नैनवां से बूंदी रूट पर रोडवेज बसों का टोटा

बूंदी के लिए बस कब जाएगी....तो जवाब मिलता है कोई पता नहीं? अभी आ जाए नहीं तो घंटों तक नहीं आए। बूंदी जाना है तो कोई टैक्सी या जीप पकड़ों। नैनवां से जयपुर या कोटा जाने के लिए तो रोडवेज बसों की कोई कमी नहीं है। राजधानी व संभाग मुख्यालय जाने के लिए तो बसों की भरमार है, जबकि जिला मुख्यालय पर आने-जाने के लिए बसों का टोटा कर रखा है।

By: pankaj joshi

Published: 30 Nov 2020, 06:23 PM IST

नैनवां से बूंदी रूट पर रोडवेज बसों का टोटा
तीन चौथाई बसों का संचालन बंद पड़ा
सबसे अधिक आय देने वाला रूट
नैनवां . बूंदी के लिए बस कब जाएगी....तो जवाब मिलता है कोई पता नहीं? अभी आ जाए नहीं तो घंटों तक नहीं आए। बूंदी जाना है तो कोई टैक्सी या जीप पकड़ों। नैनवां से जयपुर या कोटा जाने के लिए तो रोडवेज बसों की कोई कमी नहीं है। राजधानी व संभाग मुख्यालय जाने के लिए तो बसों की भरमार है, जबकि जिला मुख्यालय पर आने-जाने के लिए बसों का टोटा कर रखा है। जबकि रोजाना सैकड़ों लोगों का आना-जाना होता है। नैनवां-बूंदी मार्ग पर पहले आधे-आधे घंटे में रोडवेज बसों का संचालन हो रहा था उस रूट पर अब कई घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता है। पहले अठारह बसों का संचालन हो रहा तो अब केवल चार बसें ही बूंदी के लिए जा रही है। जिनका भी कोई समय निर्धारित नहीं होता। बूंदी आगार को सबसे ज्यादा आय देने वाले नैनवां-बूंदी रूट पर राजस्थान पथ परिवहन निगम ने तीन चौथाई बसों को ही बंद कर रखा है। बंद बसों के रूट चार्ट के अनुसार रोड टैक्स भी भरा जा रहा है। निगम को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है और यात्री भी परेशानी का सामना कर रहे हैं। रोडवेज के लिए नैनवां-बूंदी मार्ग बूंदी आगर ही नहीं संभाग का बसें ज्यादा आय देने वाला रूट था। रोडवेज के सूत्रों की माने तो रूट पर पहले प्रतिदिन अस्सी से एक लाख रुपए की आय होती थी जो बसे बंद होने से घटकर 6 से सात हजार रुपए ही रह गई। बसों के संचालन की व्यवस्था बिगड़ी होने से ऐसी स्थिति बनी है। रूट से रोडवेज बसें घटाई तब से ही इस रूट पर चल रही टैक्सियां व निजी बस वाले अच्छा मुनाफा कमा रहे है।
इन गांवों-कस्बों को परेशानी
रूट पर कई बड़े व्यापारिक कस्बे व गांव बसे हुए है। देई, जेतपुर, पीपल्या, मोतीपुरा, सबलपुरा, खटकड़, फूलेता, तलवास, मोड़सा, गुढादेवजी, सुवानियां, बामनगांव, रजलावता, समीधी, बाछोला, गंभीरा, दुगारी, खानपुरा, बालापुरा, सहण ग्राम पंचायतों के सौ से अधिक गांवों के लोगों के लिए बूंदी जिला मुख्यालय व नैनवां उपखंड मुख्यालय तक रोडवेज बस सेवा ही मुख्य आवागमन के साधन के साथ ही नैनवां उपखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय तक जाने के लिए भी रोडवेज बसे ही आवागम के साधन है। रूट से इतने गांव जुड़े होने से रूट पर चलने वाली प्रत्येक बस ओवर लोड चला करती थी। घाटे के नाम पर एक वर्ष से बसों की कमी कि है तब से ही ग्रामीणों को निजी बसों या टैक्सियों में यात्रा करनी पड़ रही है।
पहले 18, अब 4 बसें ही जा रही
नैनवां रोडवेज बुकिंग के बाहर लगा रखे बसों के रूट चार्ट के अनुसार बूंदी जाने के लिए सुबह साढ़े चार बजे रात आठ बजे तक 18 बसों का संचालन हो रहा था। अब बूंदी के लिए सीधी चार बसें ही चल रही है। पहली बस सुबह 7.30 पर दूसरी बस 9.45 पर, तीसरी बस दोपहर डेढ़ बजे, चौथी बस 3.45 पर बूंदी जाती है। इनके अलावा वाया बायी और जजावर दो बसों का संचालन हो रहा है।
जयपुर-कोटा के लिए बसों की भरमार
जिला मुख्यालय पर जाने के लिए बसों का टोटा बना रहता है वही नैनवां से राजधानी जयुपर व कोटा जाने के लिए बसों की भरमार है। नैनवां से जयपुर के लिए सुबह पौने आठ बजे से शाम 6 बजे तक एक दर्जन बसें जा रही है तो संभाग मुख्यालय कोटा के लिए सुबह पौने आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक आठ बसों का संचालन हो रहा है।
आगार प्रबंधक का कहना
बूंदी आगार प्रबंधक रीनू देवड़ा का कहना हैं कि स्टाफ की कमी से नैनवां रूट पर बसों का संचालन कम हो रहा है। अभी दो बसें चार चक्कर करती है। एक दिसम्बर के बाद दो और बसों का संचालन बढ़ाया जाएगा।

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