​​​​​पंजाब सरकार ने भी हाईकोर्ट में नदी जल की कीमत वसूल करने की याचिका का समर्थन किया

पंजाब के महाधिवक्ता अतुल नन्दा ने कहा कि राजस्थान और हरियाणा को नोटिस जारी किए जाने की जरूरत है...

By: Prateek

Published: 06 Jul 2018, 08:24 PM IST

राजेंद्र सिंह जादौन की रिपोर्ट...

(चंडीगढ): पंजाब सरकार ने भी हाईकोर्ट में शुक्रवार को उस याचिका का समर्थन किया जिसमें वर्ष 1947 से पंजाब की नदियों का जल ले रहे राज्यों से इसकी कीमत के रूप में 80 हजार करोड रूपए वसूल करने की मांग की गई है।

 

यह है मांग

तीन माह पहले पटियाला से आम आदमी पार्टी के सांसद डाॅ धर्मवीर गांधी व 19 अन्य ने राजस्थान और अन्य नान रिपेरियन राज्यों जिन राज्यों (जहां से नदी का उद्गम नहीं होता है) से वर्ष 1947 से गणना कर नदी जल का मुआवजा पंजाब को दिलाने की मांग को लेकर याचिका पेश की थी। मुख्य न्यायाधीश कृृष्ण मुरारी और जस्टिस अरूण पाली की पीठ के समक्ष शुक्रवार को उपस्थित हुए पंजाब के महाधिवक्ता अतुल नन्दा ने याचिका का समर्थन किया।


सरकार के महाधिवक्ता ने किया समर्थन

नन्दा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी सम्बन्धित मुद्दा लम्बित है। नन्दा ने कहा कि राजस्थान और हरियाणा को नोटिस जारी किए जाने की जरूरत है। पीठ ने सुनवाई के बाद अगली सुनवाई 10 सितम्बर को तय की है। पीठ ने नन्दा को निर्देश दिए कि वे इस मुद्दे से सम्बन्धित सुप्रीम कोर्ट में लम्बित मामले के सभी दस्तावेज और प्रतियां पेश की जाएं। याचिकाकर्ताओं ने याचिका में कहा है कि विश्व में पंजाब एकमात्र ऐसा राज्य है जिसका पानी अन्य नान रिपेरियन राज्यों को दिया जा रहा है। इन याचिकाकर्ताओं में सांसद डाॅ धर्मवीर गांधी के अलावा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस अजीत सिंह बैंस भी शामिल है।

 

याचिकाकर्ताओं के वकील आरएस बैंस ने कहा कि ऐसा कोई संवैधानिक सिद्धांत या सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कोई कानून अथवा किसी जल न्यायाधिकरण का कोई फैसला नहीं है जिसके द्वारा रिपेरियन राज्यों का पानी नान रिपेरियन राज्यों को दिया जाए फिर भले ही वे उत्तराधिकारी राज्य ही क्यों न हों। बैंस ने कहा कि ऐसा कोई न्यायिक उदाहरण नहीं है जिसमें कि पैतृृक राज्य का पानी नाॅन रिपेरियन या उत्तराधिकारी राज्य बगैर कीमत लिए दिया गया हो।

 

याचिका में किया गया इस फैसले का उल्लेख

याचिका में भारत सरकार के 29 जनवरी 1955 के पहले फैसले का उल्लेख किया गया है। इस फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि पानी की कीमत के बंटवारे पर अलग से विचार किया जाएगा। इस फैसले पर कभी गौर नहीं किया गया। इस फैसले के अनुसार राजस्थान को 50.48 फीसदी पानी दिया गया। जम्मू-कश्मीर को चार फीसदी और पंजाब व पेप्सू को 45.42 फीसदी पानी दिया गया। संविधान के तहत राजस्थान को पंजाब,हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर से पानी की एक बूंद लेने के लिए दावा करने का अधिकार नहीं है। राजस्थान तो तत्कालीन पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य भी नहीं है। देश की आजादी से पहले राजस्थान कीमत का भुगतान कर पंजाब से पानी लेता था। तब पंजाब के पास सरप्लस पानी था। अब पंजाब में पानी की कमी है और 14 लाख ट्यूबवैल पानी की कमी झेल रहे हैं।

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