कोरोना के डर से कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने मरीजों से बनाई दूरी

कोरोना का असर :- वरिष्ठ चिकित्सक फरमा रहे आराम, युवा चिकित्सकों ने खड़ी की सुरक्षा की दीवार

By: Jaiprakash

Published: 13 Jan 2021, 01:22 PM IST

केस एक :- एसपी मेडिकल कॉलेज से सेवानिवृत दो वरिष्ठ चिकित्सक ने घर पर मरीज देखना बंद कर दिया। कॉलेज चौराहे के पास रहने वाले यह चिकित्सक अब केवल फोन पर सलाह-मशविरा ही दे रहे हैं।

केस दो :- जेएनवीसी कॉलोनी, सार्दुलगंज, सुदर्शनानगर में रहने वाले वरिष्ठ चिकित्सक भी मरीजों को घर पर नहीं देख रहे हैं। यह वरिष्ठ चिकित्सक अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं लेकिन ओपीडी में नहीं।


बीकानेर। कोरोना से आमजन ही नहीं चिकित्सक भी डरे हुए हैं। जिले में कोरोना की दस्तक के बाद वरिष्ठ चिकित्सक गायब हो गए हैं। कई चिकित्सकों ने घर पर प्रेक्टिस बंद कर दी है। करीब एक दर्जन चिकित्सक ऐसे है जब तक बीकानेर में कोरोना का कहर रहा वे बीकानेर से बाहर ही रहे। कोरोना कम होने के साथ ही वह वापस लौट रहे हैं लेकिन अभी भी वे डरे हुए हैं। इसकी बानगी यह है कि तीन-चार वरिष्ठ चिकित्सक पीबीएम अस्पताल की ओपीडी में पहुंच ही नहीं रहे। सेवानिवृत्त वरिष्ठ चिकित्सक भी मरीजों से दूरी बनाए हुए हैं।

१२ चिकित्सक साठ के पार, ३३ साठ के करीब
एसपी मेडिकल कॉलेज में १२ चिकित्सक ऐसे है जो साठ को पार कर चुके हैं जबकि ३३ साठ के करीब है। कोरोना के बाद से ९ चिकित्सकों ने मरीजों को देखना तक बंद कर दिया है। हालात यह है कि वह अपने पुराने मरीजों को अस्सिटेंट के सहारे ही काम चला रहे हैं। कई चिकित्सक ओपीडी में नहीं पहुंच रहे हैं। वैसे भी ६० से अधिक उम्र के व्यक्तियों को सरकार ने भी विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी हुई है। एक चिकित्सक का कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में ६० पार चिकित्सक अपने व मरीजों के हित में दूरी बनाए हुए हैं। चिकित्सक अपने जूनियर चिकित्सकों को फोन पर मशविरा दे रहे हैं।

प्रेक्टिस छूटी, आर्थिक नुकसान भी हो रहा
२१ मार्च के बाद से कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने घर पर मरीजों को देखना बंद कर दिया। इससे उनकी प्रेक्टिस छूट गई है, वहीं उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो रहा है लेकिन कोरोना वायरस के कारण बनी स्थितियों के आगे वह भी मजबूर है। एक वरिष्ठ चिकित्सक के मुताबिक कोरोना से पहले अस्पताल के बाद घर पर हर रोज ३० से ३५ मरीज देखते थे लेकिन अब नहीं देख रहे। वहीं गांवों में पदस्थापित चिकित्सक गांव में ठहरते नहीं और जो ठहर रहे हैं वे भी घर पर मरीज नहीं देख रहे हैं।

सौ सालों में एक बार आता है ऐसा मौका
एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि १०० सालों में एक बार किसी न किसी रूप में महामारी आती है। इस बार कोरोना वायरस के रूप में आई है। इस वायरस ने वर्ष १९१८ में फ्लू से आई महामारी की तरह एकबार फिर पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया। स्वास्थ्य, आर्थिक, राजनीतिक सहित सभी व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया। इन हालातों में वरिष्ठ चिकित्सकों की महती उपयोगिता होती है। वरिष्ठ चिकित्सक अपने अनुभवों से समस्या का समाधान निकाले हैं लेकिन अफसोस अब वे अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।


डर के साए में ...
पहले कोरोना और अब न्यू स्ट्रेन की आहट से हर कोई डरा है। यह बड़ी बात है कि अभी तक बीकानेर जिले में न्यू स्ट्रेन ने दस्तक नहीं दी है। पड़ोसी जिले श्रीगंगानगर में न्यू स्ट्रेन के तीन मरीज मिलने से चिकित्सा विभाग चौकन्ना हो गया है।

तकनीक और व्यवस्थाएं बदली
कोरोना के बाद से हर चीज में बदलाव देखने को मिल रहा है। चिकित्सकों ने मरीजों को देखने का तरीका बदल लिया है। चिकित्सकों ने खुद को सुरक्षा के नाम पर पॉलिथिन के घेरे में कैद कर लिया है। मरीज का जुबानी पूछकर मशीनरी के निर्देशानुसार इलाज किया जा रहा है। घर पर मरीजों को देखने वाले त्रिस्तरीय सुरक्षा में है। घर पर उन्हें सैनेटाइजेशन होकर हॉल या खुले में बैठना पड़ता है। इसके बाद चिकित्सकीय कक्ष में जाना होता है। यहां चिकित्सक और मरीज के बीच करीब दो से ढाई फीट की दूरी रहती है तो कई चिकित्सकों ने मरीजों और खुद के बीच में एक पॉलिथिन का पर्दा लगा रखा है। पर्दें के अंदर से ही चिकित्सक मरीजों को दवा और जांचें लिख रहे हैं।


फैक्ट फाइल एक नजर में...
- एसपी मेडिकल कॉलेज एवं पीबीएम अस्पताल में २५७ चिकित्सक
- सीएमएचओ के अधीन चिकित्सक करीब १९५
- एक जिला अस्पताल
- ५७ पीएचसी
- १८ सीएचसी
- १८ यूपीएचसी
- ४२७ उपस्वास्थ्य केन्द्र

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