उसने ट्रैक्टर की स्टीयरिंग संभाली और मेहनत शुरू की। उसके पसीना रंगलाया और खेतों में फसल लहलहाने लगी। सुबह ४ बजे से उसकी जिदंगी की शुरूआत होती हैैै। खेती बाड़ी के साथ सब्जी बेचने का काम भी करती है इसके लिए खुद जीप से जयपुर , उदयपुर ,भीलवाड़ा औश्र जोधपुर तक गाडी लेकर जाती है। जमनाबाई की ६ बेटिया है, दो बेटिया बीएड की तैयारी कर रही है, 6 बेटियों के हाथ पीले करवा दिए। उसका एक ही सपना है दोनो बेटिया अपने पैरो पर खड़ी होकर मजबूत बने। बेटे का ताना इस मां को भी झेलना पड़ा। ऐसे में अब अपनी दोनो बेटियों को शिक्षका बनाने के लिए दिन रात मेहनत कर रही है। मां के इस संघर्ष भरी राह को लेकर दोनो बेटियों को भी नाज है।