पंजाब में खनन माफिया बेकाबू,विधायक पर किया हमला

पंजाब में खनन माफिया बेकाबू,विधायक पर किया हमला
mla amarjeet

| Publish: Jun, 21 2018 06:15:50 PM (IST) Ropar, Punjab, India

पंजाब में खनन माफिया बेकाबू हो गया है। विपक्ष के तमाम शोर के बावजूद सरकार खनन माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम रही है

(राजेन्द्र सिंह जादोन की रिपोर्ट)

चंडीगढ। पंजाब में खनन माफिया बेकाबू हो गया है। विपक्ष के तमाम शोर के बावजूद सरकार खनन माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। राज्य सरकार दो दिन पहले मोहाली जिले में खनन माफिया द्वारा ब्लॉक फॉरेस्ट आफिसर पर हमले के सदमे से उबरने के लिए फॉरेस्ट कर्मियों को हथियार देने पर विचार कर ही रही थी कि गुरूवार को रोपड से आम आदमी पार्टी के विधायक अमरजीत सिंह संदोआ पर खनन माफिया ने हमला कर दिया। विधायक संदोआ बीहारा गांव में अवैध खनन रोकने गए थे कि तभी उन पर हमला कर दिया गया। संदोआ की छाती पर पत्थर से चोट पहुंचाई गई। उन्हें आनन्दपुर साहिब के अस्पताल में भर्ती कराया है।

पत्रकारों को अवैध खनन दिखाने गए थे

संदोआ गुरूवार दोपहर बाद कुछ पत्रकारों को क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन को दिखाने गए थे। खनन माफिया को विधायक की योजना की पहले से ही जानकारी मिल गई और उन्होंने मौके से मशीनें व वाहन हटा दिए। जैसे ही विधायक अपनी टीम के साथ पहुंचे माफिया के लोगों ने लोहे की रॉड व पत्थरों से हमला कर दिया। विधायक के सशस्त्र अंगरक्षक से भी मारपीट की। आनन्दपुर साहिब अस्पताल के डॉक्टरों ने विधायक की छाती में दर्द और ईसीजी रिपोर्ट असामान्य आने पर इलाज के लिए उन्हें चंडीगढ पीजीआई भेज दिया।

ब्लॉक फारेस्ट आफीसर पर हो चुका है हमला

इस घटना से पहले मोहाली जिले के सियोंक गांव में अवैध रेत माइनिंग और वन क्षेत्र की लकडी चोरी रोकने का प्रयास करने पर सोमवार रात ही ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफीसर पर हमला किया गया था। बलॉक फारेस्ट आफीसर को पीजीआई चंडीगढ में दाखिल कराया गया है। इसके बाद वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने कहा था कि माइनिंग माफिया से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया जाएगा और क्षेत्र में तैनात वन कर्मियों को फायर आम्र्स दिए जायेंगे। हालांकि फॉरेस्ट स्टाफ को हथियार देने का प्रस्ताव वर्ष 2014 से लंबित है। वन,गृह और विधि विभाग को इस प्रस्ताव पर फैसला करना बाकी है। क्षेत्र में तैनात फॉरेस्ट स्टाफ को देने के लिए 30 डबल बैरल गन और पिस्तौल भी खरीद ली गई थीं लेकिन सम्बधित कानून न बनाए जाने के कारण ये हथियार अभी फिल्लौर पुलिस के पास जमा है।

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