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गोचर-ओरण की जमीनों पर भू कारोबारियों की नजर

गोचर भूमि को मास्टर प्लान में शामिल करने का विरोध शुरू  

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गोचर-ओरण की जमीनों पर भू कारोबारियों की नजर

गोचर-ओरण की जमीनों पर भू कारोबारियों की नजर

बीकानेर. नगर नियोजन विभाग के मास्टर प्लान 2023 में गोचर भूमि का भू उपयोग परिवर्तन कर इसे मास्टर प्लान में शामिल करने का विरोध शुरू हो गया है। बीकानेर गोशाला संघ सहित गोचर संरक्षण में जुटी विभिन्न संस्थाओं ने इस पर विरोध दर्ज करवाया है। पत्रकार वार्ता में बीकानेर गोशाला संघ के अध्यक्ष सूरजमाल सिंह नीमराना के अनुसार गोचर, ओरन, तालाब, ग्रीन बेल्ट, जोहड, पायतान की भूमि को मास्टर प्लान में शामिल करना न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। उन्होंने बताया कि नगर नियोजन विभाग की ओर से जारी नक्शे के अनुसार भू उपयोग परिवर्तन में सरह नथानिया, सुजानदेसर, भीनासर व इससे संबंधित गंगाशहर, किसमीदेसर, करमीसर आदि की गोचर भूमियों के बड़े भू भाग को सम्मिलित किया गया है। यह निर्णय सुप्रिम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। नीमराना के अनुसार संघ नगर नियोजन विभाग में इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाएगा। जरुरत पड़ी तो न्यायालय का द्वार भी खटखटाया जाएगा।

वहीं नगरीय विकास समिति के संयोजक पन्ना लाल नागल ने आरोप लगाया कि गोचर, ओरन, तालाब, जोहड, पायतान आदि की भूमियों पर भू कारोबारियों की नजर है। विभाग कुछ लोगों की शह पर गोचर भूमि को मास्टर प्लान में शामिल करने की मंशा बना रहा है, जो अनुचित है। भू कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए रेल बाईपास के अलाइनमेंट एरिया की आड बनाकर झूठे तथ्यों के आधार पर गोचर भूमि आदि को ग्रीन बेल्ट से बाहर करने की कवायद की जा रही है। इस अवसर पर बीकानेर गोशाला संघ सहित विभिन्न गोशालाओं, गोचर संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।