दवाओं के अवशोषण पर रिसर्च- मरीजों को बार-बार दवा खाने से मिलेगी मुक्ति

Research on drugs: शोध के दौरान अलग-अलग प्रकार के वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से प्रयोग की सत्यता प्रमाणित की गई।

बिलासपुर। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) की प्राकृतिक संसाधन विद्यापीठ के अंतर्गत फार्मेसी विभाग में शरीर के भीतर औषधियों के अवशोषण पर शोध किया गया है। इस विषय का अध्ययन डॉ. शेखर वर्मा ने किया है। उनके शोध निर्देशक प्रो. जे.एस. डांगी, तत्कालीन प्राध्यापक फार्मेसी विभाग, गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर है।
उक्त शोध का शीर्षक ''डेवलपमेंट एण्ड कैरेक्टराइजेशन ऑफ नॉन-एक्वस माइक्रोइम्लशन फॉर पुअरली वाटर साल्यूबल ड्रग्सÓÓ है। शोधार्थी डॉ. शेखर वर्मा की दिनांक 27 फरवरी, 2014 को शोध उपाधि (पीएचडी) प्रदान की गई। वे वर्तमान में पं0 दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विभान एवं आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर में प्रोफसर एवं प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं। अध्ययन के अनुसार शरीर के अंदर औषधि का अवशोषण उत्तम ढंग से होने पर रोग का निराकरण शीघ्रता से होता है। शोध का उद्देश्य जल में अघुलनशील औषधि के लिए एक नए प्रकार का वाहक तंत्र स्थापित करना है इसके अलावा औषधियों की अवशोषण क्षमता बढ़ाना, स्थायित्व में वृद्धि, रोगियों के लिए औषधि का सेवन सुविधाजनक बनाना एवं विश्व जगत में बहुपयोगी औषधि वाहक तंत्र स्थापित करना भी अनुसंधान के प्रमुख उद्देश्यों में है।
शोध के दौरान अलग-अलग प्रकार के वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से प्रयोग की सत्यता प्रमाणित की गई। सत्यता प्रमाणित करने के पश्चात् लम्बे समय तक औषधि और वाहक तंत्र के स्थायित्व का प्रयोगिक अध्ययन किया गया, जिसमें सफलता प्राप्त हुई। इस शोध से रोगियों को बार-बार दवा खाने से मुक्ति मिलेगी, क्योंकि इस प्रकार के वाहक तंत्र से औषधि के खुराक की आवृत्ति को कम की जा सकती है।

JYANT KUMAR SINGH Desk
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