
मीटिंग वही अच्छी जो कम समय में पूरी हो
वर्ष 2019 की शुरुआत हो चुकी है और अगर आप नए साल में एक सेकंड भी फोन और बेवजह की मीटिंग में खराब नहीं करना चाहते हैं तो आपके लिए किताबें पढऩा सबसे अच्छा रहेगा। स्टीवन रॉजलबर्ग की किताब ‘द सरप्राइजिंग साइंस ऑफ मीटिंग्स’ ऐसी ही किताब है जिसमें जिंदगी को सहज ढंग से जीने का तरीका बहुत सलीके से बताया है। किताब में स्टीवन ने लिखा है कि नए साल पर हर किसी को तय करना होगा कि वे खाली बैठने और बेवजह की मीटिंग से बचे। स्टीवन यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में शोधार्थी हैं और टीमवर्क पर काम कर रहे हैं। किताब में इन्होंने लिखा है कि किसी बात को लेकर जहां भी बैठके होती हैं उसका समय 5 से 10 फीसदी कम होना चाहिए जो समय आपने पहले से तय किया हो। मीटिंग का एजेंडा प्रभावी हो इसके लिए त्वरित फैसले लें और उसे लागू करें। नए आइडिया के लिए चीजों पर गौर करें और उसपर कम से कम समय में चर्चा करें ना कि लंबी प्रेजेंटेशन में समय खराब करें।
किताब में लिखा है कि मीटिंग में समय व्यर्थ करने की बजाए टीम की परफॉर्मेंस बढ़ाने पर जोर दें। इसके लिए बहस की नहीं अच्छी सोच के साथ उसको लागू कराने की हिम्मत होनी चाहिए। किताब में आंकड़े का जिक्र करते हुए लिखा है कि 47 फीसदी कर्मचारी मीटिंग को समय बर्बाद करने का सबसे आसान तरीका मानते हैं। मीटिंग को सफल बनाने के लिए जिस व्यक्ति को बैठक लेनी है उसके पास अच्छी योजना होनी चाहिए। मीटिंग में कम से कम समय लगे इसके लिए स्पष्ट रणनीति होनी चाहिए। मीटिंग से पहले सर्वे रिपोर्ट, एजेंडा और चेकलिस्ट का होना जरूरी है जिससे बाद में ये न लगे कि बैठक बेनतीजा रही। इसका पालन बैठक को सफल बताएगा। किताब में स्टीवन ने सभी को सलाह दी है कि खुद को दिशाहीन न होने दें। कार्यस्थल पर जीवन को नए अंदाज में शुरू करें इसका लाभ आपके साथ कंपनी को भी मिलेगा।
वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत
Published on:
13 Jan 2019 03:02 am
