फेयरनेस क्रीम के नाम से 'फेयर' हटाने पर बॉलीवुड सेलेब्स ने दिया ऐसा रिएक्शन

By: पवन राणा
| Published: 26 Jun 2020, 11:09 PM IST
फेयरनेस क्रीम के नाम से 'फेयर' हटाने पर बॉलीवुड सेलेब्स ने दिया ऐसा रिएक्शन
फेयरनेस क्रीम के नाम से 'फेयर' हटाने पर बॉलीवुड सेलेब्स ने दिया ऐसा रिएक्शन

अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ( Richa Chadha ) लिखती हैं, नॉट फेयर बट लवली, साल 2015 में मैंने अपने टी-शर्ट में इसे प्रिंट कराया था। कल फेयर एंड लवली ( Fair and Lovely ) ब्रांड और मैं आखिरकार एक साथ इस विषय पर सहमत हुए हैं। कल उन्होंने अपने प्रोडक्ट के नाम से फेयर शब्द को हटा दिया।

मुंबई। लोकप्रिय फेयरनेस क्रीम ब्रांड फेयर एंड लवली ( Fair and Lovely ) ने अपने प्रोडक्ट से फेयर शब्द को हटाने का निर्णय लिया है और कंपनी के इस फैसले का ऋचा चड्ढा ( Richa Chadha ) , बिपाशा बसु ( Bipasha Basu ) और अभय देओल ( Abhay Deol ) जैसे बॉलीवुड के सितारों ने स्वागत किया। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने गुरुवार को ऐलान किया कि वह अपने बेस्ट सेलिंग फेयरनेस क्रीम ( Fairness Cream ) फेयर एंड लवली के नाम से फेयर शब्द को हटाने जा रहे हैं। इस फैसले की लोगों ने भरपूर सराहना की।

सांवले रंग को लेकर बिपाशा का छलका दर्द, कहा- बचपन से लोग सांवली कहने लगे

बिपाशा ने इस पर लिखा, 'बड़े होने के दौरान मुझे यह अकसर सुनने को मिलता था कि बॉनी, सोनी से ज्यादा डार्क है। वह थोड़ी सी सांवली है ना? मेरी मां भी डस्की ब्यूटी हैं और मैं काफी हद तक उन जैसी दिखती हूं। मुझे बिल्कुल नहीं पता कि जब मैं छोटी थी, तो दूर के रिश्तेदार इस विषय पर चर्चा ही क्यों करते थे। 15-16 साल की उम्र में मैंने जब मॉडलिंग करना शुरू किया, तो उस वक्त मैंने सुपरमॉडल कॉन्टेस्ट में जीत हासिल की थी...हर अखबार में यह लिखा गया कि कोलकाता की सांवली लड़की विजेता रही। मुझे फिर से इस बात पर आश्चर्य हुआ कि सांवलापन मेरी पहली विशेषता है?'

अभय देओल ने बॉलीवुड को लगाई थी गोरेपन के विज्ञापन करने पर लताड़, फेयर शब्द हटने पर बोले- अभी तो शुरूआत है...

वह यह भी लिखती हैं, पिछले 18 सालों में मुझे फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों के कई लुभावने ऑफर आए, लेकिन मैं हमेशा अपने सिद्धांतों पर अड़ी रही। इन सबका बंद होना जरूरी है। ये जो गलत सपने हम बेच रहे हैं कि केवल फेयर ही लवली और खूबसूरत है, जबकि देश के अधिकतर लोग सांवले ही हैं। दूसरे ब्रांड्स को भी जल्द ही इन कदमों का अनुसरण करना चाहिए।

View this post on Instagram

“NOT FAIR BUT LOVELY”, I had gotten this printed on a T shirt back in 2015. Yesterday, the brand @fairandlovely_id and I were finally in agreement! 👏🏽💕❤️Yesterday, they dropped the word FAIR from their product name... Before you attack the brand for only paying ‘lip service’, please remember, it takes many generations for ideas to change. There is demand and hence there is supply...We have been told since we were children, that fairness is the only definition of beauty! It is also another unfortunate byproduct of colonialism and casteism! But it’s 2020, and a lot of BS is getting dismantled ! It took me many years of unlearning to gain confidence and start LOVING my complexion! Der aye durust aye, I say. I welcome this decision by the brand... and it’s not easy... brands have a thousand meetings before they change even the FONT in their logo... I hope slowly and steadily mindsets change... we must continuously and without any influence of the West, define our own idea of beauty. Beauty must be inclusive! Bravo @fairandlovely_id 👏🏽 . . . मुझे लगता है कि भारत की तरह,बहुत से ऐसे देश हैं जहाँ अंग्रेज़ों ने राज किया।अक्सर ऐसे देशों में ग़ुलामी एक मानसिक रूप भी धारण कर लेती है।हमें लगने लगता है की हमारा रंग, हमारी भाषा, हमारा खाना अच्छा नहीं है... और यही अंग्रेज़ हमें लगातार बताते भी थे... ये दुर्भाग्यवश है की हम अपनी ही चीज़ों को हीन, (inferior) समझकर उन्हें बदलने की कोशिश करते हैं... बचपन से ये बताया जाता है कि गोरा रंग ही ख़ूबसूरत है ! पहले तो फ़िल्मों में गाने भी यू ही बनते थे जैसे कि ... “ हम काले हैं तो क्या हुआ दिल वालें हैं”... क्या ऐसा गाना आज की डेट में बन सकता है? सब चीज़ों को बदलने में समय लगता है... हमें अपने रंग पर गर्व होना चाहिए! . . . #NotFairButLovely #RacismIsAVirus #RichaChadha #richareccomends #Truth #lockdown #selfhate #postcolonial #actorslife #fairandlovely

A post shared by Richa Chadha (@therichachadha) on

अभिनेत्री ऋचा चड्ढा लिखती हैं, नॉट फेयर बट लवली, साल 2015 में मैंने अपने टी-शर्ट में इसे प्रिंट कराया था। कल फेयर एंड लवली ब्रांड और मैं आखिरकार एक साथ इस विषय पर सहमत हुए हैं। कल उन्होंने अपने प्रोडक्ट के नाम से फेयर शब्द को हटा दिया। उन्होंने आगे लिखा, 'मुझे लगता है कि भारत की तरह, बहुत से ऐसे देश हैं जहां अंग्रेजों ने राज किया। अक्सर ऐसे देशों में गुलामी एक मानसिक रूप भी धारण कर लेती है। हमें लगने लगता है की हमारा रंग, हमारी भाषा, हमारा खाना अच्छा नहीं है... और यही अंग्रेज हमें लगातार बताते भी थे... ये दुर्भाग्यवश है की हम अपनी ही चीजों को हीन समझकर उन्हें बदलने की कोशिश करते हैं... बचपन से यह बताया जाता है कि गोरा रंग ही खूबसूरत है! पहले तो फिल्मों में भी गाने भी यू ही बनते थे जैसे कि... हम काले हैं तो क्या हुआ दिल वालें हैं... क्या ऐसा गाना आज की डेट में बन सकता है? सब चीजों को बदलने में समय लगता है... हमें अपने रंग पर गर्व होना चाहिए!

अभिनेता अभय देओल लिखते हैं, हमें सही दिशा में ले जाने में हैशटैगब्लैकलाइव्समैटर अभियान का एक बड़ा हाथ है। लेकिन कोई गलती न करें, हमारे देश में फेयरनेस क्रीम के एंडोर्समेंट और बिक्री के संबंध में सांस्कृतिक बदलाव लाए जाने की दिशा में आप में से जो भी लोग मुखर रहे हैं, इस जीत में उनका भी योगदान है।