आज बैंकों में दिनभर लटके मिलेंगे ताले, हड़ताल पर रहेंगे कर्मचारी

नौ सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल समेत देशभर के बैंक कर्मचारी 22 अगस्त को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे।

By: दीपेश तिवारी

Published: 22 Aug 2017, 08:45 AM IST

भोपाल। इस दौरान सार्वजनिक, निजी, विदेशी, सहकारी एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में कामकाज ठप रहेगा। बैंक कर्मचारी मंगलवार को सुबह 10:30 बजे एमपी नगर स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के क्षेत्रीय कार्यालय के सामने से रैली निकालेंगे। इनका कहना है, सुधारों के नाम पर सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी, विदेशी हाथों को सौंपना चाहती है। कॉरपोरेट के खराब ऋणों को बट्टे खाते में डाला जा रहा है। यह सरासर लोगों पैसों की लूट है। वर्तमान में बैंकिंग उद्योग का करीब 13 लाख करोड़ रुपए खराब ऋणों में फंसा है, जिसकी वसूली के लिए कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अनुमान के मुताबिक हड़ताल से देशभर में 130 लाख करोड़ का व्यवसाय प्रभावित होगा। बैंककर्मी जन विरोधी बैंकिंग सुधारों, औद्योगिक घरानों के खराब ऋणों को बट्टे खाते में डालने बैंक शुल्कों में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं।

हड़ताल की पूर्व संध्या पर भोपाल की विभिन्न बैंकों के सैकड़ों कर्मचारी/अधिकारियों ने एसबीआई के स्थानीय प्रधान कार्यालय के सामने प्रदर्शन व सभा की। जिसे फोरम के संयोजक संजीव मिश्रा, को-आर्डीनेटर वी के शर्मा आदि कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया। शर्मा ने बताया कि हड़ताल के चलते बैंकों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहेगा।

ये हैं प्रमुख मांगें :

- खराब ऋणों की वसूली के लिए संसदीय समिति की अनुशंसाओं को लागू किया जाए। खराब ऋणों की वसूली के लिए कठोर कदम उठाए जाएं।
- प्रस्तावित एफआरडीआई बिल वापस लिया जाए।
- बैंक्स बोर्ड ब्यूरो को समाप्त करें।
- सभी संवर्गों में समुचित भर्ती हो।
- बैंक कर्मचारी-अधिकारियों के मुद्दों का निराकरण किया जाए।

ऐसी है बैंकों की स्थिति (लगभग) :

देश में-
बैंक शाखाएं 1.30 लाख
एटीएम 2 लाख
कर्मचारी 10 लाख

प्रदेश में-
बैंक शाखाएं 7300
एटीएम 10,000
कर्मचारी 40,000

भोपाल में-
बैंक शाखाएं 488
एटीएम 1000
कर्मचारी 5000

प्राइवेट बैंक नहीं रहेंगे हड़ताल पर:
वहीं राहत की बात यह है कि इस दौरान आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों में कामकाज सामान्य रहने की उम्‍मीद है। हालांकि इन बैंकों में भी चेक क्‍लीयरिंग में देरी हो सकती है। चूंकि महानगरों के साथ ही दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में भी प्राइवेट बैंकों का ऑपरेशन मजबूत होता जा रहा है। ऐसे में उम्‍मीद है कि कस्‍टमर को अधिक मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

 

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दीपेश तिवारी
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