पुलिस के पास 4000 मामले हैं पेंडिंग, रिकार्ड रूम में ठूंसी जा रही शिकायतें

पुलिस के पास 4000 मामले हैं पेंडिंग, रिकार्ड रूम में ठूंसी जा रही शिकायतें

Amil Shrivas | Publish: Sep, 08 2018 01:29:06 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

शिकायतकर्ताओं को कुछ दिनों की जांच के बाद अपराध दर्ज करने की बात कह दी जाती है, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

बिलासपुर. संगीन मामलों की शिकायतों की जांच करने से पुलिस कतराने लगी है। जिले के थानों में 4000 से अधिक शिकायतें पेंडिंग हैं। ये शिकायतें 4-5 साल पुरानी हैं। पुराने ढर्रे पर काम कर रही पुलिस वर्तमान में मिलने वाली शिकायतों को रिकार्ड रूम में ठूंस रही है। वहीं पुरानी शिकायतों की पोटली खुलने पर 420 के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। संगीन मामलों की शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों को पुलिस जांच का हवाला देकर शिकायत आवेदन लेती है। ऐसा पिछले कई वर्षों से बिलासपुर जिले में चल रहा है। शिकायतकर्ताओं को कुछ दिनों की जांच के बाद अपराध दर्ज करने की बात कह दी जाती है, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। जिले के थानों में ऐसे हजारों मामले हैं, जिनमें कभी जांच ही नहीं गई। ये शिकायतें रिकार्ड रूम में ठूंसकर पुलिस कर्मी बला टाल रहे हैं। वर्तमान में जिले के थानों में 4000 से अधिक शिकायतें पेंडिंग हैं। इनमें अधिकांश मामले धोखाधड़ी, चारसौबीसी, दुष्कर्म और मारपीट के के हैं। पुलिस के लिए अब पेंडिंग शिकायतें सिरदर्द साबित हो रही हैं। पिछले 4-5 साल पुरानी शिकायतों की पोटली पुलिस ने खोली है। पुराने करीब 100 से अधिक संगीन मामले सामने आए, जिनमें अपराध दर्ज करना पड़ा है।

पेंडिंग शिकायतों में सिविल लाइन अव्वल : जिले के अन्य थानों में पेंडिंग शिकायतों के मामलों में सिविल लाइन थाना अव्वल है। यहां पिछले 4 महीनों में धोखाधड़ी व चारसौबीसी के 30 से अधिक मामलों में अपराध दर्ज किए गए हैं। सभी मामलों में शिकायतें 2-4 साल पुरानी थी। कुछ मामले ऐसे भी थे, जिनमें 4-5 साल पहले शिकायत मिली थी। हाल में आए नए थानेदार ने कई मामलों का डिस्पोजल किया। हालांकि अब 400 से अधिक शिकायतें पेंडिंग हैं।
शिकायत होने पर अधिकारियों ने लिया संज्ञान : तत्कालीन आईजी दीपांशु काबरा ने जनवरी 2018 में चार्ज लेने के बाद शिकायत सेल का गठन किया था। पोटली खुली तो अधिकांश शिकायतें ऐसी थी, जिनमें शिकायतकर्ता एफआईआर दर्ज कराने वर्षों से थानों के चक्कर काट रहे थे। आईजी की जांच सेल ने जांच में शिकायतों को सही पाया था। आईजी के आदेश पर 144 मामलों में जिले के अलग-अलग थानों में अपराध दर्ज किए गए। आईजी ने शिकायत लेकर जांच नहीं करने वाले विवेचकों व थानेदारों को नोटिस भी जारी किया था। साथ ही अन्य पेंडिंग शिकायतों की जांच करने के आदेश दिए थे।

सिपाही के खिलाफ हुई थी एफआईआर : हिर्री थाने में पदस्थ एक सिपाही द्वारा जांजगीर-जिले की युवती को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले में महिला थाने में शिकायत पेंडिंग थी। 2 साल तक जांच नहीं हुई, तो पीडि़ता ने आईजी से शिकायत की। शिकायत सही पाए जाने पर आईजी ने आरक्षक के खिलाफ अपराध दर्ज करने का आदेश जारी किया था।
अपराधियों को फरार होने का मिल रहा मौका : संगीन मामलों में शिकायत होने के बाद पुलिस की कार्रवाई ढीली होने के कारण अपराधी मौका पाकर फरार हो जा रहे हैं। शिकायत के कई साल बाद पुलिस अपराध दर्ज कर रही है, लेकिन तब तक आरोपी दूर निकल जाते हैं। पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बाद आरोपी की तलाश करती है। आरोपी नहीं मिलता तो थक हारकर जांच और केस फाइल बंद कर दी जाती है।

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