अनदेखी के बाद भामाशाहों ने खींचे हाथ

bikaner news - After being ignored, Bhamashahs pulled their hands

By: Jaibhagwan Upadhyay

Published: 21 Apr 2021, 03:39 PM IST

कलक्टर की बैठक में भी दिखा रोष
बीकानेर.
लॉकडाउन में दिल खोलकर लोगों की सेवा करने वाले शहर के भामाशाहों ने अब मदद करने से हाथ खींच लिए हैं। जबकि वर्तमान में कोरोना ने भयानक रूप लेना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों जिला कलक्टर और भामाशाहों के बीच हुई बैठक में भामाशाहों के कुछ ऐसे ही संकेत मिले हैं।

असल में करीब नौ-दस माह तक शहर के गरीब तबके को दो जून की रोटी मुहैया करवाने वाले भामाशाहों को प्रशासन की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं मिला। इतना ही नहीं अधिकारियों और भामाशाहों के बीच रही संवाद की कमी भी प्रशासनिक अनदेखी को दर्शाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक भामाशाह ने बताया कि कोरोना की विकट स्थिति और लॉकडाउन में प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर काम किया था। लेकिन जैसे ही लॉकडाउन खुला प्रशासन भामाशाहों को मानो भूल ही गया। इतना ही नहीं किसी भी भामाशाह को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सम्मानित करना तो दूर उनके कार्यों को भुनाना भी उचित नहीं समझा।


भ्रष्टाचार की आशंका
कोरोना की विकट परिस्थितियों में सेवा करने वाले भामाशाहों को इस बात की आशंका भी है कि लोगों को बांटी गई खाद्य सामग्री में भ्रष्टाचार हुआ था। हालांकि इस बात को लेकर कोई भी भामाशाह फिलहाल खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन दबी जुबान से वे इस काम में बड़े घोटाले की आशंका जता रहे हैं।


सख्त लॉकडाउन लगा तो...
कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के चलते अगर प्रदेश में सख्त लॉकडाउन लगाया जाता है तो बीकानेर के प्रशासनिक अधिकारियों को भामाशाहों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। अगर शहर के भामाशाह मदद से हाथ खींचते हैं तो प्रशासनिक अमले के लिए शहर के लोगों को संभाल पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के दौरान शहर की दर्जनों संस्थाओं के पदाधिकारियों ने सैनिटाइजर, खाना के पैकेट, मजदूूरों के आवास, उनकी दवाइयां, परिवहन के साधन सहित अन्य जरूरत की वस्तुएं उपलब्ध करवाई थी।

Jaibhagwan Upadhyay Reporting
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