हजारों टन गेहूं बर्बाद होने की कगार पर, चेतावनी के बावजूद नहीं जागा प्रशासन

मौसम विभाग जारी किया है अलर्ट फिर भी क्रय केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे पड़े हैं हजारों टन गेहूं

By: Ashutosh Pathak

Published: 04 May 2018, 11:22 AM IST

बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश में पिछले 3-4 दिनों से मौसम ने करवट ले ली है। अचानक तेज आंधी और बारिश ने सूबे के कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। कहीं तूफान ने कई आशियाने उजाड़ दिए तो कई लोगों को मौत की नींद भी सुला दिया। इसके साथ ही बेमौसम बारिश किसानों के ऊपर भी आफत बनकर बरसी। खेतों में हजारों किसानों की खड़ी पकी फसल बर्रबाद होने की कगार पर है। जिससे किसान परेशान है।

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अचानक आए इस आंधी-तूफान को लेकर मौसम विभाग ने अभी भी चार-पांच दिनों को लिए चेतावनी जारी की है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन अभी जागा नहीं हैं। बुलंदशहर के कई सरकारी क्रय केंद्रों पर खुले में गेहूं पड़े हुए हैं और मौसम का यही हाल रहा और बारिश होती है तो करोड़ों रुपये का गेहूं बर्बाद हो सकता है। जिले के छतारी, सिकन्द्राबाद और खुर्जा समेत कई इलाकों में क्रयकेन्द्रों पर खुले में गेहूं पड़ा है। लेकिन जिला प्रशासन को कोई सुध नहीं है।


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बुलंदशहर को शासन की ओर से ने 1.17 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है। जिसे 15 जून तक लक्ष्य पूरा करना है। फिलहाल जिले में 124 क्रय केंद्र बनाए गए हैं और लक्ष्य पूरा करने के लिए और क्रय केंद्र बनाए जाएंगे। लेकिन अब तक जिले के अंदर 51 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है और अधिकतर गेहूं क्रय केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे गेहूं के बोरे रखे हैं। ऐसा नहीं है कि मौसम आज या कल अचानक खबार हुआ हो। पिछले कई दिनों से चेतावनी जारी की गई थी और अभी आगे के लिए भी मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। लेकिन जिला प्रशासन को किसानों की खून-पसीने से उगाए गए इन फसलों की जरा भी कद्र नहीं।


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इस बारे में जब स्थानीय क्रय केंद्र प्रभारी से पूछा गया तो उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिए और खुद को बेबस बताते हुए कहा कि गेहूं की कटाई अंतिम चरण में होने की वजह से क्रय केंद्रों पर आवक में अचानक वृद्धि हुई है। खरीद के अनुपात में उठान न हो पाने के कारण क्रय केंद्रों पर गेहूं का अंबार लगा हुआ है। जिसकी वजह से अभी तक गेहूं को अभी तक रखने की व्यव्स्था नहीं हो पाई है। वहीं जिला विपणन अधिकारी अविनाश चंद ने कहा कि जिले में सभी केंद्रों पर बारिश से बचाव के लिए त्रिपाल की व्यवस्था कर ली गई है। जिस केंद्र पर बारिश के कारण गेहूं बर्बाद होगा, उस केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


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