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सीएस आर्य का संदेश…अधिकारी जनता के सेवक है, मालिक नहीं

-बीकानेर: दो सौ परिवादियों से एक-एक कर मिले सीएस आर्य, अधिकारियों को निस्तारण समय सीमा के साथ करने के आदेश
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बीकानेर

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Vimal Changani

•

Updated: 18 Sep 2021, 9:22 AM IST

सीएस आर्य का संदेश...अधिकारी जनता के सेवक है, मालिक नहीं

सीएस आर्य का संदेश...अधिकारी जनता के सेवक है, मालिक नहीं

बीकानेर. प्रदेश के मुख्य सचिव निरंजन आर्य शुक्रवार को दिनभर बीकानेर में रहे। उन्होंने सुबह साढ़े आठ बजे से सर्किट हाउस में तीन घंटे लगातार जनसुनवाई की। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में संभाग के अधिकारियों के साथ मैराथन मीटिंग शाम 6 बजे तक की। फिर वापस सर्किट हाउस लौट आए और देर शाम तक लोगों से एक-एक कर मिलते रहे। सीएस आर्य ने दो सौ लोगों और समूहों से व्यक्तिगत मुलाकात की। उन्होंने खुद ने परिवादी की पूरी बात सुनी, मौके पर उपस्थित जिला कलक्टर, एसपी समेत अन्य अधिकारियों को परिवाद के निस्तारण के संबंध में आदेश दिए। सबसे अहम बात यह रही कि सीएस ने प्रत्येक परिवाद पर निस्तारण की समय सीमा बताते हुए अधिकारियों को निर्देश देते दिखे।

जनसुनवाई लाइव-----

स्थान - सर्किट हाउस
समय -सुबह 8.25 बजे

सर्किट हाउस के परिसर स्थित पार्क में जनसुनवाई में आने वाले लोगों के पंजीकरण शुरू हो गया। करीब 20 से 25 लोग। प्रशासन की ओर से नियुक्त कर्मचारी परिवाद का विषय दर्ज करते हुए पंजीयन स्लिप जारी करते रहे। सर्किट हाउस के कमरा नम्बर एक व दो के बाहर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। कुछ लोग हाथों में पुष्पमाला लिए मुख्य सचिव निरंजन आर्य का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षारत।

समय सुबह - 8.40 बजे

सर्किट हाउस के हॉल में जिला स्तर के सभी अधिकारी अपनी-अपनी सीटों पर बैठ चुके थे। कमरा नम्बर एक के बाहर स्वागत करने वालों की भीड़ बढ़ गई। पुलिस व्यवस्था करने में जुटी दिखी। पार्क में जिला प्रशासन के अधिकारी बार-बार निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी लेते रहे। कुछ संगठनों से जुड़े लोगों ने कमरा नम्बर एक मंे मुख्य सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपे। फिर मुख्य सचिव आर्य कमरे से बाहर आए तो जैन समाज के लोगों ने उनका स्वागत किया। वहीं पंजीकरण पांडाल में बड़ी संख्या में लोग जुट चुके।

समय सुबह 8.45बजे
पंजीकरण स्लिप के क्रमानुसार सर्किट हाउस हॉल के बाहर प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचे कुछ लोगों की कतार लगवाई गई। सुबह 9.51 बजे मुख्य सचिव सर्किट हाउस के हॉल में पहुंचे। सभी अधिकारियों ने सम्मान में सीट से खड़े होकर मुख्य सचिव की अगवानी की। जिला कलक्टर नमित मेहता ने मुख्य सचिव से अनुमति लेकर जनसुनवाई शुरू की। इसी के साथ पहला परिवादी हॉल में पहुंचा। मुख्य सचिव के सामने रखी कुर्सी पर बैठकर परिवादी ने अपनी बात रखी। इसी तरह परिवाद सुनने का क्रम आगे बढ़ता गया।

समय सुबह 10.30 बजे

सर्किट हाउस में पंजीकरण पांडाल में लोगों के पहुंचने का सिलसिला अब भी जारी रहा। सुबह 10.30 बजे तक करीब 155 परिवादी पंजीकरण करवा चुके थे। सुबह 11.10 बजे मुख्य सचिव हॉल से बाहर निकले। बाहर कतारबद्ध खड़े लोगों से सीएस आर्य ने बात सुनी। सुबह 11.18 बजे जिला परिषद में शिक्षक भर्ती में नियुक्ति का इंतजार कर रही एक महिला मुख्य सचिव को अपनी पीड़ा बताते हुए रो पड़ी। सुबह 11.35 बजे तक सीएस आर्य ने परिवादें सुनी और ज्ञापन लिए। इसके बाद संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठक में शामिल होने 11.38 बजे सर्किट हाउस से मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना हो गए।

जनसुनवाई से अफसर यह सीखें

- सीएस सरीखे स्तर के अधिकारी ने परिवादी की पीड़ा सुनने के लिए अपने सामने एक कुर्सी रखवाई। ताकि परिवादी उस कुर्सी पर बैठकर उन्हें अपनी समस्या बता सकें। इसके माध्यम से अफसरों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि वह जनता के सेवक है, मालिक नहीं।

- सीएस आर्य ने प्रत्येक परिवादी या संगठन के प्रतिनिधि मंडल से पूरी बात सुनी। प्रत्येक परिवाद का एक रजिस्टर्ड क्रमांक और स्लिप थी। जिसके आधार पर बाद में उसका फालोअप सीएस कार्यालय कर सकें। इससे ब्यूरोक्रेसी को संदेश मिला कि व्यवस्थित रूप से प्रत्येक परिवाद को दर्ज किया जाना चाहिए।

- जब कोई आमजन अपनी समस्या या काम लेकर मिलता है तो अक्सर अधिकारी परिवाद पर कार्रवाई करने का नोट लगाकर अधीनस्थ या संबंधित कार्यालय को भेज देते है। यहां सीएस ने एेसा करने की बजाए प्रत्येक परिवाद के निस्तारण पर अधीनस्थ अधिकारी से चर्चा करने के साथ उसके निस्तारण का एक समय दिया। किसी में तत्काल, तो किसी में पांच या दस दिन। इससे संदेश दिया कि अधिकारी वास्तव में जनता को राहत देना चाहते है तो काम के निस्तारण की समय सीमा शुरुआत में ही तय कर लेंवे।

- सीएम आर्य की दोपहर 12 बजे मेडिकल कॉलेज में संभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग थी। एेसे में जनसुनवाई में पंजीकृत सभी परिवाद सुनने के बाद मीटिंग में चले गए। शाम करीब 7 बजे मीटिंग से फ्री होकर वापस सर्किट हाउस आए। बाद में आए परिवादियों और मिलने आए लोगों से एक-एक कर मुलाकात की। इससे ब्यूरोक्रेसी को संदेश दिया कि अधिकारी को समय नहीं देखना चाहिए। अंतिम परिवादी तक को सुनना चाहिए।