खेती और खाद्यान्न की प्रणाली में बदलाव के लिए कृषि अर्थशास्त्रियों का मंथन

खेती और खाद्यान्न की प्रणाली में बदलाव के लिए कृषि अर्थशास्त्रियों का मंथन
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| Publish: Jun, 15 2018 06:46:10 PM (IST) Chandigarh, India

खेती और खाद्यान्न की मौजूदा प्रणाली को पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक बताते हुए कृषि अर्थशास्त्रियों ने निरापद ढांचा खोजने के लिए मंथन शुरू किया

(राजेन्‍द्र सिंह जादोन की रिपोर्ट)
चंडीगढ। खेती और खाद्यान्न की मौजूदा प्रणाली को पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक बताते हुए देश के करीब तीस कृषि अर्थशास्त्रियों ने शुक्रवार को यहां निरापद ढांचा खोजने के लिए मंथन शुरू किया। कृषि अर्थशास्त्रियों का दो दिवसीय यह मंथन शनिवार को पूरा होगा। इस मंथन की आयोजक संस्था हिमालयन इकॅालॉजी की ओर से बताया गया कि इस मंथन में तमिलनाडु के कोयम्बटूर और कर्नाटक के बंगलुरू व केरल समेत देश के अलग-अलग स्थानों के करीब तीस कृषि अर्थशास्त्री शामिल हुए हैं।

 

पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक

 

मंथन में शामिल कृषि अर्थशास्त्री यह मान रहे हैं कि मौजूदा खेती और खाद्यान्न उत्पादन का तरीका भारत में पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक है। खेती और अधिक पैदावार के लिए वन साफ किए जा रहे हैं। निरंतर वन क्षेत्र घटने से पर्यावरण संतुलन गडबड हो रहा है। खेती के लिए वनों की कटाई से पारिस्थितिकी पर विपरीत असर पड रहा है। फिर जो खाद्यान्न पैदा होता है वह भी मानव स्वास्थ्य के लिए अहितकर है। इसलिए निरापद कृषि प्रणाली की जरूरत है। इस नजरिए से पंजाब को मॅाडल बनाया जा सकता है।

 

जोखिम रहित प्रणाली तय करेंगे

 

इस मंथन में शामिल हुए विशेषज्ञों ने बताया कि खेती ओर खाद्यान्न उत्पादन की कोई जोखिम रहित
प्रणाली तय कर इसका मसौदा संसद और राजनीतिक दलों तक ले जाया जाएगा। इस मंथन में पंजाब के शहरी निकाय मंत्री नवाजोत सिद्धू भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि सृष्टि को बदलने के लिए दृृष्टि की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बेहतर खेती की खोज में पंजाब की अहम् भूमिका हो सकती है। वे मंथन में आए कृषि अर्थशास्त्री देविंदर को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह से मिलाएंगे ताकि यह पहल आगे बढे। उल्‍लेखनीय है कि भारत में पंजाब कृषि एवं खाद्यान्न उत्‍पादन के मामले में अग्रणी राज्‍यों में है।

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