एक्सट्रा 1 किलो वजन भी है दिल पर भारी

एक्सट्रा 1 किलो वजन भी है दिल पर भारी

Mukesh Sharma | Publish: May, 18 2018 04:27:51 AM (IST) तन-मन

वयस्कों में हृदय रोग की शुरुआत सांस में तकलीफ, सीने में दर्द व थकान से होती है। इलाज न कराने पर लक्षण बढ़ते जाते हैं और धीरे-धीरे यह दर्द...

हृदय रोगों का शुरुआत में ही पता कैसे चले?

वयस्कों में हृदय रोग की शुरुआत सांस में तकलीफ, सीने में दर्द व थकान से होती है। इलाज न कराने पर लक्षण बढ़ते जाते हैं और धीरे-धीरे यह दर्द आराम करने के दौरान भी होने लगता है। यह दर्द खाना खाने के बाद अक्सर बढ़ जाता है।

आम आदमी हार्ट अटैक के खतरे से कैसे बच सकता है?

हार्ट अटैक के हालात न बने इसके लिए सबसे पहले जरूरी है हृदय संबंधी कुछ जांचें करा लें। तीस साल की उम्र होने के बाद साल, दो साल या तीन साल में एक बार खून की जांच, इको, ईसीजी और ट्रेड मिल आदि जांच कराते रहना चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ की सलाह से कोरोनरी आर्टरी संबंधी शुरुआती रोग का पता लगाने के लिए अल्ट्रा फास्ट सीटी स्कैन जिसे सीटी एंजिओ कहते हैं, कराते रहना चाहिए। एक बार यह शुरुआती जांचें होने के बाद इनकी रिपोट्र्स संभालकर रखें ताकि बाद में की जाने वाली जांचों से इनका तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके। दरअसल भारतीय आनुवांशिक रूप से डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं और डायबिटीज हृदय रोग को आमंत्रित करती है।

इसलिए जरूरी है कि हर एक शख्स नियमित अंतराल में 30 साल की उम्र से पहले ब्लड शुगर की जांच कराता रहे। प्रतिदिन के भोजन में तेल की मात्रा पांच-छह टी स्पून तक ही सीमित रखें। रोजाना व्यायाम करें क्योंकि इससे हृदय एक्टिव बना रहता है। हृदय डिमंाड और सप्लाई पर यकीन करता है। आप जितना श्रम करेंगे वह उतना ही अधिक खून आपको सप्लाई करेगा।

स्वस्थ हृदय के लिए किस तरह के खानपान से बचना चाहिए?

तले और वसायुक्त खानपान से बचें। रेड मीट हृदय के लिए नुकसानदायक है।

हार्ट अटैक के बाद क्याएहतियात अपनाएं?

ऑयली खानपान से बचें, डॉक्टर के बताए अनुसार व्यायाम करें। खाने के बाद अधिक परिश्रम न करें। धूम्रपान छोड़ें व डायबिटिक हैं तो शुगर कंट्रोल में रखें। अतिरिक्त एक किलो वजन भी दिल पर भार है इसलिए मोटापे से बचें व रोजाना घूमने जाएं।

हृदय रोग तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं।

भारत इसमें आगे क्यों है? युवाओं में हार्ट संबंधी रोग के बढऩे के क्या कारण हैं?

आनुवांशिकता के चलते भारतीयों में हार्ट अटैक यूरोपियन लोगों की तुलना में तीन गुना ज्यादा होता है। भारतीयों में युवा अवस्था में ही हार्ट अटैक के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इंग्लैंड के मेरे ज्यादातर रोगी बुजुर्ग हैं जबकि मेरे पास आने वाले भारतीय रोगी ज्यादातर युवा हैं। ज्यादातर भारतीय मरीजों में मेरे पास कोई जवान बेटा अपने बुजुर्ग पिता को हार्ट के ऑपरेशन के लिए नहीं लाता बल्कि बुजुर्ग पिता अपने जवान बेटे को हृदय के ऑपरेशन के लिए लाता है।

आर्टरी ब्लॉकेज कैसे हटाते हैं?

हृदय की ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी व बाईपास की जाती है। दोनों तरीकों में ब्लॉकेज नहीं हटाए जाते। बाईपास सर्जरी में ब्लॉकेज एक तरफ छोड़ दिए जाते हैं जबकि एंजियोप्लास्टी में धातु की ट्यूब से ब्लॉकेज ढंक दिए जाते हैं।

एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी की जरूरत किस स्थिति में होती है?

आर्टरी में ब्लॉकेज वाले हर मरीज को एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी की जरूरत नहीं होती। सच्चाई यह है कि बहुत कम मरीजों को ही एंजियोप्लास्टी और बाईपास की जरूरत पड़ती है। ऐसे ज्यादातर मरीजों का इलाज दवा के जरिए किया जा सकता है। यदि कोरोनरी आर्टरी के छोटे से हिस्से में ही ब्लॉकेज है तो इसके लिए एंजियोप्लास्टी का विकल्प होगा और यदि ब्लॉकेज लंबी दूरी तक है और इससे कई वाहिकाएं प्रभावित होती हैं तो फिर बाईपास इसके लिए बेहतर उपाय है।

इस साल हार्ट डे की थीम ‘हार्ट: हैल्दी एन्वॉयरमेंट’ है। परिवार हृदय को तंदुरुस्त रखने में कितनी अहम भूमिका निभा सकता है?

पारिवारिक माहौल और उनका सपोर्ट काफी अहमियत रखता है। जिन घरों में अच्छा खुशनुमा माहौल रहता है, वे बिगड़े पारिवारिक माहौल वालों की तुलना में अधिक स्वस्थ होते हैं। शारीरिक और मानसिक सेहत में पारिवारिक माहौल की काफी अहमियत होती है।

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