
job cut
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी ( PM MODI ) अपने लगभग हर भाषण में फिलहाल लोगों को काम से न निकालन की अपील कर रहे हैं। ताकि लॉकडाउन और कोरोना की वजह से लोगों को और परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिन अब लोगों के सामने छंटनी के सिवाय कोई चारा नजर नहीं आ रहा है । श्रम पर संसद की स्थायी समिति ने सुझाव दिया है कि 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की मंजूरी के बिना कर्मचारियों की छंटनी या बंदी की अनुमति होनी चाहिए । ट्रेड यूनियनों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।
ऑनलाइन सौंपी गई रिपोर्ट- कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से लागू राष्ट्रव्यापी बंद के बीच समिति ने ऑनलाइन लोकसभाध्यक्ष ओम बिड़ला को औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर अपना प्रतिवेदन सौंपा। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति के संज्ञान में आया है कि कुछ राज्य सरकारों मसलन राजस्थान (Rajsthan) में इस सीमा को बढ़ाकर 300 किया गया है. मंत्रालय का कहना है कि इससे रोजगार बढ़ा है और छंटनियां कम हुई हैं.’’
45 दिन में मांगा रिजल्ट- समिति ने किसी ट्रेड यूनियन के रजिस्ट्रेशन के अप्लीकेशन प्रोसेस पर फैसला करने के लिए 45 दिन की समय सीमा का सुझाव दिया है। समिति ने कहा है कि उद्योगों पर कर्मचारियों को लॉकडाउन पीरियड की सैलेरी देने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता है।
कोरोना के लिए लागू होगी यही सिफारिश- बीजू जनता दल सांसद भर्तुहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कई बार उद्योगधंधो को भूकंप, बाढ़, चक्रवात के हालात में लंबे टाइम के लिए बंद करना पड़ता है। इसमें मालिक कुछ नहीं कर सकते । ऐसे में श्रमिकों को सेलेरी देने के लिए उन्हें कहना उनके साथ नाइंसाफी होगी। महताब ने कहा कि उद्योगों की मौजूदा बंदी कोविड-19 संकट की वजह से है। ऐसे में उन पर कर्मचारियों को बंद की अवधि का वेतन देने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता है।
Published on:
25 Apr 2020 05:01 pm
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
