26 साल बाद महिला ने जुड़वा बच्चों को दिया जन्म, डॉक्टरों की लापरवाही से हो गई मौत!

26 साल बाद महिला ने जुड़वा बच्चों को दिया जन्म, डॉक्टरों की लापरवाही से हो गई मौत!

KRISHNAKANT SHUKLA | Publish: Jul, 21 2019 08:56:08 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

राजकुमार रघुवंशी ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर लगाया आरोप, कहा- समय पर इलाज मिल जाता तो बच सकती थी एक बच्चे की जान, आठ घंटे बाद तोड़ा दम

भोपाल. राजधानी के एक अस्पताल में जीवित नवजात को मृत बताने का मामला सामने आया है। शाहपुरा स्थित लाइफलाइन अस्पताल में शुक्रवार को एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। जांच के बाद परिजनों को बताया गया कि दोनों मृत हैं।

छह घंटे की कागजी कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जब शव परिजनों को सौंपे तो एक बच्चे के शरीर में हलचल हुई। ये देख अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे का इलाज शुरू किया, लेकिन शाम को उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद बच्चों के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।

ग्राम बगरोदा, सिरोंज जिला विदिशा निवासी राजकुमार रघुवंशी ने बताया कि शुक्रवार सुबह 5.30 बजे उनकी भाभी ने अस्पताल में दो बच्चों को जन्म दिया। बच्चों की जांच के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि दोनों मृत हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के शव को एक कमरे में रख दिया गया।

करीब छह घंटे की कागजी कार्रवाई करने के बाद सुबह 11 बजे हमें बच्चे सौंपे गए। इस समय एक बच्चे के शरीर में हलचल हो रही थी। हमने इसकी जानकारी नर्स को दी, तो उसने बच्चे को देखा और डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने जांच कर बच्चे का जल्द इलाज करने को कहा, लेकिन शाम पांच बजे बच्चे की मौत हो गई।

26 साल बाद आई थी घर में खुशियां

राजकु मार ने बताया कि बच्चे की संास चल रही थी। 6 घंटे तक प्रबंधन डेथ सर्टिफिकेट तैयार करते रहेे। समय पर इलाज से जान बच जाती। राजकुमार का कहना है कि उनके भैया के घर में 26 साल बाद खुशियां आई थीं। जुड़वा बच्चे होने से घर में खुशी का माहौल था, लेकिन अस्पताल की लापरवाही ने सब छीन लिया।

कोई लापरवाही नहीं हुई : अस्पताल प्रबंधन

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि महिला को प्री मैच्योर डिलीवरी हुई थी। एक बच्चे का वजन 300 ग्राम, दूसरा 500 ग्राम का था। दूसरे बच्चे की सांस चल रही थी। उन्होंने परिजनों से कहा था कि बच्चों को दूसरे अस्पताल शिफ्ट करना पड़ेगा जहां एसएनसीयू हो, लेकिन वे नहीं माने, तो अस्पताल में ही इलाज किया। बच्चे के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है।

शिकायत सही मिली तो अस्पताल पर होगी कार्रवाई

दोनों मृत नवजात का पीएम कराया गया है, परिजनों को संदेह था कि नवजात जिंदा है। परिजनों ने शिकायत की है कि अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरती गई है। शिकायत की जांच की जा रही है, अगर सही पाई गई तो अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आशीष भट्टाचार्य, टीआई शाहपुरा थाना

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