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक बंद रहेगा। इसी के साथ सुरक्षा कमेटी से लेकर साफ-सफाई तक की बातों का भी खास ख्‍याल रखने जैसी बातें इस सूची में शामिल हैं।

किसान गोलीकांड से शुरू हुआ था आंदोलन
पिछले साल 2017 में किसानों ने अपनी फसल का उचित दाम पाने के लिए मंदसौर में प्रदर्शन किया था, प्रदर्शन कर रहे किसानों पर सुरक्षा बलों ने गोली चला दी थी। इस गोलीकांड में 6 किसानों की मौत हुई थी। इस आंदोलन की आग ने प्रदेश के कई अन्य हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया था।

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